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    नीट पेपर लीक विवाद के बाद सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी, संसद में संशोधन विधेयक पेश

    2 hours ago

     

    नीट पेपर लीक विवाद के बाद सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी, संसद में संशोधन विधेयक पेश

    युगचरण न्यूज़ | 28 जुलाई 2026

    नई दिल्ली: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक विवाद और उसके बाद देशभर में हुए छात्र आंदोलनों के बीच केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद में सार्वजनिक परीक्षाओं से संबंधित कानून में संशोधन का विधेयक पेश किया है। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है, ताकि भविष्य में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

    सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब हाल के महीनों में प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर व्यापक बहस हुई और लाखों छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग उठाई।

    सुधारों की जरूरत क्यों पड़ी?

    नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के बाद सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इसके कारण लगभग 20 लाख अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी। परीक्षा रद्द होने के बाद देश के कई हिस्सों, विशेष रूप से दिल्ली में, छात्रों और युवाओं ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने व्यापक सुधारों की प्रक्रिया शुरू की।

    संसद में क्या संशोधन प्रस्तावित किए गए?

    सरकार ने वर्ष 2024 में बनाए गए सार्वजनिक परीक्षा कानून (Public Examinations Act) में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इस कानून का उद्देश्य पहले से ही परीक्षा में गड़बड़ी, पेपर लीक और अनुचित साधनों के उपयोग पर रोक लगाना था, लेकिन अब इसे और अधिक सख्त बनाने की तैयारी की गई है।

    प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार—

    • परीक्षा में धांधली करने वालों के लिए न्यूनतम सजा तीन वर्ष से बढ़ाकर पाँच वर्ष करने का प्रस्ताव है।
    • अधिकतम आर्थिक दंड एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पाँच करोड़ रुपये तक किया जा सकता है।
    • दोषी पाए जाने वाले संस्थानों या एजेंसियों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंध की अवधि चार वर्ष से बढ़ाकर आठ वर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया है।
    • सरकार का कहना है कि इन बदलावों से परीक्षा माफिया और संगठित गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई संभव होगी।

    तेज जांच और शीघ्र सुनवाई पर जोर

    प्रस्तावित संशोधनों में केवल सजा बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि मामलों की त्वरित जांच और समयबद्ध सुनवाई पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि परीक्षा से जुड़े अपराधों के मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बजाय जल्द फैसला हो, जिससे दोषियों को शीघ्र दंड मिल सके।

    नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति

    सरकार ने परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधारों के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का भी गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ और आधार परियोजना के प्रमुख वास्तुकार रहे नंदन नीलेकणी कर रहे हैं।

    सरकार के अनुसार यह समिति आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग के माध्यम से परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के सुझाव दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम जल्द उठाए जाएंगे।

    पहले भी बनी थी विशेषज्ञ समिति

    नीट पेपर लीक की घटनाओं के बाद वर्ष 2024 में भी विशेषज्ञों की एक समिति गठित की गई थी। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में कुल 101 सिफारिशें प्रस्तुत की थीं।

    इन सिफारिशों में कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल थे, जैसे—

    • पारंपरिक पेन-पेपर परीक्षा से धीरे-धीरे कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली की ओर बढ़ना।
    • बड़े स्तर की परीक्षाओं को कई चरणों और अलग-अलग शिफ्टों में आयोजित करना।
    • डिजिटल सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाना।
    • परीक्षा केंद्रों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाना।

    हालांकि इनमें से कई सुझावों पर अभी भी चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।

    परीक्षा प्रणाली में तकनीक की बढ़ेगी भूमिका

    सरकार का मानना है कि भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल निगरानी, सुरक्षित एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्र वितरण प्रणाली और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों का अधिक उपयोग करके परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।

    विशेषज्ञों का भी कहना है कि केवल कठोर कानून पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को भी मजबूत करना आवश्यक होगा।

    छात्रों की उम्मीदें

    हाल के घटनाक्रमों के बाद देशभर के लाखों छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाओं से छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है और वर्षों की मेहनत पर असर पड़ता है।

    सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन और तकनीकी सुधारों का उद्देश्य छात्रों का भरोसा बहाल करना तथा देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और पारदर्शी बनाना है।

    आगे क्या होगा?

    संसद में पेश किए गए संशोधन विधेयक पर चर्चा और पारित होने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए प्रावधान लागू किए जा सकते हैं। इसके साथ ही उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली में अतिरिक्त प्रशासनिक और तकनीकी सुधार भी चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाने की संभावना है।

    यदि ये प्रस्तावित बदलाव प्रभावी रूप से लागू होते हैं, तो भविष्य में सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ने, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने और छात्रों का विश्वास मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

     
     
     
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