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    IIT दिल्ली के छात्र की मौत से उठे गंभीर सवाल, परिवार ने कॉलेज व्यवस्था पर लगाए सहयोग न करने के आरोप

    1 hour ago

     

    Yugcharan News / 26-08-2026

    नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के MSc फिजिक्स के 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद संस्थान में छात्र कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऋषिकेश की मौत 22 अगस्त को IIT दिल्ली परिसर में हुई थी। पुलिस के अनुसार, उन्हें संस्थान के अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं होने की बात भी पुलिस ने कही है। मामले की जांच जारी है।

    इस घटना के बाद ऋषिकेश के परिवार की ओर से संस्थान में उनके अनुभवों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परिस्थितियों को लेकर कई दावे सामने आए हैं। उनके भाई अभिषेक कुमार ने बताया कि ऋषिकेश अपनी मां से लगातार तनाव और मानसिक परेशानी के बारे में बात कर रहे थे। परिवार का कहना है कि छात्र की पढ़ाई, हॉस्टल से जुड़ी परिस्थितियों और संस्थान में अपनी स्थिति को लेकर वह काफी दबाव में थे।

    ऋषिकेश की मां आशा पोद्दार ने एक बातचीत में बताया कि घटना से एक रात पहले उनके बेटे ने उनसे अपनी तकलीफ साझा की थी। परिवार के अनुसार, वह भावनात्मक रूप से बेहद परेशान थे और अपनी पढ़ाई तथा भविष्य को लेकर निराशा व्यक्त कर रहे थे। मां ने बताया कि उस रात परिवार ने उन्हें समझाने और चिकित्सकीय मदद लेने की कोशिश की थी।

    पढ़ाई में लगातार आ रही परेशानियों से तनाव में थे ऋषिकेश

    परिवार के मुताबिक, ऋषिकेश के लिए IIT में पढ़ाई करना लंबे समय से एक बड़ा सपना था। उनके भाई ने बताया कि वह अकादमिक रूप से प्रतिभाशाली थे और प्रतियोगी परीक्षाओं तथा उच्च शिक्षा को लेकर बेहद गंभीर रहते थे। परिवार के अनुसार, IIT दिल्ली में दाखिले के बाद शुरुआती समय में उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया और पहले सेमेस्टर में उनका CGPA करीब 8 रहा था।

    हालांकि, बाद के महीनों में उनकी स्थिति बदलने लगी। परिवार के मुताबिक, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों के कारण उन्हें इलाज की आवश्यकता पड़ी। इसके बाद उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हुई और उन्हें सेमेस्टर से हटने की अनुमति दी गई।

    ऋषिकेश के भाई का दावा है कि परिवार ने उनकी चिकित्सा संबंधी जरूरतों को गंभीरता से लिया और विशेषज्ञों से उपचार कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहरी विशेषज्ञों से उपचार और स्वास्थ्य संबंधी सलाह मिलने के बावजूद संस्थान की ओर से दोबारा मूल्यांकन और अलग-अलग प्रक्रियाओं की जरूरत बताई जाती रही, जिससे छात्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।

    हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकेगा। IIT दिल्ली ने इस मामले में अपनी ओर से अलग जानकारी साझा की है और संस्थान के अनुसार छात्र को आवश्यक चिकित्सा एवं परामर्श सहायता उपलब्ध कराई गई थी।

    IIT दिल्ली ने बनाई पांच सदस्यीय बाहरी जांच समिति

    घटना के बाद IIT दिल्ली ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय बाहरी जांच समिति गठित की है। संस्थान ने कहा है कि छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। समिति का उद्देश्य उन परिस्थितियों की जांच करना है जिनके बीच छात्र की मौत हुई।

    IIT दिल्ली के अनुसार, ऋषिकेश ने जुलाई 2025 में संस्थान में प्रवेश लिया था और शुरुआत में परिसर के हॉस्टल में रह रहे थे। संस्थान के बयान के मुताबिक, इस वर्ष होली के बाद साथी छात्रों द्वारा उनकी स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त किए जाने के बाद उन्हें तत्काल IIT दिल्ली अस्पताल भेजा गया था।

    संस्थान ने बताया कि वहां उनका मनोचिकित्सक द्वारा आकलन किया गया और आवश्यक सहायता दी गई। इसके बाद परिवार ने उन्हें किसी विशेष अस्पताल में उपचार दिलाने की इच्छा जताई। IIT के मुताबिक, ऋषिकेश ने इसके बाद लगभग एक महीने तक एक विशेषज्ञ अस्पताल में उपचार लिया और फिर उन्हें छुट्टी दी गई।

    सेमेस्टर से हटने की अनुमति मिलने की बात

    IIT दिल्ली के अनुसार, उपचार के बाद ऋषिकेश ने जनवरी से मई 2026 वाले दूसरे सेमेस्टर से हटने का अनुरोध किया था, जिसे मंजूरी दी गई। संस्थान के मुताबिक, जुलाई में उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड की समीक्षा की गई और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर उन्हें अभिभावकों की निगरानी में रहने की सलाह दी गई।

    संस्थान ने यह भी कहा कि जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान उन्हें काउंसलिंग तथा चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा जुलाई से नवंबर 2026 वाले तीसरे सेमेस्टर से हटने का उनका अनुरोध भी स्वीकार किया गया था।

    IIT दिल्ली की ओर से सामने आए इस विवरण और परिवार के आरोपों के बीच कई सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। खासतौर पर यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि छात्र को उपलब्ध कराई गई मानसिक स्वास्थ्य सहायता कितनी प्रभावी थी और संस्थान तथा परिवार के बीच समन्वय किस स्तर पर था।

    हॉस्टल को लेकर भी सामने आया विवाद

    ऋषिकेश के भाई ने बताया कि हॉस्टल में रहने की उनकी इच्छा पूरी नहीं होने से वह काफी परेशान थे। परिवार का दावा है कि छात्र का मानना था कि कैंपस के बाहर रहने से उनकी पढ़ाई और मानसिक स्थिति दोनों प्रभावित हो रही हैं।

    भाई के अनुसार, ऋषिकेश एक छोटे कमरे में संस्थान के बाहर रह रहे थे और वहां रहने की परिस्थितियों तथा खर्च को लेकर भी परेशान रहते थे। परिवार का कहना है कि ऋषिकेश अपनी मां को होने वाली परेशानी को लेकर भी चिंतित रहते थे।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल से संबंधित मामले को लेकर परिवार ने संस्थान के अधिकारियों से संपर्क किया था। परिवार के अनुसार, ऋषिकेश के लिए कैंपस में रहना केवल सुविधा का विषय नहीं था, बल्कि उनकी पढ़ाई और संस्थान से जुड़ाव का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

    इन आरोपों के बीच संस्थान की ओर से जांच समिति का गठन यह संकेत देता है कि पूरे मामले के विभिन्न पहलुओं की स्वतंत्र समीक्षा की जा रही है।

    परिवार ने प्रशासनिक सहयोग पर उठाए सवाल

    ऋषिकेश के भाई ने संस्थान के प्रशासनिक रवैये को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि परिवार को कई स्तरों पर प्रक्रिया और चिकित्सकीय मंजूरी से गुजरना पड़ा और इससे पहले से परेशान छात्र पर दबाव बढ़ा।

    परिवार ने यह भी कहा कि ऋषिकेश को अपने शोध प्रोजेक्ट को लेकर अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की शिकायत थी। उनके भाई के मुताबिक, दूसरे छात्रों को प्रोजेक्ट के लिए समूह मिल गए थे, जबकि ऋषिकेश को अकेले काम करना पड़ा।

    हालांकि, इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में जांच समिति की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उसी के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि संस्थान की प्रक्रियाओं में कहीं कमी थी या नहीं और यदि थी तो उसका स्वरूप क्या था।

    छात्रों के प्रदर्शन से बढ़ा दबाव

    ऋषिकेश की मौत के बाद IIT दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन की खबरें भी सामने आई हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने संस्थान में छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित व्यापक समस्याओं का मुद्दा उठाया है। छात्रों का दावा है कि पिछले करीब 30 महीनों में संस्थान में कई छात्रों की मौतें हुई हैं और इसके पीछे कथित तौर पर व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल हैं।

    ऐसे दावों की भी आधिकारिक जांच और आंकड़ों के आधार पर पुष्टि आवश्यक है। फिर भी, घटना ने उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, अकादमिक दबाव, आवासीय व्यवस्था और संस्थान-परिवार के बीच संवाद जैसे मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    मानसिक स्वास्थ्य सहायता की जरूरत पर जोर

    ऋषिकेश कुमार की मौत ने यह सवाल भी सामने रखा है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता केवल काउंसलिंग उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। छात्रों की व्यक्तिगत परिस्थितियों, अकादमिक दबाव, सामाजिक अलगाव, आर्थिक चिंता और परिवार से दूरी जैसे पहलुओं को भी समझना जरूरी है।

    विशेष रूप से तब, जब कोई छात्र लगातार तनाव या भावनात्मक संकट के संकेत दे रहा हो, संस्थान, परिवार और विशेषज्ञों के बीच प्रभावी संवाद महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे मामलों में समय पर सहायता और निरंतर निगरानी कई बार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    IIT दिल्ली ने अपनी ओर से यह स्पष्ट किया है कि ऋषिकेश को संस्थान के स्तर पर उपचार और काउंसलिंग सहायता दी गई थी। दूसरी ओर, परिवार ने संस्थान की प्रक्रियाओं और सहयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। दोनों पक्षों के दावों के बीच सच्चाई सामने लाने की जिम्मेदारी अब जांच प्रक्रिया पर है।

    ऋषिकेश की मां ने अपने बेटे को एक प्रतिभाशाली और मिलनसार युवक के रूप में याद किया। परिवार के मुताबिक, वह गीत गाने और कविता लिखने में रुचि रखते थे तथा काव्य आयोजनों में भी हिस्सा लेते थे। परिवार इस समय शोक में है और उसने संस्थान से किसी विशेष मांग की बात नहीं कही है।

    इस घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में सफलता और अकादमिक उपलब्धियों के साथ विद्यार्थियों की भावनात्मक सुरक्षा को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। जांच समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ऋषिकेश की स्थिति के दौरान संस्थान की व्यवस्था किस तरह काम कर रही थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन सुधारों की आवश्यकता है।

    मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी महसूस करने वाले व्यक्ति या उनके परिवार को तत्काल किसी योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, स्थानीय स्वास्थ्य सेवा या विश्वसनीय हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए। ऐसे संकट में व्यक्ति को अकेला न छोड़ना और तत्काल पेशेवर सहायता लेना महत्वपूर्ण है।

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