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    कोटा गए दोस्तों के नोट्स से पढ़ा, फिर कोटा कोचिंग के लिए आलू बेचे, अब बरेली का अल्ताफ बनेगा डाॅक्टर

    1 hour ago

    - बरेली के नवाबगंज ने आठवें प्रयास में नीट-2026 में हासिल किए 563 अंक

    - भाई के दुर्घटना में घायल होने के बाद डाॅक्टर बनने की जिद पकड़ी

    उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की नवाबगंज तहसील से जिद कर सफलता प्राप्त करने की प्रेरक कहानी सामने आई है। निर्धन परिवार की ऐसी प्रतिभा जिसके पास पैसे नहीं थे तो कोटा पढ़कर सफल होने वाले दोस्तों से नोट्स लेकर तैयारी की, किनारे पर अटका तो कोटा में जाकर कोचिंग करने का मन बनाया, इसके लिए पिता के साथ आलू बैचे और पैसे जुटाए। कोटा मेंएलन कॅरियर इंस्टीट्यूट में एक साल पढ़ने के बाद अल्ताफ ने सफलता प्राप्त की। 2019 से 2026 तक 8 साल नीट की परीक्षा दी। आठवीं कोशिश में एलन कोटा स्टूडेंट अल्ताफ ने इस वर्ष 563 अंक प्राप्त किए हैं।

    सफलता पर अल्ताफ का कहना है कि यदि हम ठान लें तो सब संभव है। कोटा में मुझे वो मिला जो पिछले सात साल से नहीं सीख पाया था, शायद पहले आ जाता तो सलेक्शन भी हो चुका होता। मैंने लगातार प्रयास किए लेकिन कोचिंग की कमी थी जो कोटा आकर पूरी हुई। अब मेरे साथ मेरे परिवार का भी सपना पूरा हुआ है। फैकल्टीज और दोस्तों को शुक्रिया कहना चाहता हूं जिन्होंने पूरा साथ दिया। किसी ने नोट्स दिए तो किसी ने गाइडेंस दी और मैं सफल हो सका।

    अल्ताफ के पिता इकबाल हुसैन का कहना है कि हमने कभी सोचा नहीं था कि अल्ताफ डाॅक्टर बनेगा। आलू बेचकर परिवार चलाते हैं। कभी इतने बड़े सपने नहीं थे, अल्ताफ ने कोशिश की, हम जितना सहयोग कर सके किया। मुझे भी लगा कि कोटा पहले चला जाता तो यह परिणाम पिछले वर्षों में आ सकता था।

    इस संबंध में एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के फाउंडर नवीन माहेश्वरी ने कहा कि अल्ताफ की सफलता दूसरे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है। कोटा ऐसी सफलताओं से भरा हुआ है, इसीलिए यहां आकर विद्यार्थी स्वयं का श्रेष्ठ देने के लिए तैयार होता है और उसके रिजल्ट्स कुछ अलग और बेहतर होते हैं।

    2019 में दी थी पहली परीक्षा

    अल्ताफ ने एलन से तैयारी करते हुए नीट यूजी 2026 में 563 अंक प्राप्त किए। ऑल इंडिया रैंक 27910 और ओबीसी कैटेगरी में 13437वीं रैंक है। अलताफ ने पहली बार वर्ष 2019 में नीट का एग्जाम दिया था। उस समय उसे 323 अंक मिले थे। इसके बाद उसनेे लगातार अपनी तैयारी जारी रखी, कस्बे के जो स्टूडेंट्स कोटा से पढ़कर जाते उनसे स्टडी मैटेरियल, नोट्स लेकर और आॅनलाइन लेक्चर देखकर पढ़ाई करता रहा। वर्ष 2022 में उसने 516 अंक हासिल किए, जबकि 2023 और 2024 में अंक बढ़कर 590 तक पहुंच गए। हालांकि, उस समय कटऑफ अधिक रहने से मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं मिल सका। 2025 में 501 अंक प्राप्त हुए। यूपी बोर्ड से 10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं में 85 प्रतिशत अंक हासिल किए।

    भाई के एक्सीडेंट से बदला मन

    अलताफ ने बताया कि 12वीं कक्षा पास करने के बाद मैंनेे पिता के साथ आलू की फड़ पर बैठना शुरू कर दिया था। बड़े भाई रात करीब दो बजे बरेली मंडी से आलू लाने जाते थे। एक दिन उनका एक्सीडेंट हो गया। इस घटना ने मेरे मन पर गहरा असर डाला। मैंने महसूस किया कि पूरी जिंदगी एक ही काम नहीं कर सकते और इसी सोच ने नीट की तैयारी के लिए प्रेरित किया। नवाबगंज कस्बे से हर वर्ष करीब 10-12 बच्चे नीट में सफलता हासिल कर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेते हैं। मैं उनको देखकर काफी मोटिवेट होता था।

    पारिवारिक स्थिति

    अलताफ के पिता इकबाल हुसैन अंसारी कस्बे में सड़क किनारे आलू की फड़ लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। मां कुबरां निरक्षर हैं, जबकि पिता ने नौवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की है। वर्ष 2015 तक परिवार कच्चे मकान में रहता था। इसके बाद दो कमरों का पक्का मकान बनाया, जिसमें परिवार के 12 सदस्य रहते थे। परिवार में एक बड़े भाई के अलावा आठ बहनें भी हैं सभी बहनों की शादी हो चुकी है। मां कुबरां निरक्षर हैं, जबकि पिता ने नौवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की है। वर्ष 2015 तक परिवार कच्चे मकान में रहता था। इसके बाद दो कमरों का पक्का मकान बनाया, जिसमें परिवार के 12 सदस्य रहते थे। परिवार में एक बड़े भाई के अलावा आठ बहनें भी हैं सभी बहनों की शादी हो चुकी है। इसकी वजह से पिता पैसा नहीं जोड़ सके। वर्ष 2023 में सबसे छोटी बहन की शादी हुई।

     

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