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    एडवोकेट चरणजीत भाटी की सूझबूझ और तत्परता से बची महिला की जान, महिला आयोग परिसर में टला बड़ा हादसा

    14 minutes ago

    एडवोकेट चरणजीत भाटी की सूझबूझ और तत्परता से बची महिला की जान, महिला आयोग परिसर में टला बड़ा हादसा

    जयपुर। राजधानी जयपुर में शुक्रवार सुबह महिला आयोग परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पारिवारिक विवाद और सुनवाई नहीं होने से परेशान एक महिला आत्महत्या करने के इरादे से भवन की छत पर चढ़ गई। इस दौरान मौके पर मौजूद एडवोकेट चरणजीत भाटी ने असाधारण सूझबूझ और तत्परता का परिचय देते हुए महिला को सुरक्षित पकड़ लिया और उसकी जान बचा ली।

    महिला के छत पर चढ़ने और कूदने की कोशिश करने से परिसर में हड़कंप मच गया। हालात की गंभीरता को समझते हुए एडवोकेट चरणजीत भाटी ने बिना समय गंवाए महिला को संभाला। इस दौरान फैमिली कोर्ट और महिला आयोग के कर्मचारियों ने भी सहयोग किया। सभी के सामूहिक प्रयासों से एक बड़ा हादसा टल गया।

    जानकारी के अनुसार, महिला सवाई माधोपुर जिले के बामनवास की निवासी है। करीब तीन साल पहले उसने कॉलेज से भागकर एक युवक से शादी की थी। शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। महिला ने पति के खिलाफ ईस्ट महिला थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला का आरोप है कि लंबे समय से पारिवारिक विवाद के चलते वह परेशान है और पुलिस कार्रवाई नहीं होने से नाराज थी।

    महिला के अनुसार, घर पहुंचने पर परिजनों ने भी उसे घर से बाहर निकाल दिया था। ऐसे में उसके सामने रहने का कोई ठिकाना नहीं बचा। इसी समस्या को लेकर वह महिला आयोग पहुंची थी, लेकिन वहां सुनवाई नहीं होने से वह मानसिक रूप से परेशान हो गई और छत पर चढ़ गई।

    संकट की घड़ी में देवदूत बने एडवोकेट चरणजीत भाटी

    घटना के दौरान एडवोकेट चरणजीत भाटी की त्वरित कार्रवाई सबसे अहम साबित हुई। उन्होंने अपनी सूझबूझ से महिला को सुरक्षित पकड़कर नीचे उतारा और एक संभावित जानलेवा हादसे को टाल दिया। उनकी तत्परता से महिला को समय रहते बचा लिया गया।

    पुलिस ने संभाली जिम्मेदारी

    घटना की सूचना मिलने पर ज्योति नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को अपने साथ थाने ले गई। बाद में उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। फैमिली कोर्ट की ओर से महिला को ज्योति नगर थाना पुलिस के सुपुर्द कर उसकी सुरक्षा और देखभाल के निर्देश दिए गए।

    ज्योति नगर थाना अधिकारी गुंजन वर्मा के अनुसार, महिला से बातचीत कर उसे समझाने का प्रयास किया जा रहा है। उसके रहने की व्यवस्था करने के साथ मामले में काउंसलिंग भी करवाई जा रही है।

    एडवोकेट चरणजीत भाटी की मानवीय संवेदनशीलता, साहस और समय पर दिखाई गई सूझबूझ ने न केवल एक महिला की जान बचाई, बल्कि यह भी साबित किया कि कानून के पेशे में मानवीय जिम्मेदारी का कितना महत्वपूर्ण स्थान है।

    नाम अंकिता मीणा एजुकेशन B.Ed निवासी बामनवास सवाई माधोपुर

    लगभग 3 साल पहले अभिषेक मीणा के साथ कॉलेज से भाग कर शादी की शादी कुछ दिन बाद आपस में झगड़ा होने लगा इसने कई दिनों से परेशान होकर उसके खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट कि लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है उसे परेशान होकर जब वह महिला अपने घर गई तो घर से भी बाहर निकाल दिया और कहने लगे तुम तो घर छोड़ कर चले जा तो लेकिन लड़की कहां जाए इसीलिए वह परेशान होकर महिला आयोग में आई तो महिला आयोग में भी सुनवाई नहीं की तो लड़की परेशान होकर छत पर चढ़ गई महिला आयोग की बिल्डिंग पर वहां से सुसाइड करने का निर्णय बनाया लेकिन उसे बचा लिया गया एडवोकेट चरणजीत भाटी उनके द्वारा बचाया गया फिर बाद में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया फैमिली कोर्ट के उन्होंने इसे ज्योति नगर थाना इंचार्ज हवाले कर दिया फिर में कार्रवाई करने का निर्देशित दिया और कहा कि लड़की का ध्यान रखें

     

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