Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    आशुकवि पं. रामस्वरूप दोतोलिया, बिलोंची नई दिल्ली में संस्कृत कविव्रती सम्मान से सम्मानित

    59 minutes ago

    जयपुर। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में आयोजित संस्कृत सप्ताहोत्सव-2026 का भव्य समापन समारोह मंगलवार को हुआ। समारोह में पेजावर मठ के पूज्य श्री श्री विश्वप्रसन्नतीर्थ स्वामी जी आशीर्वाद प्रदाता के रूप में उपस्थित रहे। संस्कृतभारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष आचार्य रमेशकुमार पाण्डेय मुख्य अतिथि रहे, जबकि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी एवं छात्र कल्याण अधिष्ठात्री प्रो. लीना सक्करवाल भी उपस्थित रहीं।

    पेजावर मठ के पूज्य श्री श्री विश्वप्रसन्नतीर्थ स्वामी जी ने आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना और ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ के सिद्धांत के साथ संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करना होगा। संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान, संस्कृति और परंपरा को जोड़ने वाला सशक्त माध्यम है।

    संस्कृत देश की सांस्कृतिक एकता का सूत्र प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी

     

    कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर दीक्षा सूत्र एवं रक्षा सूत्र की परंपरा भारतीय संस्कृति में एकता और संरक्षण की भावना को अभिव्यक्त करती है। इसी भावना को व्यापक रूप देते हुए संस्कृत रक्षा-सूत्र देश की अखंडता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के सभी प्रांतों में संस्कृत का स्वरूप और प्रभाव विद्यमान है। देश के विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति, परंपराओं और ज्ञान-परंपराओं में संस्कृत की गहरी जड़ें हैं। संस्कृतनिष्ठ संस्कृति भारत के प्रत्येक क्षेत्र में किसी न किसी रूप में उपलब्ध है और संस्कृत देश की विविधता को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करती है। उन्होंने संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सरकार से और अधिक प्रभावी एवं ठोस पहल करने का आग्रह किया।

    आशुकवि पं. रामस्वरूप दोतोलिया को मिला कविव्रती सम्मान

    समारोह में जयपुर के बिलोंची निवासी संस्कृत के मूर्धन्य विद्वान एवं आशुकवि पं. रामस्वरूप दोतोलिया को संस्कृत साहित्य एवं आशुकाव्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘संस्कृत कविव्रती सम्मान’ से सम्मानित किया गया। उन्हें सम्मानस्वरूप 21 हजार रुपये, शाल, श्रीफल, स्मृति चिह्न एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया।

    आशुकवि पं. रामस्वरूप दोतोलिया संस्कृत साहित्य, मौलिक लेखन एवं आशुकाव्य के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान रखते हैं। संस्कृत भाषा और साहित्य के प्रति उनकी दीर्घकालीन साधना एवं योगदान के लिए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। पं. दोतोलिया के स्थान पर उनके ज्येष्ठ पुत्र डॉ. सीताराम दोतोलिया, पूर्व प्राचार्य, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय, कालाडेरा, जयपुर ने सम्मान ग्रहण किया। संस्कृत सप्ताहोत्सव के समापन समारोह में देशभर से आए विद्वानों, संस्कृतप्रेमियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।

     

    Click here to Read More
    Previous Article
    धोबी समाज ने भाजपा एवं कांग्रेस को दिया ज्ञापन
    Next Article
    कोटा गए दोस्तों के नोट्स से पढ़ा, फिर कोटा कोचिंग के लिए आलू बेचे, अब बरेली का अल्ताफ बनेगा डाॅक्टर

    Related शिक्षा Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment