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    चांदी के दाम ₹4 लाख प्रति किलोग्राम पार, सोना भी रिकॉर्ड ऊँचाई पर

    3 days ago

    गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को भारतीय बुलियन बाजार में ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली, जब चांदी के फ्यूचर्स ने पहली बार ₹4 लाख प्रति किलोग्राम का उच्चतम स्तर छू लिया। इसके साथ ही सोने की कीमतें भी ऐतिहासिक ऊँचाई पर पहुँच गईं, और फरवरी डिलीवरी का सोना ₹1,80,501 प्रति 10 ग्राम पर पहुँच गया। यह तेजी मुख्य रूप से वैश्विक बाजारों में मजबूत संकेतों, औद्योगिक मांग में बढ़ोतरी और निवेशकों की बढ़ती रुचि के कारण आई है।

    घरेलू बाजार में तेजी

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के मार्च डिलीवरी फ्यूचर्स में ₹22,090 या 5.73% की तेजी दर्ज की गई, और यह ₹4,07,456 प्रति किलोग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया। वहीं, सोने में भी निवेशकों की उत्सुकता दिखाई दी। फरवरी डिलीवरी के लिए सोने का भाव ₹14,586 या 8.8% की वृद्धि के साथ ₹1,80,501 प्रति 10 ग्राम तक पहुँच गया।

    विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी में औद्योगिक मांग में वृद्धि और अमेरिकी डॉलर में कमजोरी ने सफेद धातु को अतिरिक्त मजबूती दी है। हाल के सत्रों में चांदी ने सोने की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।

    अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बुलियन धातुओं में तेज वृद्धि हुई। Comex पर सोने के फ्यूचर्स ने $5,600 प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर दिया। अप्रैल डिलीवरी का सोना $286.6 या 5.4% बढ़कर $5,626.8 प्रति औंस पर पहुँच गया। वहीं, चांदी के Comex फ्यूचर्स $119.51 प्रति औंस के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुँचे।

    विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों की बढ़ी हुई भू-राजनीतिक चिंताओं और आर्थिक अनिश्चितताओं ने सोने और चांदी को एक सुरक्षित निवेश (Safe-Haven) विकल्प के रूप में और अधिक आकर्षक बना दिया है।

    निवेशकों की बढ़ती उत्सुकता

    विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के हफ्तों में निवेशकों ने सोने और चांदी में भारी मात्रा में निवेश किया है। मुख्य कारण यह है कि अमेरिकी डॉलर की कमजोरी, वैश्विक मुद्रास्फीति, और वैश्विक राजनीतिक तनावों ने इन धातुओं को सुरक्षित निवेश विकल्प बना दिया है।

    “जब बाजार में आर्थिक अनिश्चितताएँ बढ़ती हैं और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक तनाव गहरा होता है, तो निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर आकर्षित होते हैं। सोना और चांदी ऐसे समय में सबसे भरोसेमंद निवेश माने जाते हैं,” एक वरिष्ठ बाजार विश्लेषक ने कहा।

    औद्योगिक मांग और निवेश का संतुलन

    चांदी की कीमतों में इस समय रिकॉर्ड वृद्धि का एक और कारण औद्योगिक मांग में बढ़ोतरी है। चांदी का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, फोटोग्राफी, मेडिकल उपकरणों, और सौर पैनलों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। वैश्विक औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ नवाचार और तकनीकी विकास ने चांदी की मांग को और बढ़ाया है।

    इसकी तुलना में सोना मुख्य रूप से निवेश और आभूषण उद्योग में इस्तेमाल होता है। हाल के हफ्तों में, भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों ने सोने की खरीद बढ़ा दी है, जिससे इसकी कीमत में भी तेजी आई है।

    वैश्विक आर्थिक परिदृश्य

    वैश्विक बाजारों में तेजी के कई कारण हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ में मुद्रास्फीति के दबाव, ऊर्जा और तेल की बढ़ती कीमतें, और भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर मोड़ा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर में कमजोरी ने भी सोने और चांदी की कीमतों को बढ़ावा दिया है। डॉलर कमजोर होने पर, विदेशी निवेशक इन धातुओं को खरीदकर अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करते हैं।

    भारतीय निवेशक और बुलियन मार्केट

    भारत में सोना और चांदी परंपरागत रूप से निवेश और आभूषण के लिए सबसे लोकप्रिय धातुएँ रही हैं। त्योहारी सीजन और मांग में वृद्धि के कारण सोना और चांदी की कीमतों में अक्सर उछाल आता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में निवेशकों के लिए चांदी में निवेश सोने की तुलना में अधिक लाभदायक साबित हो सकता है, क्योंकि चांदी ने हाल के हफ्तों में सोने को पीछे छोड़ दिया है।

    भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश

    वैश्विक स्तर पर राजनीतिक तनाव और अस्थिरता, जैसे कि मध्य-पूर्व में संघर्ष, यूक्रेन और रूस के बीच संघर्ष, और चीन-अमेरिका व्यापार तनाव, निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित कर रहे हैं।

    सोना और चांदी दोनों को ऐसे समय में सुरक्षा संपत्ति (Safe-Haven Asset) माना जाता है। निवेशक इन धातुओं को आर्थिक अनिश्चितताओं और बाजार में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए खरीदते हैं।

    विशेषज्ञों की सलाह

    वित्तीय विशेषज्ञों ने निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि भले ही सोने और चांदी में तेजी चल रही है, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम हमेशा रहता है।

    “निवेशक लंबी अवधि के दृष्टिकोण से सोना और चांदी में निवेश करें, न कि सिर्फ अल्पकालिक मुनाफे के लिए। बाजार की स्थिति और वैश्विक घटनाओं पर नजर रखना बेहद जरूरी है,” एक विशेषज्ञ ने कहा।

    भविष्य की संभावनाएँ

    विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में चांदी और सोने की कीमतें और बढ़ सकती हैं, अगर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएँ और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ते हैं।

    इसके अलावा, भारत में निवेशकों की मांग भी उच्च बनी हुई है। त्योहारी सीजन और विवाह के मौसम में आभूषण उद्योग की मांग में वृद्धि से सोना और चांदी की कीमतें और ऊँचाई पर पहुँच सकती हैं।

    निष्कर्ष

    भारत और वैश्विक बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में तेजी ने निवेशकों के लिए नए अवसर खोले हैं। हालांकि, निवेशकों को हमेशा बाजार की जोखिमों और उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए।

    इस ऐतिहासिक रैली ने यह स्पष्ट किया है कि सोना और चांदी न केवल निवेश का माध्यम हैं, बल्कि आर्थिक अनिश्चितताओं और वैश्विक तनावों के समय में सुरक्षा का प्रतीक भी हैं।

     

    संक्षेप में, चांदी ₹4 लाख प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई है, जबकि सोने ने ₹1.8 लाख प्रति 10 ग्राम की उच्चतम कीमत छू ली है। निवेशकों की बढ़ती मांग, औद्योगिक जरूरतें, कमजोर डॉलर और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता ने इस तेजी को प्रेरित किया है। विशेषज्ञों की सलाह है कि लंबी अवधि के दृष्टिकोण से निवेश करना और बाजार की स्थिति पर नजर बनाए रखना सबसे सुरक्षित रणनीति है।

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