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    पाकिस्तान का दावा: 48 घंटे में 177 Baloch militant ढेर, दशकों का सबसे बड़ा सुरक्षा अभियान

    2 hours ago

     

    पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने दावा किया है कि बलूचिस्तान में चलाए गए व्यापक सैन्य अभियान के दौरान महज़ 48 घंटों में 177 Baloch militant को मार गिराया गया। अधिकारियों के मुताबिक, यह पिछले कई दशकों में किसी एक चरण में मारे गए बलूच उग्रवादियों की सबसे बड़ी संख्या है। यह कार्रवाई ऐसे समय पर सामने आई है जब हाल के महीनों में सुरक्षा बलों, चीनी परियोजनाओं, सैन्य काफ़िलों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर हमलों में तेज़ी देखी गई थी।

    सरकारी बयान में कहा गया है कि अभियान का उद्देश्य Baloch militant नेटवर्क को निर्णायक झटका देना और क्षेत्र में बढ़ती हिंसा पर काबू पाना था। हालांकि, स्वतंत्र स्रोतों से इन आंकड़ों की पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है, और यही बात इस बड़े दावे को लेकर सवाल भी खड़े कर रही है।

     

    बलूचिस्तान में Baloch militant के खिलाफ कार्रवाई क्यों तेज़ हुई

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह ऑपरेशन पाकिस्तानी सेना, फ्रंटियर कोर और अन्य अर्धसैनिक बलों की संयुक्त कार्रवाई के तहत किया गया। खुफिया सूचनाओं के आधार पर एक साथ कई इलाकों में छापेमारी की गई, जिसमें ड्रोन निगरानी, हवाई सहायता और ज़मीनी घेराबंदी की रणनीति अपनाई गई। अधिकारियों का दावा है कि इस दौरान Baloch militant के ठिकानों, हथियार डिपो, संचार नेटवर्क और कथित प्रशिक्षण शिविरों को निशाना बनाया गया।

    Balochistan लंबे समय से अलगाववादी आंदोलन और सुरक्षा अभियानों का केंद्र रहा है। प्राकृतिक गैस, खनिज संसाधनों और रणनीतिक महत्व के बावजूद यह प्रांत विकास, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संसाधनों के बंटवारे को लेकर असंतोष से जूझता रहा है। बलूच समूह इन्हीं मुद्दों को लेकर दशकों से संघर्ष का दावा करते आए हैं, जबकि पाकिस्तान सरकार का कहना है कि ये समूह हिंसा के ज़रिये राज्य की संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं।

     

    बड़े ऑपरेशन के बाद सुरक्षा, मानवाधिकार और राजनीति की चुनौती

    इतनी बड़ी संख्या में Baloch militant के मारे जाने के दावे के बाद मानवाधिकार संगठनों ने अभियान की पारदर्शिता और स्वतंत्र जांच की मांग दोहराई है। उनका तर्क है कि बड़े सैन्य अभियानों में अक्सर नागरिक हताहतों, जबरन ग़ायब किए जाने और सामूहिक सज़ा जैसी चिंताओं को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। वहीं, सरकार का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह लक्षित थी और आम नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए विशेष सावधानियाँ बरती गईं।

    विश्लेषकों का मानना है कि यह ऑपरेशन अल्पकाल में Baloch militant नेटवर्क को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है और सुरक्षा बलों को रणनीतिक बढ़त दिला सकता है। लेकिन वे यह भी चेतावनी देते हैं कि केवल सैन्य कार्रवाई से बलूचिस्तान में स्थायी शांति संभव नहीं है। राजनीतिक संवाद, आर्थिक विकास, स्थानीय नेतृत्व की भागीदारी और भरोसे की बहाली के बिना यह आशंका बनी रहेगी कि हिंसा किसी नए रूप में दोबारा उभर सकती है।

    आगे की रणनीति को लेकर अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि सुरक्षा अभियान के बाद प्रभावित इलाकों में प्रशासनिक मौजूदगी बढ़ाई जाएगी और विकास कार्यों को तेज़ करने की कोशिश की जाएगी। सवाल यह है कि क्या यह बड़ा सैन्य ऑपरेशन वास्तव में Baloch militant आंदोलन की दिशा बदल पाएगा, या फिर यह लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के एक और अध्याय के रूप में दर्ज होकर रह जाएगा।

     

    Frequently Asked Questions

    1 पाकिस्तानी सेना क्या है?

    उत्तर: पाकिस्तानी सेना पाकिस्तान की थल सेना है, जो देश की सीमाओं की रक्षा, आंतरिक सुरक्षा और आपदा राहत जैसे कार्यों की ज़िम्मेदारी निभाती है।

    2 पाकिस्तानी सेना की स्थापना कब हुई?

    उत्तर: पाकिस्तानी सेना की स्थापना 14 अगस्त 1947 को हुई, जब भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान एक स्वतंत्र देश बना।

    3 पाकिस्तानी सेना का सर्वोच्च कमांडर कौन होता है?

    उत्तर: संवैधानिक रूप से पाकिस्तान के राष्ट्रपति पाकिस्तानी सेना के सर्वोच्च कमांडर होते हैं, जबकि सेना का संचालन सेना प्रमुख (चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टाफ) करते हैं।

    4 पाकिस्तानी सेना की भूमिका राजनीति में क्यों चर्चा में रहती है?

    उत्तर: पाकिस्तान के इतिहास में सेना ने कई बार राजनीतिक हस्तक्षेप किया है, जिसके कारण वह देश की राजनीति में एक प्रभावशाली शक्ति के रूप में देखी जाती है।

    5 पाकिस्तानी सेना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किन अभियानों में शामिल रही है?

     

    उत्तर: पाकिस्तानी सेना संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भाग लेती रही है और सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों तथा आपदा राहत कार्यों में भी सक्रिय रही है।

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