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    दिल्ली SIR में दिवंगत अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय का नाम भी नोटिस सूची में, जयशंकर, आडवाणी और सिसोदिया समेत कई प्रमुख नाम शामिल

    7 hours ago

    Yugcharan News / 21-09-2026

    नई दिल्ली। दिल्ली में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से जुड़ी विसंगतियों की जांच के लिए जारी नोटिसों की सूची में कई प्रमुख नाम सामने आए हैं। इनमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू, पूर्व दिल्ली उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और विदेश सचिव विक्रम मिस्री जैसे नाम शामिल हैं। इस सूची में सबसे उल्लेखनीय मामलों में दिवंगत अर्थशास्त्री और पद्म पुरस्कार से सम्मानित बिबेक देबरॉय का नाम भी है, जिनका नवंबर 2024 में निधन हो चुका था।

    चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत तैयार दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में देबरॉय का नाम मौजूद पाया गया और उनके रिकॉर्ड को पिछली SIR सूची से “नो मैपिंग” की श्रेणी में चिह्नित किया गया। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में नहीं रखा जाएगा। एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी के अनुसार, देबरॉय की मृत्यु की जानकारी अधिकारियों को थी, लेकिन आयोग के निर्देशों के तहत कुछ विशेष श्रेणियों में आने वाले नामों को ड्राफ्ट सूची में शामिल किया गया था ताकि दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान आवश्यक दस्तावेज जुटाए जा सकें।

    33 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस

    दिल्ली SIR के तहत लगभग 33.1 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड को “नो मैपिंग” या “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” जैसी श्रेणियों में रखा गया है। इन मामलों में मतदाताओं के वर्तमान विवरण और पिछली मतदाता सूची के बीच मिलान नहीं होने या रिकॉर्ड में किसी तरह की तार्किक विसंगति पाए जाने पर सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने 19 सितंबर को ऐसे मामलों का बूथवार विवरण सार्वजनिक किया था।

    चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। नोटिस मिलने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटा दिया गया है। संबंधित मतदाता को आवश्यक दस्तावेज और जानकारी देकर अपने रिकॉर्ड का सत्यापन कराने का अवसर दिया जा रहा है।

    देबरॉय का मामला इसलिए अलग है क्योंकि वह नवंबर 2024 में ही दुनिया से विदा हो चुके थे। इसके बावजूद उनका नाम दिल्ली की 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में मौजूद रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनका नाम दिल्ली कैंट विधानसभा क्षेत्र के मतदाता के रूप में दर्ज था। रिपोर्टों में उन्हें ड्राफ्ट सूची में 70 वर्षीय मतदाता के तौर पर दर्ज किए जाने का उल्लेख है, जबकि उनके निधन के समय उनकी उम्र 69 वर्ष थी।

    SIR में प्रमुख राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियों के नाम

    बिबेक देबरॉय के अलावा विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी पत्नी क्योको सोमेकावा जयशंकर के नाम भी “नो मैपिंग” श्रेणी में सामने आए हैं। इसी तरह भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी और बहू गीतिका आडवाणी के नाम भी इसी श्रेणी में दर्ज किए गए हैं।

    विदेश सचिव विक्रम मिस्री का नाम भी उन मतदाताओं की सूची में है जिनके रिकॉर्ड का पिछली SIR सूची से मिलान नहीं हो सका। पूर्व भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय को भी नोटिस जारी किया गया है, जबकि उनकी पत्नी गौरी मालवीय के रिकॉर्ड में “सेल्फ नेम मिसमैच” दर्ज किया गया है।

    पूर्व दिल्ली उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी नोटिस सूची में हैं। हालांकि सिसोदिया के मामले में नोटिस जारी किए जाने का कारण संबंधित रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किया गया है। उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया के मामले में “सेल्फ नेम मिसमैच”, जबकि उनके बेटे मीर सिसोदिया के मामले में “पैरेंट नेम मिसमैच” दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

    कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी के मामले में भी नोटिस जारी होने की सूची में कारण वाला कॉलम खाली बताया गया है।

    पूर्व चुनाव अधिकारियों के नाम भी शामिल

    SIR की प्रक्रिया में कुछ पूर्व चुनाव अधिकारियों के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आए हैं। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्र और उनकी पत्नी नीलू चंद्र के नाम “पिछली SIR से नो मैपिंग” श्रेणी में रखे गए हैं। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त अरुण गोयल का नाम भी इसी कारण से नोटिस सूची में शामिल किया गया है।

    चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू के मामले में “सेल्फ नेम मिसमैच” की विसंगति दर्ज की गई थी। इसका अर्थ है कि मौजूदा SIR प्रक्रिया में दर्ज नाम और पिछली मतदाता सूची में दर्ज नाम के बीच अंतर पाया गया। हालांकि, दिल्ली के संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी ने बाद में बताया कि दस्तावेजों, तथ्यों और अन्य विवरणों के सत्यापन के बाद संधू का नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाने के लिए मान्य कर दिया गया है।

    इससे यह भी स्पष्ट होता है कि SIR के दौरान जारी किया गया नोटिस अपने आप में मतदाता का नाम हटाने का अंतिम फैसला नहीं है। सत्यापन और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम सूची तैयार की जाएगी।

    अन्य प्रमुख हस्तियां भी सूची में

    SIR के दौरान दिल्ली के कई अन्य जाने-माने लोगों के रिकॉर्ड भी जांच के लिए चिह्नित किए गए हैं। इनमें पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी सुदेश धनखड़, पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर, दिल्ली के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, पूर्व दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार सचदेवा, इतिहासकार रोमिला थापर और नई दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज के नाम शामिल हैं।

    जंगपुरा विधानसभा क्षेत्र में समाजशास्त्री और सामाजिक मनोवैज्ञानिक आशीष नंदी, वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर तथा राजनीतिक संचार सलाहकार दिलीप चेरियन के नाम भी सामने आए हैं। पत्रकार शीला भट्ट के रिकॉर्ड में “सेल्फ नेम मिसमैच” दर्ज किया गया है, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी का नाम “नो मैपिंग” श्रेणी में रखा गया है।

    कालकाजी विधानसभा क्षेत्र में अर्थशास्त्री दीपक नैयर के रिकॉर्ड में “पैरेंट नेम मिसमैच” की विसंगति दर्ज की गई है।

    दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़े बदलाव

    दिल्ली में SIR के बाद 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 97.53 लाख मतदाताओं के नाम दर्ज किए गए। इसके विपरीत, पुनरीक्षण से पहले दिल्ली में लगभग 1.45 करोड़ मतदाता दर्ज थे। ड्राफ्ट चरण में 47.56 लाख नामों को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत होने जैसी श्रेणियों के तहत बाहर रखा गया।

    इन आंकड़ों को लेकर दिल्ली में राजनीतिक और कानूनी बहस भी तेज हुई है। कई नागरिकों ने शिकायत की है कि उनके नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, जबकि उन्होंने SIR के दौरान आवश्यक फॉर्म जमा किए थे। कुछ मामलों में मतदाताओं को गलत तरीके से मृत या स्थानांतरित भी चिह्नित किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

    वहीं, लगभग 33.1 लाख मतदाताओं के मामले में “नो मैपिंग” अथवा “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” के आधार पर सत्यापन की जरूरत बताई गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इनमें करीब 13.79 लाख मतदाता “नो मैपिंग” श्रेणी में और लगभग 19.33 लाख “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” श्रेणी में हैं।

    अंतिम सूची नवंबर में होगी प्रकाशित

    दिल्ली में SIR की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने रिकॉर्ड और पात्रता से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, सत्यापन और मामलों के निपटारे की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक पूरी की जानी है। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित की जानी प्रस्तावित है।

    अधिकारियों ने यह भी कहा है कि प्रमुख सार्वजनिक हस्तियों और अन्य चर्चित लोगों को हर मामले में व्यक्तिगत रूप से सुनवाई केंद्र पर पहुंचने की आवश्यकता नहीं होगी। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी ऐसे मामलों की सूची तैयार कर सकते हैं और संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों को पंजीकृत पते पर भेजकर दस्तावेजों और रिकॉर्ड का सत्यापन करा सकते हैं।

    SIR के दौरान सामने आए बिबेक देबरॉय के मामले ने मतदाता सूची के डिजिटल और रिकॉर्ड-आधारित सत्यापन की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान खींचा है। हालांकि उनका नाम ड्राफ्ट सूची में दिखाई दिया, चुनाव अधिकारियों के अनुसार उनकी मृत्यु की जानकारी उपलब्ध थी और अंतिम सूची तैयार करते समय उनके रिकॉर्ड को उसी आधार पर अपडेट किया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि वर्तमान ड्राफ्ट सूची अंतिम मतदाता सूची नहीं है और इसमें दर्ज नाम तथा श्रेणियां दावे, आपत्तियों और दस्तावेजी सत्यापन के बाद बदली जा सकती हैं।

    दिल्ली में SIR की अंतिम प्रक्रिया पूरी होने तक मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी विसंगतियों, नोटिसों और दावों पर चुनाव अधिकारियों द्वारा आगे भी कार्रवाई जारी रहने की संभावना है। अंतिम सूची के प्रकाशन के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सत्यापन प्रक्रिया के बाद कितने नाम बरकरार रहते हैं, कितने रिकॉर्ड संशोधित होते हैं और किन मामलों में नाम हटाने या जोड़ने की आवश्यकता पड़ती है।

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