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    चीन–ब्रिटेन रिश्तों में नई शुरुआत आठ साल बाद बड़े कूटनीतिक संकेत

    3 days ago

    कई वर्षों की तल्ख़ी और अविश्वास के बाद चीन और ब्रिटेन संबंधों को नए सिरे से आगे बढ़ाने के संकेत दे रहे हैं। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक को रिश्तों में नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। आठ वर्षों में पहली बार किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री की चीन यात्रा यह दिखाती है कि लंदन अब टकराव से आगे बढ़कर संवाद और व्यावहारिक सहयोग की राह तलाश रहा है।

     

    अमेरिका की नीतियों के बीच बीजिंग की ओर बढ़ता लंदन

    बैठक के बाद दोनों देशों ने शिक्षा स्वास्थ्य वित्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैव विज्ञान और नई ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। चीन ने ब्रिटिश नागरिकों के लिए वीज़ा मुक्त प्रवेश पर विचार के संकेत दिए जबकि ब्रिटेन ने चीनी कंपनियों के लिए निष्पक्ष कारोबारी माहौल की बात कही। यह कूटनीतिक नरमी ऐसे समय आई है जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ी है और ब्रिटेन व्यापार व निवेश के नए संतुलन की तलाश में दिखाई दे रहा है।

    इसके साथ ही दोनों देशों ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में उच्चस्तरीय संवाद और नियमित कूटनीतिक संपर्क बनाए रखे जाएंगे। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने बैठक के दौरान कहा कि एक “परिपक्व और व्यावहारिक संबंध” समय की मांग है, जिससे मतभेदों को खुले संवाद के ज़रिये संभाला जा सके। चीन की ओर से भी यह संकेत दिया गया कि व्यापार और निवेश को राजनीति से अलग रखकर देखा जाना चाहिए, ताकि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच दोनों देशों को लाभ मिल सके।

    हालाँकि, यह नई गर्मजोशी पूरी तरह बेफिक्र नहीं है। ब्रिटेन में चीन को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा, जासूसी के आरोप और साइबर हमलों को लेकर चिंताएँ अब भी बनी हुई हैं। वहीं, हांगकांग में लोकतांत्रिक आंदोलनों पर चीन की कार्रवाई और सख़्त सुरक्षा क़ानून भी रिश्तों में तनाव का कारण रहे हैं। इसके बावजूद, यह कूटनीतिक पहल बताती है कि लंदन और बीजिंग अब टकराव की बजाय संतुलन और व्यावहारिक सहयोग की नीति अपनाने की कोशिश कर रहे हैं एक ऐसा कदम, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक राजनीति और व्यापार दोनों को नई दिशा दे सकता है।

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