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    अग्निवीरों के लिए बड़ी खुशखबरी: केंद्र सरकार ने बढ़ाई सेवा अवधि, अब चार साल के बजाय छह साल तक मिलेगा सेवा का मौका

    10 hours ago

     

    Yugcharan News / 04-11-2026

    नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना में भर्ती होने वाले अग्निवीरों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। बुधवार, 4 नवंबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अग्निवीरों की सेवा अवधि में दो साल की बढ़ोतरी को मंजूरी दी। इस फैसले के बाद चार साल की निर्धारित सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को अतिरिक्त दो साल तक सेवा जारी रखने का विकल्प मिलेगा। इसके साथ ही उन्हें आगे चलकर नियमित सशस्त्र बलों में शामिल होने का अवसर भी दिया जाएगा। हालांकि, नियमित सेना में भर्ती उनकी इच्छा और निर्धारित वस्तुनिष्ठ चयन प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

    चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार के इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के अग्निवीर जल्द ही अपनी चार साल की सेवा अवधि पूरी करने वाले हैं। पिछले चार वर्षों के दौरान उनके प्रदर्शन का लगातार मूल्यांकन किया गया है और इस संबंध में सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। इसी मूल्यांकन के आधार पर सरकार ने अग्निवीरों के लिए सेवा और नियमित सैन्य बलों में शामिल होने के रास्ते को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव किया है।

    अब चार साल के बाद दो साल अतिरिक्त सेवा का विकल्प

    अग्निपथ योजना के मौजूदा प्रावधानों के तहत कुल भर्ती किए गए अग्निवीरों में से 25 प्रतिशत को प्रदर्शन और मेरिट के आधार पर नियमित सशस्त्र बलों में शामिल किया जाना था। वहीं, शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को चार साल की सेवा पूरी होने के बाद सैन्य बलों से बाहर होकर नागरिक जीवन में लौटना था।

    अब सरकार के नए फैसले के तहत इन 75 प्रतिशत अग्निवीरों को अतिरिक्त दो साल तक सेवा जारी रखने का विकल्प दिया जाएगा। इस तरह उनकी कुल सेवा अवधि चार साल से बढ़कर छह साल तक हो सकती है।

    सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने कहा कि पहले प्रावधान के अनुसार 75 प्रतिशत अग्निवीरों को चार साल बाद अनुशासित और प्रेरित युवाओं के रूप में समाज में वापस लौटना था। लेकिन संशोधित व्यवस्था के तहत अब उन्हें दो साल की अतिरिक्त सेवा का अवसर दिया जाएगा।

    उन्होंने बताया कि अतिरिक्त दो साल की अवधि पूरी होने के बाद इच्छुक अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में शामिल होने का विकल्प मिलेगा। इसके लिए एक निर्धारित और वस्तुनिष्ठ चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यानी अतिरिक्त सेवा अवधि पूरी करने मात्र से नियमित सेना में स्थायी नियुक्ति सुनिश्चित नहीं होगी।

    पहले बैच के अग्निवीरों के लिए महत्वपूर्ण फैसला

    सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है जब अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए पहले बैच के अग्निवीर अपनी चार साल की सेवा अवधि पूरी करने के करीब हैं।

    अग्निपथ योजना की शुरुआत 14 जून 2022 को की गई थी। इसके तहत सेना, नौसेना और वायुसेना में युवाओं की भर्ती अग्निवीर के रूप में की जाती है। योजना में भर्ती होने वाले युवाओं को निर्धारित सेवा नियमों के तहत चार साल तक सशस्त्र बलों में सेवा करने का अवसर दिया गया था।

    योजना लागू करते समय सरकार ने कहा था कि अग्निवीरों के प्रदर्शन का लगातार मूल्यांकन किया जाएगा और समय-समय पर योजना की समीक्षा भी होगी। अब पहले बैच के सेवा कार्यकाल के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव किया है।

    सीडीएस के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में अग्निवीरों के प्रदर्शन को लेकर मिले फीडबैक के आधार पर यह फैसला लिया गया है। उन्होंने इसे भारतीय रक्षा बलों और अग्निवीरों के लिए महत्वपूर्ण दिन बताया।

    नियमित सेना में शामिल होने के लिए चयन प्रक्रिया जरूरी

    सरकार के नए फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अतिरिक्त दो साल की सेवा के बाद अग्निवीरों को नियमित सशस्त्र बलों में शामिल होने का अवसर मिलेगा। हालांकि, यह प्रक्रिया पूरी तरह उनकी इच्छा और निर्धारित चयन मानदंडों पर आधारित होगी।

    इसका अर्थ है कि सभी अग्निवीरों को स्वतः नियमित सैन्य सेवा में शामिल नहीं किया जाएगा। उन्हें निर्धारित पात्रता, प्रदर्शन और चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा।

    पहले से लागू व्यवस्था में 25 प्रतिशत अग्निवीरों को चार साल की सेवा के बाद नियमित कैडर में शामिल करने का प्रावधान था। नए फैसले के तहत शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को भी अतिरिक्त दो साल सेवा देने के बाद नियमित बलों में शामिल होने का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा।

    हालांकि, सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी में अतिरिक्त सेवा के दौरान चयन की विस्तृत प्रक्रिया, आवेदन की समयसीमा और अन्य प्रशासनिक शर्तों का पूरा विवरण स्पष्ट नहीं किया गया है।

    अग्निपथ योजना को लेकर पहले उठते रहे हैं सवाल

    अग्निपथ योजना की शुरुआत के बाद से ही इसकी चार साल की सेवा अवधि को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस होती रही है। आलोचकों का प्रमुख सवाल यह रहा है कि चार साल की सेवा पूरी करने के बाद बाहर होने वाले युवाओं के भविष्य और रोजगार की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित होगी।

    योजना के तहत केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सैन्य सेवा में शामिल करने का प्रावधान होने के कारण शेष 75 प्रतिशत युवाओं को चार साल बाद सेना से बाहर होना पड़ता था। इस व्यवस्था को लेकर कई युवाओं और पूर्व सैनिकों ने भी अपनी चिंताएं जाहिर की थीं।

    विशेष रूप से उन युवाओं के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण रहा है, जो लंबे समय तक सेना में सेवा करने की इच्छा से भर्ती हुए थे। चार साल की सीमित अवधि के कारण उन्हें भविष्य की नौकरी और करियर को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता था।

    अब सेवा अवधि में दो साल की बढ़ोतरी के फैसले को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे अग्निवीरों को सैन्य वातावरण में अधिक समय तक काम करने, अनुभव हासिल करने और नियमित सैन्य सेवा के लिए अपनी पात्रता साबित करने का अतिरिक्त अवसर मिल सकता है।

    कई राज्यों ने अग्निवीरों के लिए दिए हैं आरक्षण के प्रावधान

    अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी करने के बाद बाहर आने वाले अग्निवीरों के पुनर्वास और रोजगार को लेकर केंद्र तथा विभिन्न राज्य सरकारों ने भी कदम उठाए हैं।

    उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों ने अग्निवीरों को पुलिस और अन्य सरकारी सेवाओं में भर्ती के दौरान आरक्षण या प्राथमिकता देने से संबंधित घोषणाएं की हैं।

    इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य सैन्य सेवा के दौरान प्राप्त अनुशासन, प्रशिक्षण और अनुभव का उपयोग नागरिक प्रशासन तथा सुरक्षा सेवाओं में करना है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में आरक्षण और प्राथमिकता से संबंधित नियम तथा पात्रता की शर्तें अलग हो सकती हैं।

    केंद्र सरकार की नई व्यवस्था के बाद अग्निवीरों के पास सैन्य सेवा में अधिक समय बिताने का विकल्प उपलब्ध होगा। इससे उन युवाओं को विशेष लाभ मिल सकता है, जो सेना में अपना करियर जारी रखना चाहते हैं।

    अग्निपथ योजना का उद्देश्य क्या है?

    अग्निपथ योजना को केंद्र सरकार ने भारतीय सशस्त्र बलों की भर्ती व्यवस्था में बदलाव और सेना को अधिक युवा तथा गतिशील बनाने के उद्देश्य से शुरू किया था।

    सरकार का कहना रहा है कि इस योजना के माध्यम से युवाओं को देश की सेवा करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही सेना की औसत आयु कम करने और आधुनिक सैन्य चुनौतियों के अनुरूप अधिक युवा बल तैयार करने पर जोर दिया गया।

    योजना के तहत चयनित अग्निवीरों को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है और उन्हें निर्धारित सेवा अवधि के दौरान सेना की विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं। चार साल की सेवा पूरी करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित बलों में शामिल करने का प्रावधान रखा गया था।

    अब दो साल की अतिरिक्त सेवा का विकल्प इस भर्ती व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे अग्निवीरों को अपने सैन्य करियर को आगे बढ़ाने के लिए अधिक समय मिलेगा।

    रक्षा क्षेत्र में सरकार के फैसले का क्या होगा असर?

    रक्षा विशेषज्ञों और सैन्य भर्ती व्यवस्था पर नजर रखने वालों के लिए यह फैसला कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हो सकता है। अतिरिक्त दो साल की सेवा से अग्निवीरों को अधिक व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने और सैन्य प्रशिक्षण का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिल सकता है।

    इसके अलावा, नियमित सशस्त्र बलों में शामिल होने की प्रक्रिया के लिए भी उन्हें अतिरिक्त समय मिलेगा। इससे सेना को ऐसे प्रशिक्षित और अनुभवी युवाओं का चयन करने का अवसर मिल सकता है, जिन्होंने पहले ही चार साल तक सैन्य वातावरण में काम किया है।

    हालांकि, इस बदलाव का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अतिरिक्त सेवा अवधि के लिए चयन कैसे किया जाता है, नियमित भर्ती के मानदंड क्या होंगे और कितने अग्निवीर अंततः नियमित बलों में शामिल हो पाएंगे।

    फिलहाल केंद्रीय मंत्रिमंडल का यह फैसला अग्निवीरों के लिए सेवा अवधि बढ़ाने और सैन्य करियर के विकल्पों को विस्तार देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। चार साल की सेवा के बाद बाहर होने की अनिवार्यता के स्थान पर अब 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो साल अतिरिक्त सेवा का विकल्प मिलेगा। इसके बाद इच्छुक उम्मीदवारों को निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत नियमित सशस्त्र बलों में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा।

     
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