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    जर्मनी के दो राज्यों में बदले चुनावी समीकरण, बर्लिन में Die Linke आगे और मेक्लेनबर्ग में AfD शीर्ष पर; Merz ने नतीजे को बताया ‘आपदा’

    7 hours ago

    Yugcharan News / 21-09-2026

    बर्लिन: जर्मनी में रविवार को हुए दो राज्य चुनावों के शुरुआती नतीजों ने देश की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा किया है। राजधानी बर्लिन में वामपंथी पार्टी Die Linke सबसे अधिक वोट हासिल करने की स्थिति में दिखाई दी, जबकि उत्तर-पूर्वी राज्य मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरानिया में दक्षिणपंथी Alternative for Germany (AfD) सबसे आगे रही। इन परिणामों के बीच चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की सत्तारूढ़ Christian Democratic Union (CDU) को दोनों राज्यों में नुकसान उठाना पड़ा।

    मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरानिया के नतीजे विशेष रूप से CDU के लिए महत्वपूर्ण रहे। ARD के एग्जिट पोल के अनुसार, AfD को करीब 37 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान था, जबकि केंद्र-वाम Social Democratic Party (SPD) लगभग 35.5 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर थी। मर्ज की CDU को केवल 5.5 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान था। यह आंकड़ा पार्टी के लिए राज्य स्तर पर 1949 के बाद सबसे कमजोर प्रदर्शन में से एक बताया जा रहा है।

    बर्लिन में तस्वीर अलग रही। ARD के एग्जिट पोल में Die Linke को लगभग 24.5 प्रतिशत वोट के साथ सबसे आगे बताया गया, जबकि मर्ज के नेतृत्व वाली CDU करीब 20 प्रतिशत और AfD लगभग 16 प्रतिशत पर रही। हालांकि, सबसे अधिक वोट हासिल करना अपने आप में सरकार बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है और Die Linke को सत्ता के लिए सहयोगी दलों की आवश्यकता होगी।

    मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरानिया में AfD आगे

    मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरानिया में चुनाव का मुख्य मुकाबला AfD और SPD के बीच रहा। राज्य में SPD की लोकप्रिय नेता और मुख्यमंत्री मनुएला श्वेसिग के नेतृत्व वाली पार्टी लगभग 35.5 प्रतिशत वोट के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि AfD लगभग 37 प्रतिशत के साथ आगे रही।

    हालांकि, उपलब्ध शुरुआती आंकड़ों के अनुसार AfD के सबसे अधिक वोट पाने के बावजूद उसके लिए सरकार बनाना आसान नहीं होगा। जर्मनी की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने उसके साथ गठबंधन करने से इनकार करने की नीति अपनाई है। इसलिए चुनाव में सबसे अधिक वोट पाने और सरकार बनाने की क्षमता के बीच अंतर बना हुआ है।

    CDU के लिए इस राज्य का प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी राज्य विधानसभा में प्रवेश के लिए जरूरी 5 प्रतिशत की सीमा के बेहद करीब रही। शुरुआती एग्जिट पोल में CDU को 5.5 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान लगाया गया था। बाद की रिपोर्टों में भी पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर बताया गया।

    बर्लिन में Die Linke सबसे आगे

    जर्मनी की राजधानी बर्लिन में Die Linke ने सबसे अधिक वोट हासिल करने की स्थिति बनाई। ARD के एग्जिट पोल के अनुसार पार्टी को करीब 24.5 प्रतिशत वोट मिले, जबकि CDU लगभग 20 प्रतिशत और AfD करीब 16 प्रतिशत पर रही।

    Die Linke की इस बढ़त का मुख्य राजनीतिक महत्व यह है कि पार्टी को लंबे समय बाद राजधानी में मजबूत स्थिति मिली है। हालांकि, सरकार बनाने के लिए उसे अन्य दलों का समर्थन हासिल करना होगा। इसलिए एग्जिट पोल में सबसे आगे रहने के बावजूद राजधानी की अगली सरकार का स्वरूप गठबंधन वार्ताओं पर निर्भर करेगा।

    चुनाव अभियान में बर्लिन में आवास की बढ़ती लागत एक प्रमुख मुद्दा रही। Die Linke ने अपने अभियान में आवास और सामाजिक नीतियों पर जोर दिया। पार्टी की शीर्ष उम्मीदवार एलिफ एराल्प ने नतीजों के बाद अपने समर्थकों के बीच इसे पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया।

    CDU को दोनों राज्यों में झटका

    दोनों चुनावों में CDU का प्रदर्शन जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरानिया में पार्टी लगभग 5.5 प्रतिशत पर रही, जबकि बर्लिन में वह करीब 20 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रही।

    मर्ज ने मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरानिया में अपनी पार्टी के प्रदर्शन को खुद “आपदा” बताया। हालांकि, उन्होंने पद छोड़ने के संकेतों को खारिज करते हुए कहा कि वह सरकार में बने रहेंगे और अपने आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाएंगे।

    चांसलर ने अपनी सरकार के आर्थिक एजेंडे को जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है। उनके सामने अर्थव्यवस्था, कर व्यवस्था, सामाजिक कल्याण और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने की चुनौती है। राज्य चुनावों के परिणामों के बाद उनकी पार्टी के भीतर नेतृत्व और सरकार की रणनीति को लेकर चर्चा और तेज हो सकती है।

    इससे पहले भी AfD ने दर्ज की थी बड़ी बढ़त

    इन चुनावों से पहले 6 सितंबर को सैक्सोनी-अनहॉल्ट में हुए राज्य चुनाव में भी AfD ने मजबूत प्रदर्शन किया था। वहां पार्टी पूर्ण बहुमत के करीब पहुंच गई थी। इसके बाद जर्मनी की राजनीति में AfD की बढ़ती चुनावी ताकत को लेकर बहस तेज हुई।

    लगातार अलग-अलग राज्यों में AfD के मजबूत प्रदर्शन ने जर्मनी की पारंपरिक पार्टियों के सामने नई चुनौती रखी है। हालांकि, किसी राज्य में सबसे अधिक वोट प्राप्त करना और सरकार बनाना अलग-अलग राजनीतिक प्रक्रियाएं हैं। मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरानिया में भी अन्य प्रमुख दलों की AfD के साथ गठबंधन न करने की स्थिति के कारण सरकार गठन का सवाल अलग रूप ले सकता है।

    मर्ज के सामने आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने की चुनौती

    मर्ज सरकार ने सत्ता संभालने के बाद आर्थिक सुधारों को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है। लेकिन राज्य चुनावों के परिणाम ऐसे समय आए हैं जब सरकार को आर्थिक दबाव, ऊर्जा कीमतों और सामाजिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक समर्थन जुटाने की चुनौती है।

    मर्ज ने स्पष्ट किया है कि वह सुधारों की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकार को दृढ़ता और धैर्य के साथ काम करना होगा। उनके अनुसार, देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रस्तावित सुधारों को लागू करना आवश्यक है।

    मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरानिया में ईंधन और ऊर्जा कीमतें भी चुनावी चर्चा का हिस्सा रही थीं। सरकार ने चुनाव से पहले गैस और डीजल पर करों में राहत से जुड़ा पैकेज पेश किया था। इसके बावजूद CDU को राज्य में अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका।

    जर्मन राजनीति में बढ़ता ध्रुवीकरण

    दोनों राज्यों के परिणाम जर्मनी के राजनीतिक परिदृश्य में अलग-अलग दिशाओं की पार्टियों के मजबूत होने को भी दर्शाते हैं। बर्लिन में Die Linke सबसे अधिक वोट के साथ आगे रही, जबकि मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरानिया में AfD शीर्ष पर रही। दूसरी ओर, मर्ज की CDU को दोनों राज्यों में अपने प्रदर्शन को लेकर चुनौती का सामना करना पड़ा है।

    इन परिणामों को राष्ट्रीय राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है, लेकिन राज्य चुनाव सीधे तौर पर संघीय सरकार का गठन नहीं करते। इसलिए इनका तत्काल प्रभाव मुख्य रूप से संबंधित राज्यों की सरकारों और गठबंधन समीकरणों पर पड़ेगा। हालांकि, लगातार कमजोर राज्य स्तरीय प्रदर्शन किसी राष्ट्रीय पार्टी की राजनीतिक रणनीति और आंतरिक चर्चा को प्रभावित कर सकता है।

     

    फिलहाल मर्ज ने अपने पद पर बने रहने और सुधार एजेंडे को जारी रखने की बात कही है। दूसरी ओर, AfD के लगातार मजबूत राज्य चुनाव परिणाम और बर्लिन में Die Linke की बढ़त ने जर्मनी की राजनीति में बदलते मतदाता रुझानों को सामने रखा है। अंतिम आधिकारिक परिणामों और गठबंधन वार्ताओं के बाद ही दोनों राज्यों की सरकारों की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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