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    भारत-जापान शैक्षणिक सहयोग से विद्यार्थियों को मिलेंगे नए अवसर : डॉ. मनीष बियानी

    53 minutes ago

    BICON-2026 के दूसरे दिन : इंटेलिजेंट हेल्थकेयर, एआई और वैज्ञानिक नवाचार पर चर्चा

    जयपुर। बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस में आयोजित चार दिवसीय 21 वी इंडो-जापान इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ‘बायकॉन-2026’ का दूसरा दिन सफलतापूर्वक आयोजित हुआ। दूसरे दिन साइंस, फार्मेसी और नर्सिंग विभाग की ओर से ‘द फ्यूचर ऑफ इंटेलिजेंट हेल्थकेयर एंड साइंटिफिक इनोवेशन’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित किये गए । इसमें विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य, विज्ञान, चिकित्सा एवं तकनीकी नवाचार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए।

    कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण, दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुई। इसके बाद अतिथियों, वक्ताओं एवं जापानी प्रतिनिधियो का पारम्परिक स्वागत किया गया।

    उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. गोपाल शर्मा , विशिष्ट अतिथि जापान दूतावास, भारत के फर्स्ट सेक्रेटरी यासुयुकी नाकायामा का स्वागत आयोजक चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी, एकेडमिक डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट निदेशक डॉ. मनीष बियानी, असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. राधिका बियानी , असिस्टेंट डायरेक्टर सीए अभिषेक बियानी, असिस्टेंट डायरेक्टर सीए साक्षी बियानी तथा प्रिंसिपल एवं डीन डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल ने सभी गणमान्य अतिथियों का बुके, शॉल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया।

    कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयर एवं डायरेक्टर (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) प्रोफेसर डॉ. मनीष बियानी ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि इस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य विद्यार्थियों को जापान में उच्च शिक्षा, करियर, रोजगार और वहां की कार्य संस्कृति से परिचित कराना है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए जापान की ओसाका यूनिवर्सिटी के साथ एमओयू की दिशा में भी पहल की जा रही है, जिससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा एवं भविष्य में रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।

    वही मुख्य अतिथि सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. गोपाल शर्मा ने भारत-जापान के बीच बढ़ते शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग से विद्यार्थियों के लिए शिक्षा और करियर के नए अवसर विकसित हो रहे हैं। उन्होंने जापानी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए भारत-जापान की बढ़ती आत्मीयता और सहयोग की सराहना की। साथ ही, उन्होंने बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस द्वारा दोनों देशों के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की।

    इसके साथ ही जापान दूतावास, भारत के फर्स्ट सेक्रेटरी यासुयुकी नाकायामा ने भारत-जापान संबंधों और दोनों देशों के बीच शिक्षा, तकनीक एवं विकास के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जापान सरकार का विजन भारत और जापान के बीच साझा विकास एवं आपसी विश्वास को मजबूत करना है। उन्होंने साकुरा कार्यक्रम और JASSO स्कॉलरशिप के माध्यम से विद्यार्थियों को मिल रहे अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गुलाबी स्टूडेंट एक्सचेंज कार्यक्रम दोनों देशों के विद्यार्थियों को एक-दूसरे की संस्कृति समझने और शैक्षणिक संबंध मजबूत करने का अवसर प्रदान कर रहा है। उन्होंने दोनों देशों के बीच इस साझेदारी को और मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की।

    इस अवसर पर BICON-2026 के 21वें संस्करण के सोविनियर की रिलीजिंग सेरेमनी आयोजित की गई। साथ ही ‘गुलाबी कार्यक्रम-2026’ में जापानी विद्यार्थियों ने भारत की संस्कृति, खान-पान, योग, खेल और होमस्टे के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि भाषा से अलग होने के बावजूद खेल, संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने दोनों देशों के विद्यार्थियों को करीब लाया। उन्होंने भविष्य में भाषा और संस्कृति के माध्यम से भारत-जापान संबंध मजबूत करने की बात कही।

    कार्यक्रम में जापान की क्वांसेई गाकुइन यूनिवर्सिटी के बायोमेडिकल केमिस्ट्री विभाग से प्रो. हिदेतोशी सातो ने बायोमेडिकल रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी के इतिहास, विकास और भविष्य की संभावनाओं पर जानकारी साझा की। उन्होंने इसके वैज्ञानिक अनुसंधान और चिकित्सा क्षेत्र में उपयोग के बारे में बताया।

    समापन सत्र में एकेडमिक डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी ने जापान से आए प्रोफेसर्स, विद्यार्थियों, सभी वक्ताओं, प्राचार्यों, फैकल्टी सदस्यों एवं आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों को धैर्य और निरंतर सीखने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि धैर्य के साथ सुनना और सीखना भी सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    इसके बाद आयोजित इनवाइटेड लेक्चर सेशन में इशिकावा प्रीफ़ेक्चरल यूनिवर्सिटी से प्रोफ़ेसर यासुनोरी बाबा ने जयपुर-कानाजावा की सांस्कृतिक समानताओं के साथ जापान की सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी और बायोगैस पर अपनी नवीनतम रिसर्च साझा की। उन्होंने रुमेन मीथेन डाइजेस्टर से कुकिंग गैस, बिजली और लिक्विड फर्टिलाइजर तैयार करने की संभावनाओं के साथ जयपुर के प्लांट वेस्ट पर शोध की आवश्यकता बताई।

    क्वानसेई गाकुइन यूनिवर्सिटी से प्रो. इकुको याओ ने एसीटाइलकोलीन और उससे जुड़े मॉलिक्यूल्स की इमेजिंग के लिए इमेजिंग मास स्पेक्ट्रोमेट्री और माल्डी इमेजिंग तकनीक के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन तकनीकों की मदद से मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर, रिसेप्टर्स और एंजाइम्स का अध्ययन किया जा सकता है।

    प्रोफेसर डॉ. रति बालचंद्रन, (डॉ. राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल कॉलेज ऑफ नर्सिंग, दिल्ली) ने नर्सिंग रिफॉर्म्स और स्मार्ट नर्सिंग पर जानकारी साझा करते हुए पारंपरिक नर्सिंग से स्मार्ट नर्सिंग की ओर बदलाव पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक, बेहतर समन्वय और डिजिटल सिस्टम से मरीजों की देखभाल अधिक प्रभावी हो सकती है, लेकिन नर्सिंग में मानवीय समझ और सही निर्णय लेना भी जरूरी है।

    आईआईटी इंदौर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग से प्रो. दिनाकरन शानमुग ने सीएफडी के माध्यम से हवा, पानी और रक्त प्रवाह के अध्ययन तथा इसके विमान, ड्रोन, कूलिंग सिस्टम और चिकित्सा क्षेत्र में उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने एनेयूरिज्म, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, स्टेंटिंग और ड्राई पाउडर इनहेलर में दवा की डिलीवरी जैसे अनुप्रयोगों पर भी प्रकाश डाला।

    IIT दिल्ली के सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग से प्रो. गजाला हबीब, आईआईटी दिल्ली के सिविल एवं पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग ने भारी वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पीएम2.5, एनओएक्स और सीओ जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन वाहन के वजन, ईंधन और रखरखाव जैसे कारकों से प्रभावित होता है। उन्होंने वास्तविक परिस्थितियों में उत्सर्जन के अध्ययन को प्रदूषण कम करने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

    अजमेर के केंद्रीय विश्वविद्यालय से प्रो. अमित कुमार गोयल, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान, अजमेर ने नैनोमेडिसिन और एडवांस्ड ड्रग डिलीवरी सिस्टम पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि नैनोटेक्नोलॉजी की मदद से दवाओं और वैक्सीन को शरीर में अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाने, साइड इफेक्ट कम करने और दवाओं के बेहतर असर में मदद मिल सकती है।

    जोधपुर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग से डॉ. सुमित कालरा ने एआई आधारित इंटीग्रेटिव मेडिसिन पर जानकारी साझा की। उन्होंने आयुष को डिजिटल बनाने, कंप्यूटेशनल इंटेलिजेंस और एआई के माध्यम से आयुर्वेद और योग को वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित बनाने पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कंप्यूटर विज़न, मशीन लर्निंग और अन्य आधुनिक तकनीकों के स्वास्थ्य क्षेत्र में उपयोग पर भी प्रकाश डाला।

    इशिकावा प्रीफ़ेक्चरल यूनिवर्सिटी के प्रो. जुनसेओक ली ने बायोमास उपयोग में व्हाइट रॉट फंगी की भूमिका पर जानकारी देते हुए बताया कि ये फंगी लिग्निन को प्रभावी ढंग से तोड़कर बायोमास के उपयोग को आसान बनाते हैं। उन्होंने लिग्निन डिग्रेडेशन पर चल रहे शोध और इसके संभावित उपयोगों पर भी प्रकाश डाला।

    पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोडक्शन एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग से डॉ. जिमी कार्लूपिया ने एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और एआई में मशीन लर्निंग के उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि तकनीक में दिन-प्रतिदिन बदलाव हो रहे हैं और मशीन लर्निंग व एआई के माध्यम से मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं को अधिक बेहतर और प्रभावी बनाया जा सकता है।

    इंडस्ट्रियल सेशन एवं एचआर कॉन्क्लेव में मानव संसाधन और इंडस्ट्री से जुड़े विषयों पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। सत्र की चेयर ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट हेड डॉ. स्मृति तिवारी रहीं, जबकि सत्र का संचालन असिस्टेंट प्रो कंचन शर्मा ने किया। पैनल में नाइतेई ब्रिज कंपनी लिमिटेड जापान से काटो तोमोको, स्टार्टअपोलॉजी से विवेक चड्ढा, जेनेनेस्ट बायोटेक से नितिन गुप्ता, इनफिनिटा बायोटेक से शिल्पी मिश्रा, बीएएसएफ से अरविंद शंकर ने भाग लिया।

    विशेषज्ञों ने एंटरप्रेन्योरशिप में एआई से जुड़ी चुनौतियों, जापानी कंपनियों में काम के लिए जरूरी स्किल्स और भारतीय मार्केट की मांग पर चर्चा की। विद्यार्थियों को पहल करने, असफलताओं से सीखने, जापानी भाषा सीखने और प्रैक्टिकल लर्निंग पर जोर दिया गया।

    मौखिक प्रस्तुति सत्र में शोधकर्ताओं ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। प्रत्येक शोध-पत्र के लिए 10 मिनट का समय निर्धारित रहा, जिसके बाद प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ। सत्र की अध्यक्षता बियानी गर्ल्स कॉलेज, जयपुर के रिसर्च हेड डॉ. विष्णु शर्मा ने की। कार्यक्रम के अंत में अवार्ड सेरेमनी आयोजित कर प्रतिभागियों को मेमेंटो प्रदान किए गए।

    कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयर एवं डायरेक्टर (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) प्रोफेसर डॉ. मनीष बियानी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

     

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