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    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर में संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के तृतीय दिवस पर पाठ्यक्रम परिणाम निर्धारण एवं शोध पत्र लेखन पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

        जयपुर। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वाटिका, जयपुर में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में मूलभूत एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान विद्यापीठ के सहयोग से आयोजित पाँच दिवसीय संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम (FDP) के तृतीय दिवस पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के अंतर्गत पाठ्यक्रम परिणाम निर्धारण तथा शोध पत्र लेखन विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। कार्यक्रम का आयोजन 28 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालय के ब्लॉक ए स्थित सेमिनार हॉल-1 में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को पाठ्यक्रम परिणाम एवं कार्यक्रम परिणाम के निर्धारण, उनके पारस्परिक संबंध तथा गुणवत्तापूर्ण शोध पत्र तैयार करने की प्रक्रिया से परिचित कराना था। कार्यक्रम का शुभारंभ आइक्यूएसी समन्वयक एवं संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम की संयोजक डॉ. रजनी माथुर द्वारा स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ। उन्होंने विशेषज्ञ वक्ताओं एवं उपस्थित संकाय सदस्यों का स्वागत करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में परिणाम-आधारित शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण तथा शोध की महत्ता पर प्रकाश डाला। प्रथम सत्र में डॉ. एस.वी.एच. नागेंद्र ने “पाठ्यक्रम परिणाम (COs) एवं कार्यक्रम परिणाम (POs) का निर्धारण एवं मानचित्रण” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने पाठ्यक्रम परिणाम और कार्यक्रम परिणाम की अवधारणा, उनके निर्धारण की प्रक्रिया तथा दोनों के बीच संबंध स्थापित करने की विधियों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि परिणाम-आधारित शिक्षा के माध्यम से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, उद्देश्यपरक एवं गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सकता है। द्वितीय सत्र में डॉ. कुलदीप शर्मा ने शोध पत्र लेखन विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने शोध पत्र तैयार करने की विभिन्न प्रक्रियाओं, उपयुक्त शोध विषय के चयन, साहित्य समीक्षा, शोध समस्या के निर्धारण, शोध पद्धति, आँकड़ों के विश्लेषण तथा निष्कर्षों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शोध पत्र की संरचना, अकादमिक लेखन में मौलिकता, संदर्भों के उचित उल्लेख तथा शोध नैतिकता के पालन के महत्त्व को भी रेखांकित किया। इस सत्र का उद्देश्य संकाय सदस्यों को गुणवत्तापूर्ण शोध पत्र तैयार करने एवं शोध प्रकाशन की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने में सहायता प्रदान करना था। कार्यक्रम के दौरान मनीषा यादव ने प्रतिभागियों के साथ संवाद स्थापित करते हुए प्रतिक्रिया एवं विचार-विमर्श सत्र का संचालन किया। इस दौरान प्रतिभागियों ने विषयों से संबंधित प्रश्न पूछे तथा विशेषज्ञों के साथ अपने विचार साझा किए। संवादात्मक सत्र ने शिक्षकों को अपने शैक्षणिक एवं शोध संबंधी अनुभवों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया। विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट प्रोफ़ेसर (डॉ.) रश्मि जैन ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि परिणाम-आधारित शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण शोध एवं अकादमिक लेखन उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संकाय विकास कार्यक्रम शिक्षकों को नवीन शैक्षणिक पद्धतियों, शोध कौशल तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करने के लिए सक्षम बनाते हैं। कार्यक्रम का मंच संचालन खुशबू चौधरी ने प्रभावी ढंग से किया। अंत में डॉ. जितेंद्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विशेषज्ञ वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रशासन, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का तृतीय दिवस शिक्षकों के शैक्षणिक कौशल, परिणाम-आधारित शिक्षण तथा शोध लेखन क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में उपयोगी रहा। इस प्रकार का संकाय विकास कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों की प्राप्ति तथा उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण पहल है।  

    दीपशिखा कॉलेज में सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत प्रश्नोत्तरी एवं स्लोगन प्रतियोगिता आयोजित

    जयपुर। दीपशिखा कॉलेज ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, मानसरोवर, जयपुर में केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission) के तत्वावधान में 26 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक आयोजित सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम “सत्यनिष्ठा से समृद्धि” रही। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए सतर्कता, भ्रष्टाचार विरोधी उपायों, ईमानदारी, पारदर्शिता एवं नैतिक मूल्यों पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी तथा स्लोगन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रोजेक्ट निदेशक सत्यनारायण जोशी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक संगठन का दायित्व है कि वह भ्रष्टाचार उन्मूलन में अग्रणी भूमिका निभाए तथा अपने कार्यों के प्रत्येक क्षेत्र में ईमानदारी एवं पारदर्शिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखे। जनरल मैनेजर श्री लोकेश स्वामी ने विद्यार्थियों को ईमानदारी एवं सत्यनिष्ठा की संस्कृति को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को “न रिश्वत लेंगे, न रिश्वत देंगे” की शपथ भी दिलवाई। महाविद्यालय के चेयरमैन डॉ. प्रेम सुराणा ने विद्यार्थियों को कानून, नियमों एवं अनुपालन तंत्र का पालन करने के लिए प्रेरित किया। वहीं, वाइस चेयरमैन डॉ. अंशु सुराणा ने कहा कि भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए सरकार, नागरिकों एवं निजी क्षेत्र सहित सभी हितधारकों को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। प्रतियोगिताओं के विजेता सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता प्रथम स्थान: अजय चौधरी, बी.ए. द्वितीय वर्ष। द्वितीय स्थान: भावना जैन, बी.एससी.-बी.एड. चतुर्थ वर्ष। तृतीय स्थान: अरविंद शर्मा, बी.एससी.-बी.एड. तृतीय वर्ष। स्लोगन प्रतियोगिता प्रथम स्थान: अक्षत दाधीच, बी.एससी.-बी.एड. तृतीय वर्ष। द्वितीय स्थान: आर्यन, बी.एससी.-बी.एड. द्वितीय वर्ष। तृतीय स्थान: जयमाला कोली, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी विजेताओं को ट्रॉफी एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में भ्रष्टाचार के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उनके जीवन में ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अनिला शर्मा ने सभी अतिथियों, आयोजकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों को भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय योगदान देने तथा अपने व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में सत्यनिष्ठा अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस प्रकार कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को ईमानदारी, जवाबदेही एवं नैतिक आचरण के महत्व के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  

    मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

    जयपुर। प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास विज्ञान विभाग द्वारा मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक तनाव, चिंता एवं अवसाद जैसी समस्याओं को समझने के लिए प्रेरित करना तथा आत्महत्या की रोकथाम के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित भाषण एवं कविताओं की प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, भावनात्मक चुनौतियों तथा कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे का सहयोग करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं आत्महत्या की रोकथाम से संबंधित एक फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसने विद्यार्थियों को मानसिक समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहने और समय पर उचित सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। फिल्म प्रदर्शन के पश्चात सभी उपस्थित सदस्यों को मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता से संबंधित शपथ दिलवाई गई, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने, मानसिक समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील एवं सहयोगात्मक व्यवहार अपनाने तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता लेने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का सफल आयोजन समन्वयक सीमा चौधरी एवं सह-समन्वयक श्री धीरज कुमार नागर किया द्वारा गया। मंच संचालन कृषि विभाग की छात्रा तनिषा मीणा द्वारा अत्यंत प्रभावशाली एवं सुव्यवस्थित ढंग से किया गया। इस अवसर विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने अपने संबोधन में मानसिक स्वास्थ्य को वर्तमान समय की एक अत्यंत महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य का प्रभाव व्यक्ति के विचारों, व्यवहार, निर्णय लेने की क्षमता तथा दैनिक जीवन पर पड़ता है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज करना या उन्हें छिपाना उचित नहीं है। मानसिक तनाव और भावनात्मक कठिनाइयों के समय उचित सहयोग एवं मार्गदर्शन न मिलने से परिस्थितियाँ गंभीर हो सकती हैं। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आत्महत्या की रोकथाम के लिए समय रहते उचित सहायता उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने तथा जरूरतमंद व्यक्तियों के प्रति सहानुभूति एवं सहयोग का भाव रखने का आह्वान किया। विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े ऐसे कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को उचित मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास विज्ञान विभाग के सहायक अध्यापक श्री हसन दीन खान द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम में विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास विज्ञान विभाग की गीता रानी एवं मनीष कुमार मीणा सहित विभाग के सभी शिक्षकों की सहभागिता सराहनीय रही। सभी के सहयोग एवं सक्रिय सहभागिता से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।  

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के द्वितीय दिवस पर शोध, नवाचार एवं परीक्षा सुधारों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

    जयपुर. यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वाटिका, जयपुर में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में मूलभूत एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान विद्यापीठ के सहयोग से आयोजित पाँच दिवसीय संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम (FDP) के द्वितीय दिवस पर शोध एवं नवाचार, बौद्धिक संपदा अधिकार तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत परीक्षा एवं मूल्यांकन सुधारों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। कार्यक्रम का आयोजन ब्लॉक-ए स्थित सेमिनार हॉल-1 में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. जितेंद्र कुमार गोयल के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए संकाय विकास कार्यक्रम की प्रासंगिकता तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। प्रथम सत्र में विश्वविद्यालय के अनुसंधान अधिष्ठाता डॉ. रोहित सारस्वत ने “उच्च शिक्षा में बौद्धिक संपदा अधिकारों की संस्कृति का संवर्धन : शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता विकसित करने, अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा नवीन विचारों एवं आविष्कारों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने शिक्षकों को शोधपरक दृष्टिकोण अपनाने और नवाचार आधारित शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के लिए प्रेरित किया। द्वितीय सत्र में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. कमल किशोर जांगिड़ ने “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत परीक्षा एवं मूल्यांकन सुधार : चुनौतियाँ एवं सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में सुधार, मूल्यांकन की पारदर्शिता, विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण व्यवस्था तथा प्रभावी मूल्यांकन पद्धतियों की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, निष्पक्ष एवं परिणामोन्मुख बनाने पर बल दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना एवं प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधनों में संकाय विकास कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास, अनुसंधान एवं नवाचार की संस्कृति को सुदृढ़ करने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में ऐसे कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने शिक्षकों से नवीन शैक्षणिक पद्धतियों को अपनाने तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए प्रयासरत रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम की संयोजक एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की समन्वयक डॉ. रजनी माथुर ने कहा कि इस पाँच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन तथा परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली में नवीन सुधारों के प्रति जागरूक एवं सक्षम बनाना है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों की शैक्षणिक दक्षता बढ़ाने, अनुसंधान संस्कृति को सुदृढ़ करने तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन, विशेषज्ञ वक्ताओं, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रतिभागियों के साथ विचार-विमर्श किया गया तथा उनसे कार्यक्रम संबंधी प्रतिक्रियाएँ प्राप्त की गईं। मनीषा यादव ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए दोनों विशेषज्ञ वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रबंधन, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। संकाय विकास कार्यक्रम का द्वितीय दिवस शोध, नवाचार, बौद्धिक संपदा संरक्षण तथा परीक्षा एवं मूल्यांकन सुधारों के प्रति शिक्षकों की समझ विकसित करने और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।  

    खेल प्रतियोगिताओं में कानोड़िया कॉलेज की छात्राओं का शानदार प्रदर्शन

    कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर की छात्राओं ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर महाविद्यालय का गौरव बढ़ाया। दिनांक 26 एवं 27 अक्टूबर 2026 को आयोजित अंतरमहाविद्यालय प्रतियोगिताओं किक्रेट एवं जूडो में छात्राओं ने अपनी खेल प्रतिभा, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिचय दिया। किक्रेट प्रतियोगिता में पाँच टीमों ने भाग लिया। कानोड़िया कॉलेज की टीम ने सेमीफाइनल मुकाबले में महारानी कॉलेज को 37 रनों से पराजित कर फाइनल में प्रवेश किया। कृतिका तंवर को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। फाइनल मुकाबले में टीम ने सुबोध कॉलेज के विरुद्ध खेलते हुए उपविजेता स्थान प्राप्त किया, जिसमें अंजली शर्मा 39 रन व कृतिका तंवर 30 रन की नाबाद पारी का विशेष योगदान रहा। इसी क्रम में जूडो प्रतियोगिता में भी कानोड़ि़या कॉलेज की छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन किया। महाविद्यालय की टीम ने एक स्वर्ण, दो रजत एवं दो कांस्य पदक सहित कुल पाँच पदक अर्जित कर चौंपियनशिप अपने नाम की। इस उल्लेखनीय सफलता पर महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल एवं शारीरिक शिक्षा निदेशक विजय हरीश ने सभी खिलाड़ियों का अभिनंदन किया तथा उनकी उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने छात्राओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें भविष्य में भी इसी प्रकार खेल भावना, समर्पण और परिश्रम के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। दोनों प्रतियोगिताओं में छात्राओं की उपलब्धियाँ महाविद्यालय में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने तथा छात्राओं के सर्वांगीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

    केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में भारतीय विधिशास्त्र विद्याधाखा विद्यार्थियों का दीक्षारम्भ कार्यक्रम आयोजित

    जयपुर। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी एवं परिसर निदेशक प्रो. लोकमान्य मिश्र के संरक्षण में भारतीय विधिशास्त्र विद्याशाखा में प्रथम सत्रार्ध के विद्यार्थियों के लिए दो दिवसीय दीक्षारम्भ कार्यक्रम का समापन समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम के समापन सत्र का शुभारंभ सरस्वती पूजन एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। तत्पश्चात् विद्यार्थियों द्वारा मंगलाचरण तथा सामूहिक राष्ट्रगीत एवं कुलगीत प्रस्तुत किए गए। भारतीय विधिशास्त्र विद्याशाखा की विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्णा शर्मा ने माल्यार्पण, विषय-उपस्थापन एवं स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। द्वितीय दिवस के प्रथम ऑनलाइन सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के कैंपस लॉ सेंटर की सहायक आचार्य डॉ. अनुमेहा मिश्रा ने विधिशास्त्र, विधि एवं नैतिकता के पारस्परिक संबंध तथा विधि के क्षेत्र में धर्मशास्त्र और संस्कृत की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। द्वितीय ऑनलाइन सत्र में प्रो. आर.जी. मुरलीकृष्ण, कुलसचिव, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली ने धर्मशास्त्र का समकालीन कानूनों, विशेषतः किशोर न्याय अधिनियम, 2015 एवं मोटर वाहन अधिनियम, के साथ तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर परिसर के सह-निदेशक(प्रशासनिक) प्रो. शीशराम ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के विधिक सिद्धांतों को आधुनिक न्याय व्यवस्था के संदर्भ में समझने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के समापन सत्र के मुख्य अतिथि के सेवानिवृत्त राजस्थान उच्च न्यायिक सेवा अधिकारी गणेशराम चौधरी ने विद्यार्थियों को अधिवक्ता एवं न्यायिक सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ने हेतु प्रेरित किया। समापन सत्र की अध्यक्षता परिसर के सह-निदेशक शैक्षणिक विष्णुकांत पाण्डेय ने की और अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुरेंद्र कुमार जाखड़ ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन मैत्रावरुण चोटिया ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में डॉ. बीरेन्द्र सिंह, कल्पना चौधरी , डॉ. अंजली गौतम, डॉ. अभय कुमार, रोहित राज, डॉ. अंकित दाधीच सहित विधि विभाग के प्राध्यापकगण एवं सभी छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।  

    राजकीय महाविद्यालय जयपुर बना उपविजेता

    26 अक्टूबर से राजकीय महाविद्यालय जयपुर द्वारा आयोजित राजस्थान विश्वविद्यालय की अंतर महाविद्यालय जूडो (महिला व पुरुष ) प्रतियोगिता छात्र वर्ग में राजस्थान महाविद्यालय जयपुर ने विजेता व राजकीय महाविद्यालय जयपुर ने उपविजेता का खिताब जीता। छात्र वर्ग में कनोडिया महाविद्यालय ने विजेता व परिष्कार महाविद्यालय ने उपविजेता का खिताब जीता। राजकीय महाविद्यालय जयपुर के छात्रा नमन जारडा, लक्ष्मी नारायण, नरेश सैनी ने रजत पदक जीता। प्रियांशु खंडेलवाल व अमन गर्ग ने कांस्य पदक जीता। छात्रा निशा कुमारी, नेहा गुर्जर, निकिता चौधरी व टीना ने कांस्य पदक जीता। महाविद्यालय की इस उपलब्धि पर प्राचार्य प्रो. रविकांत शर्मा ने सभी खिलाड़ियों व महाविद्यालय परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं दी तथा सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को मेडल पहनाकर व पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

    नीरजा मोदी स्कूल में 'दिव्यता से नियति तक' थीम पर वार्षिकोत्सव का भव्य आयोजन

    722 मेधावी विद्यार्थी हुए सम्मानित; पौराणिक आख्यानों, क्लासिकल ट्रिब्यूट और वेस्टर्न म्यूजिकल डांस की शानदार प्रस्तुति जयपुर, नीरजा मोदी स्कूल के परिसर में माध्यमिक कक्षाओं (Middle Classes) का वार्षिक समारोह अत्यंत हर्षोल्लास, भव्यता एवं उत्साह के साथ संपन्न हुआ। 'दिव्यता से नियति तक' की अनूठी विषय-वस्तु (Theme) पर आधारित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में पौराणिक कथाओं, शास्त्रीय संगीत, मनमोहक नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों का एक अभूतपूर्व एवं अनुपम संगम देखने को मिला। पुरस्कार वितरण से हुआ समारोह का आगाज कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिष्ठित वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ। इसमें शैक्षणिक उत्कृष्टता, खेल-कूद, नेतृत्व क्षमता एवं सह-शैक्षणिक (Co-curricular) गतिविधियों में वर्ष भर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले लगभग 722 मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कार एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। गणेश वंदना एवं त्रिदेवी मंचन: सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत भावपूर्ण 'गणेश वंदना' से हुई। इसके पश्चात त्रिदेवी (ज्ञान, शक्ति और समृद्धि) का भव्य मंचन किया गया, जिसने दर्शकों को समृद्धि, शक्ति एवं विवेक का दिव्य संदेश दिया। महाभारत के नायक: रंगमंच पर महाभारत के महान पात्रों—एकलव्य, अभिमन्यु और अर्जुन—के प्रेरणादायक जीवन प्रसंगों का सजीव अभिनय किया गया। यह प्रस्तुति साहस, अद्वितीय समर्पण और दृढ़ संकल्प की भावना से ओत-प्रोत थी। 'हेयरस्प्रे' एवं 'द ग्रेटेस्ट शोमैन' की शानदार धूम: ब्रॉडवे शैली के 'हेयरस्प्रे' (Hairspray) खंड में विद्यार्थियों ने गुड मॉर्निंग, नाइसेस्ट किड्स इन टाउन, वेल्मा एंड इंट्रो, रन एंड टेल और दैट यू कांट स्टॉप द बीट जैसे ऊर्जावान गीतों पर थिरकते हुए दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। वहीं 'द ग्रेटेस्ट शोमैन' (The Greatest Showman) के अंतर्गत प्रस्तुत मिलियन ड्रीम्स, दिस इज मी और द ग्रेटेस्ट शो के माध्यम से बच्चों ने अपनी मौलिकता, विशिष्टता और निडरता से जीवन जीने का सुंदर संदेश प्रसारित किया। भव्य फिनाले के साथ समापन समारोह के अंतिम चरण में प्रस्तुत किया गया 'ग्रैंड फिनाले' विद्यार्थियों की असीम ऊर्जा, रचनात्मकता और कलात्मक प्रतिभा का अद्भुत संगम रहा। मानवीय मूल्यों और टीम भावना से सराबोर इस वार्षिकोत्सव ने उपस्थित अभिभावकों एवं अतिथियों के मन-मस्तिष्क पर अविस्मरणीय और मधुर यादों की गहरी छाप छोड़ी।  

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने निदेशालय आईसीडीएस की योजनाओं की समीक्षा की

    ईसीसीई में नवाचारों की सराहना, कुपोषण में कमी एवं आंगनबाड़ी केंद्रों पर गुणवत्तापूर्ण सेवाओं में संवर्धन के निर्देश मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में शासन सचिवालय में महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में विभाग की शासन सचिव पूनम एवं निदेशक, समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) वासुदेव मालावत, वित्तीय सलाहकार मनोज शांडिल्य सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।   मुख्य सचिव ने विभाग द्वारा शाला पूर्व देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) में किए जा रहे नवाचारों की सराहना की और उन्हें निरंतर जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर एनईपी आधारित आधारशिला पाठ्यक्रम को और अधिक प्रभावी करने के निर्देश दिए।   उल्लेखनीय है कि आधारशिला के माध्यम से खेल, गतिविधियों एवं अन्वेषण आधारित शिक्षण पद्धति से बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।   मुख्य सचिव द्वारा सराहे गए प्रमुख नवाचार एवं सकारात्मक उपलब्धियां:   1. 98.5% आंगनबाड़ी केंद्रों का विद्यालयों से सह-स्थापन: प्रदेश में 98.5% आंगनबाड़ी केंद्रों (61,483 केंद्रों) को विद्यालयों के साथ सह-स्थित एवं मैप किया जा चुका है, जिससे बच्चों का प्राथमिक विद्यालय में सहज प्रवेश सुनिश्चित हो रहा है।   2. 1,000 चैंपियन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का क्षमता वर्धन: विभाग द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वाली 1,000 उच्च प्रदर्शन करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का चयन चैंपियन के रूप में किया गया है। इसके लिए 90 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। ये चैंपियन अपने ग्राम पंचायत की 3-4 आंगनबाड़ियों को मेंटर करेंगी।   3. प्रवेशोत्सव से 2.47 लाख बच्चों का नामांकन प्रोत्साहन: प्रवेशोत्सव के तहत 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 2.47 लाख से अधिक बच्चों ने निकटवर्ती विद्यालयों का भ्रमण किया, जिससे नामांकन को बढ़ावा मिला है। साथ ही अभिभावक बैठकों के माध्यम से अभिभावकों की सहभागिता बढ़ाई जा रही है।   4. पोषण ट्रैकर से सघन निगरानी:पोषण ट्रैकर के माध्यम से महिलाओं एवं बच्चों की पोषण स्थिति की नियमित एवं वास्तविक निगरानी की जा रही है।   मुख्य सचिव के महत्वपूर्ण निर्देश:   मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि - • बाल स्वास्थ्य एवं पोषण के निर्धारित मानकों पर अपेक्षाकृत पीछे रहने वाले जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाए। • योजनाओं की वास्तविक स्थिति के आकलन के लिए नियमित क्षेत्रीय भ्रमण एवं औचक निरीक्षण किया जाए। • आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बेहतर कार्य के लिए आवश्यक दक्षता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। • प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर विद्युत, पेयजल एवं शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।   उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा एवं बेहतर पोषण सेवाओं के माध्यम से बच्चों के स्वस्थ एवं सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया जाए।  

    एमजीडी स्कूल में 13वीं नन्हीं छाँव राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता आयोजित, जयपुर की हीर भाटिया बनीं विजेता

    महारानी गायत्री देवी (एमजीडी) गर्ल्स स्कूल में 13वीं 'नन्हीं छाँव राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता 2026' का आयोजन किया गया। देश के विभिन्न प्रतिष्ठित स्कूलों से आए 18 प्रतिभागियों ने 'नन्ही सोच, बड़े विचार' थीम पर अपने विचार रखे। प्रतियोगिता में एमजीडी स्कूल की हीर भाटिया ने पहला स्थान हासिल कर 30,000 रुपये का नकद पुरस्कार और स्कूल के लिए रोटेटिंग ट्रॉफी जीती। वहीं, द सिंधिया स्कूल (ग्वालियर) के लक्ष्य तुलस्यान 20,000 रुपये के नकद पुरस्कार के साथ उपविजेता रहे। सभी प्रतिभागियों को स्मार्टवॉच देकर सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात लेखक व पूर्व राजनयिक पवन के. वर्मा और नन्हीं छाँव फाउंडेशन के चेयरमैन हरपाल सिंह रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। स्कूल की डायरेक्टर श्रीमती अर्चना एस. मनकोटिया ने स्वागत भाषण में विद्यार्थियों में सामाजिक जागरूकता और अभिव्यक्ति के विकास पर बल दिया। उल्लेखनीय है कि नन्हीं छाँव फाउंडेशन बालिकाओं के सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और आपसी सद्भाव जैसे गंभीर विषयों पर युवा पीढ़ी को अपने विचार साझा करने के लिए निरंतर मंच प्रदान करता रहा है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 'सोशल मीडिया: एक प्रभावशाली ताकत' विषय पर ग्रुप डिस्कशन शामिल रहा, जिसका संचालन हरपाल सिंह ने किया। छात्राओं ने महिषासुर मर्दिनी नृत्य नाटिका की शानदार प्रस्तुति दी। मुख्य अतिथि पवन के. वर्मा ने छात्रों को ज्ञान के प्रति जिज्ञासु बनने और आत्मविश्वास से अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की सदस्य निर्मला दुर्लभ, कुँवर अजय सिंह, राजकुँवरानी अंबिका सिंह जी, निर्णायक राजीव दुबे, प्रो. प्रजापति त्रिवेदी, प्राचार्या श्रीमती प्रमेंद्र खंगारोत और प्रशासनिक अधिकारी कर्नल एस. एस. सांगवान मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन हेड गर्ल अपूर्वा रावत के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।  

    जयपुर स्थापना के 300 वर्ष पूर्ण होने के उत्सव रूप में ध्रुवपद विमर्श एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन 'ध्रुवपद धरोहर ' 29 अक्टूबर को

    जयपुर स्थापना के 300 वर्ष पूर्ण होने के उत्सव रूप में ध्रुवपद विमर्श एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन 'ध्रुवपद धरोहर ' 29 अक्टूबर को - जयपुर की स्थापना कच्छवाहा वंश के महाराजा सवाई जयसिंह जी द्वितीय द्वारा 18 नवम्बर 1725 में हुआ था इसके 300 वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं,जिसके हर्ष के पूर्व उत्सव के श्री गणेश के रूप में हम जयपु -र निवासी ध्रुवपद -कलाकार "जयपुर घराना विमर्श " एवं नई पीढ़ी को जयपुर घराने के समृद्ध इतिहास और उसकी ध्रुवपद -परम्परा से जोड़ने हेतु एक प्रशिक्षण - कार्यशाला का आयोजन इन्टरनेशनल धुवपद धाम ट्रस्ट, जयपुर द्वारा राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज़, जयपुर एवं कला - संस्कृति विभाग, राजस्थान सरकार के सहयोग से अजमेरी गेट स्थित भैरोसिंह शेखावत भवन, राज. चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज़,जयपुर में दिनांक 29 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे 5 बजे तक आयोजित होने जा रहा है। राजस्थान की धुवपद -परम्परा के प्रबल - प्रतिनिधि एवं प्रमुख प्रचारक रहे पद्मश्री पं लक्ष्मण भट्ट तैलंग की शिष्या राजस्थान की प्रथम ध्रुवपद - गायिका प्रोफेसर डॉ मधु भट्ट तैलंग राजस्थान के जयपुर घराने की ध्रुवपद - शैली को बताते हुए उसका प्रशिक्षण भी युवा विद्यार्थियों को प्रदान करेंगी, इसमें विद्यार्थियों का पंजीकरण पूर्णतः निःशुल्क होगा । 

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    चंडीगढ़ के विद्यार्थियों ने राजस्थान विश्वविद्यालय के सीडीपीई का किया शैक्षणिक भ्रमण

    राजस्थान विश्वविद्यालय के भौतिकी शिक्षा विकास केंद्र (सीडीपीई) में जी. जी. डी. एस. डी. महाविद्यालय, चंडीगढ़ के विद्यार्थियों ने 27 अक्टूबर को शैक्षणिक भ्रमण किया। इस अवसर पर राजस्थान विश्वविद्यालय के एम.एससी. भौतिकी के छात्र भी सम्मिलित रहे। इस दौरान विद्यार्थियों को भौतिकी के विभिन्न प्रयोगों एवं उपकरणों की कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई।   ​कार्यक्रम के दौरान प्रो. वाई. के. विजय ने विद्यार्थियों को भौतिकी विषय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हुए इसके व्यावहारिक उपयोगों पर प्रकाश डाला। उनके व्याख्यान से विद्यार्थियों को भौतिकी की अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला।   ​सीडीपीई की निदेशक सरिता कुमारी के मार्गदर्शन में केंद्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने सीडीपीई द्वारा विकसित विभिन्न भौतिकी उपकरणों के बारे में जानकारी प्राप्त की। इनमें लीनियर एयर ट्रैक, मैग्नेटिक बैलेंस, बार्टन पेंडुलम तथा कंपाउंड पेंडुलम प्रमुख रहे। विद्यार्थियों को इन उपकरणों की कार्यप्रणाली एवं प्रयोगों में उनकी उपयोगिता से अवगत कराया गया।   ​इस शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ भौतिकी के प्रायोगिक पक्ष से परिचित कराना था। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए बेहद ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी साबित हुआ।