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    बहुविषयक अनुसंधान एवं नवाचार से होगा भारत का रूपांतरण

    1 hour ago

    कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर एवं इंस्पिरा रिसर्च एसोसिएशन (आईआरए), जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में ‘‘ट्रान्सफाॅर्मिंग इंडिया थ्रू मल्टीडिसप्लनेरी रिसर्च इनोवेशनस् (ICTIMRI Hybrid-2026) अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आज दिनांक 24 अगस्त 2026 कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर में शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में महाविद्यालय प्राचार्य एवं आयोजन संयोजक डॉ. सीमा अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि सम्मेलन विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर विचारों के आदान-प्रदान, ज्ञान-विस्तार तथा शैक्षणिक सहयोग के नए अवसर प्रदान करता है। उन्होंने शोध, ज्ञान और नवाचार के संबंध को रेखांकित किया। इंस्पिरा के महासचिव एवं सह-संयोजक डॉ. रविकांत मोदी ने भी सभी का स्वागत किया और कहा कि ऐसे सम्मेलन अकादमिक संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं साथ ही उन्होंने दो दिवसीय आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलगुरु प्रो. एन. के. पांडेय ने शिक्षा, संचार, ज्ञान और सामाजिक परिवर्तन के बीच संबंध पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने तेजी से बदलती दुनिया के अनुरूप उच्च शिक्षा एवं अंतर्विषयक संवाद की महत्ता को रेखांकित कर भारत की समृद्ध शैक्षणिक एवं बौद्धिक विरासत का उल्लेख करते हुए नालंदा जैसे प्राचीन ज्ञान केंद्रों से लेकर आधुनिक संस्थानों तक भारतीय शिक्षा की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। साथ ही कहा कि भारत की युवा पीढ़ी यदि विकास को ध्यान में रखकर काम करती रहेगी तो 2047 के लक्ष्य को आसानी से पाया जा सकता है।

    सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि, सीए अनिल अग्रवाल, प्रबंध निदेशक, NAV India ने कहा कि परिवर्तन की शुरुआत सार्थक प्रश्न पूछने से होती है। उन्होंने भारत की चुनौतियों के बारे मेें गंभीरता से सोचने और इनोवेटिव समाधान खोजने के लिये प्रोत्साहित किया। जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के कुलगुरु प्रो. पवन कुमार शर्मा ने समग्र एवं संतुलित विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कृषि, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, स्वास्थ्य तथा तकनीकी बदलाव जैसी जटिल चुनौतियों के समाधान के लिए बहुविषयक दृष्टिकोण को आवश्यक बताया और कौशल-आधारित एवं अनुभव पर आधारित शिक्षा तथा वैज्ञानिक ज्ञान को भारतीय ज्ञान से जोड़ने की बात की। अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल एवं एमडीएस विश्वविद्यालय, अजमेर के पूर्व कुलपति प्रो. एम. एल. छीपा ने भारतीय मूल्यों, बहुविषयक शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय के “आत्म दीपो भव” की अवधारणा का उल्लेख करते हुए उन्होंने आत्मनिर्भरता, व्यक्तिगत विकास एवं समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि कुशल, उद्यमशील, नैतिक एवं पर्यावरण के प्रति जागरूक नागरिक तैयार करना भी होना चाहिए। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान, शोध एवं नवाचार से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता यूएसए से डॉ. फिरदौस अहमद मलिक, ने कहा कि भारत का वास्तविक परिवर्तन किसी एक अनुशासन से नहीं बल्कि सभी विषयों के अंतर्संबंध से होगा। उद्घाटन सत्र में डॉ. वरिंदर सिंह राणा, सिटी यूनिवर्सिटी अजमान, प्रो. नादा राटकोविच, फैकल्टी ऑफ इकोनॉमिक्स, बिजनेस एंड टूरिज्म, स्प्लिट, क्रोएशिया तथा डॉ. वैशाली रघुवंशी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से आॅनलाइन जुड़े। आज डिजिटल ट्रान्सफाॅर्मिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इमर्जिंग टेक्नोलाॅजी एवं बिजनेस मैनेजमेंट, इकोनामिक्स और सस्टैनबल डबलमेंट विषयों पर दो तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। जिनमें देश विदेश के विषय

    विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रकट किये और लगभग 60 शोधार्थी एवं विशेषज्ञों ने आॅनलाइन एवं आॅफलाइन शोध पत्र प्रस्तुत किये। कल 25 अगस्त को समापन समारोह में मुख्य अतिथि प्रो. सुरेश अग्रवाल, कुलगुरु, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर होंगे। विशेष अतिथियों में प्रो. एच.एस. शर्मा, पूर्व प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, भूगोल विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर तथा डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, निदेशक, कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर रहेंगे। कल विभिन्न तकनीकी सत्रों के उत्कृष्ट शोध-पत्रों के लिए बेस्ट पेपर अवॉर्ड भी दिए जाएंगे।

     

     

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