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    विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय “यूथ मेंटल हेल्थ फर्स्ट एड” प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

    39 minutes ago

    मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता एवं सहायता की भावना विकसित करने पर दिया गया जोर

    जयपुर। University of Technology, जयपुर के विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास विज्ञान विभाग द्वारा विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता प्रदान करने की क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से 17 से 19 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय “यूथ मेंटल हेल्थ फर्स्ट एड” प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से चयनित 25 विद्यार्थियों ने सहभागिता की।

    कार्यक्रम का समन्वय विशेष शिक्षा विभाग की अधिष्ठाता डॉ. वंदना सिंह ठाकुर द्वारा किया गया, जबकि सीमा चौधरी एवं धीरज कुमार नागर सह-समन्वयक रहे। प्रशिक्षण के लिए आदित्य बिरला एजुकेशन ट्रस्ट, मुंबई से तुर्शल वेडवॉकर को प्रशिक्षिका के रूप में आमंत्रित किया गया।

    कार्यक्रम के प्रथम दिवस का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं अतिथि सत्कार के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की अध्यक्ष डॉ. रश्मि जैन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए यूथ मेंटल हेल्थ फर्स्ट एड कार्यक्रम के उद्देश्य एवं आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को युवाओं के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए विद्यार्थियों को प्रशिक्षण से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

    इसके पश्चात विश्वविद्यालय के प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. अंकित गांधी ने मानसिक स्वास्थ्य एवं मानवीय संवेदनशीलता से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों के माध्यम से विद्यार्थियों को संबोधित किया। उनके संबोधन ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित परिस्थितियों को संवेदनशीलता एवं सहानुभूति के साथ समझने के लिए प्रेरित किया।

    कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत डॉ. वंदना सिंह ठाकुर, अधिष्ठाता, विशेष शिक्षा विभाग द्वारा उद्घोषणा के साथ हुई, जिसके पश्चात तीन दिवसीय प्रशिक्षण सत्र प्रारंभ हुआ।

    प्रशिक्षण के प्रथम दिवस 17 सितंबर 2026 को प्रशिक्षिका तुर्शल वेडवॉकर ने “अवसाद” विषय पर विस्तृत एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। विद्यार्थियों को अवसाद का अर्थ, उसके प्रमुख लक्षणों एवं पहचान के तरीकों तथा अवसाद से प्रभावित व्यक्ति को उचित सहयोग एवं सहायता प्रदान करने के महत्वपूर्ण तरीकों से अवगत कराया गया।

    प्रशिक्षण को प्रभावी एवं सहभागितापूर्ण बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों, वीडियो प्रस्तुतियों एवं वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरणों का प्रयोग किया गया। विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया।

    18 सितंबर 2026 को प्रशिक्षण के दूसरे दिवस “चिंता (एंग्जायटी)” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। प्रशिक्षिका द्वारा चिंता के विभिन्न स्वरूपों, इसके संकेतों तथा व्यक्ति के व्यवहार एवं दैनिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।

    इस दौरान विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ, उदाहरण एवं वीडियो प्रस्तुत किए गए। प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समय रहते पहचानना और संवेदनशीलता के साथ सहायता प्रदान करना कितना महत्वपूर्ण है।

    कार्यक्रम के अंतिम दिवस 19 सितंबर 2026 को मनोविकृति (साइकोसिस) एवं पदार्थ दुरुपयोग (सब्सटेंस मिसयूज़) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षिका ने इन विषयों से संबंधित आवश्यक जानकारी, संकेतों तथा ऐसे मामलों में व्यक्ति के प्रति अपनाए जाने वाले संवेदनशील एवं सहयोगात्मक दृष्टिकोण पर विस्तार से चर्चा की।

    तीन दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परिस्थितियों को समझने, पहचानने, उचित प्रतिक्रिया देने तथा आवश्यकता पड़ने पर व्यक्ति को सही सहायता एवं संसाधनों तक पहुँचाने की दिशा में व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक, उपयोगी एवं अनुभवात्मक रहा।

    कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों से फीडबैक फॉर्म भरवाए गए, ताकि प्रशिक्षण की उपयोगिता एवं विद्यार्थियों के अनुभवों का आकलन किया जा सके।

    समापन समारोह में आदित्य बिरला एजुकेशन ट्रस्ट, मुंबई से पधारीं प्रशिक्षिका तुर्शल वेडवॉकर को विश्वविद्यालय की ओर से विश्वविद्यालय का प्रतीक-चिह्न एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। उनके द्वारा विद्यार्थियों को अत्यंत सरल, व्यावहारिक एवं सहभागितापूर्ण तरीके से प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया गया।

     

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