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    भारतीय भाषाओं के माध्यम से शास्त्रीय ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ना ही भारतीय ज्ञान परम्परा का मूल उद्देश्य

    3 days ago

      प्रो. मदन मोहन झा द्वि दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ

    जयपुर।

    केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली एवं राजस्थान शिक्षक प्रशिक्षण विद्यापीठ, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय ज्ञान परम्परा एवं भारतीय भाषाएं विषयक द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का भव्य शुभारम्भ दिनांक 29 जनवरी 2026 को राजस्थान शिक्षक प्रशिक्षण विद्यापीठ, शाहपुरा बाग, आमेर रोड, जयपुर में गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ।

     समारोह का वर्चुअल उद्घाटन केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो.श्रीनिवास वरखेड़ी द्वारा किया गया।

    उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) प्रभाग के सलाहकार ब्रिगेडियर प्रो. जीवन राजपूत, ‘राष्ट्रपति सम्मानित’ एवं राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के पूर्व कुलपति प्रो. वैद्य बनवारी लाल गौड़ उपस्थित रहे। संगोष्ठी की अध्यक्षता संस्कृत भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष एवं श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय ने की। सारस्वत अतिथि के रूप में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर के सेवानिवृत्त निदेशक प्रो. वाई.एस. रमेश अध्यक्ष राजस्थान संस्कृत साहित्य सम्मेलन अध्यक्ष पूर्व मंत्री बृजकिशोर शर्मा उपस्थित रहे। राजस्थान संस्कृत साहित्य सम्मेलन के महामंत्री डॉ. राजकुमार जोशी ने आगन्तुक अतिथियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि प्रो. मदन मोहन झा ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा (IKS) का मूल उद्देश्य भारतीय भाषाओं के माध्यम से भारतीय शास्त्रों में निहित व्यवहारिक ज्ञान को समझना तथा उसे आधुनिक ज्ञान-विज्ञान से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि भारतीय शास्त्रों का ज्ञान केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह परम्परा एवं व्यवहार में निहित समाजोपयोगी ज्ञान है, जिसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्थापित किया जाना आवश्यक है।

    उन्होंने मंत्र, यज्ञ एवं वैदिक परम्पराओं के वैज्ञानिक पक्षों पर गहन शोध की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया कि इसी उद्देश्य से राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में ‘मंत्र प्रतिष्ठान’ की स्थापना की गई है। यह प्रतिष्ठान आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के सहयोग से अनुसंधान एवं शोध कार्यों को आगे बढ़ाएगा, जिससे भारतीय ज्ञान परम्परा के वैज्ञानिक स्वरूप को प्रमाणित किया जा सकेगा। प्रो वाई एस रमेश ने भी सम्बोधित किया।वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान परम्परा की समृद्ध विरासत, संस्कृत एवं भारतीय भाषाओं की शैक्षिक-सांस्कृतिक प्रासंगिकता तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आलोक में उनकी भूमिका पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए। राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों से आए विद्वान, शोधार्थी एवं शिक्षाविद इस द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में सहभागिता कर रहे हैं। संगोष्ठी के अंतर्गत विभिन्न सत्रों में शोध-पत्रों का वाचन एवं अकादमिक विमर्श किया जाएगा। इस अवसर पर पण्डित सांवरमल शास्त्री, प्रो. मोहनलाल शर्मा, प्रो. गोपीनाथ शर्मा, प्रो. कुलदीप शर्मा, प्रो. वेदप्रकाश शर्मा, प्रो. गोपीनाथ पारीक डॉ. सुभद्रा जोशी डॉ संजय गोस्वामी राजेन्द्र शर्मा हंस उपस्थित रहे।

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