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    मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में दो बाघ मृत पाए गए, जांच शुरू

    2 hours ago

    मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के जंगलों में सोमवार को एक नर बाघ और एक मादा बाघ मृत अवस्था में पाए गए। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों बाघों के शव नॉर्थ शहडोल वन क्षेत्र से बरामद किए गए हैं और प्रारंभिक जांच में उनकी मौत के अलग-अलग कारण सामने आए हैं।

    अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति के अनुसार, शुरुआती जानकारी से संकेत मिलता है कि एक बाघ की मौत क्षेत्रीय संघर्ष (टेरिटोरियल फाइट) के कारण हुई, जबकि दूसरे बाघ की मौत करंट लगने से हुई प्रतीत हो रही है। उन्होंने बताया कि सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

    अधिकारी ने कहा कि फिलहाल ये निष्कर्ष प्रारंभिक हैं और बाघों की मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही की जा सकेगी। वन विभाग सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं इसमें मानवीय लापरवाही या अवैध गतिविधियों की भूमिका तो नहीं है।

    मध्य प्रदेश को देश का ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है और यहां भारत में सबसे अधिक बाघ पाए जाते हैं। इसके बावजूद, हाल के वर्षों में बाघों की बढ़ती मौतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। वर्ष 2025 में राज्य में बड़ी संख्या में बाघों की मौत की खबरें सामने आई थीं, जिनमें कई मौतें प्राकृतिक कारणों के बजाय अस्वाभाविक परिस्थितियों में हुई बताई गई थीं।

    इसी पृष्ठभूमि में 20 जनवरी 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में बाघों की बढ़ती मौतों को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था। यह नोटिस वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे द्वारा दायर एक याचिका पर जारी किया गया था। याचिका में दावा किया गया था कि 2025 में राज्य में 54 बाघों की मौत हुई, जो ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की शुरुआत के बाद किसी एक वर्ष में सबसे अधिक है। याचिका में यह भी कहा गया था कि इन मौतों में से आधे से अधिक अस्वाभाविक कारणों से हुईं।

    शहडोल जिले में दो बाघों की ताजा मौतों ने एक बार फिर राज्य में वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों और संरक्षण से जुड़े लोगों का मानना है कि बाघों की सुरक्षा के लिए जंगलों में निगरानी, अवैध बिजली तारों और शिकार पर सख्ती से रोक, तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।

     

    फिलहाल, वन विभाग की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इन दोनों बाघों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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