Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम देता है 125 दिन की रोजगार गारंटी

    3 days ago

    जयपुर। भारत की आत्मा गांवों में वास करती है। गांवों का विकास भारत का विकास हैं। गांवों के बेरोजगार युवाओं को रोजगार प्रदान करना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रमुख प्राथमिकता है। उन्होने भारत की आधारभूत संरचना को मजबूत करने के साथ-साथ रोजगार देने के लिए मनरेगा का नया उन्नत रूप विकसित भारत-जी राम जी (वीबी-जी राम जी) विधेयक 2025, लागू किया है। यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों को 100 की जगह 125 दिन का गारंटीकृत रोजगार, टिकाऊ बुनियादी ढांचा, और 60 दिनों का 'नो-वर्क पीरियड' (खेती के व्यस्त सीजन के लिए) प्रदान करता है, जो 2047 तक ग्रामीण विकास को सुदृढ़ करेगा।

     

    अवसंरचना और ग्रामीण विकास—

    यह केवल मजदूरी नहीं, बल्कि जल संरक्षण, आजीविका, और बुनियादी ढांचे के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करता है।

     

    तकनीकी निगरानी—

    भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जीपीएस, एमआईएस डैशबोर्ड, और एआई आधारित निगरानी का उपयोग किया जाएगा।

    विकेंद्रीकृत योजनाः ग्राम पंचायत स्तर पर योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाएगा।

     

    समय पर मजदूरी भुगतान— 

    यह अधिनियम (धारा 5(3)) मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा किसी भी स्थिति में कार्य की समाप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर किए जाने को अनिवार्य करता है।

    यद्यपि निर्धारित अवधि से अधिक विलंब होने की स्थिति में अनुसूची-द्वितीय में उल्लेखित प्रावधानों के अनुसार विलंब के लिए मुआवजा देय होगा, जिससे मजदूरी सुरक्षा को सुदृढ़ता और श्रमिकों को विलंब से संरक्षण होगा।

     

    टिकाऊ एवं उपयोगी ग्रामीण अवसंरचना से जुड़ा रोजगारः

    इस अधिनियम के अंतर्गत मजदूरी रोजगार को चार प्राथमिक विषयगत क्षेत्रों में टिकाऊ सार्वजनिक परिसंपत्तियों के सृजन के साथ स्पष्ट रूप से जोड़ा गया है (धारा 4(2))

     

    प्रमुख उद्देश्य—

    यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों के लिए प्रति वित्तीय वर्ष मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी को 125 दिनों तक बढ़ाता है और सशक्तिकरण, समावेशी विकास, योजनाओं के अभिसरण (कन्वर्जेस) तथा परिपूर्ण (सेचुरेशन) तरीके से सेवादृप्रदाय को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है जिससे समृद्ध, सक्षम एवं आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की नींव मजबूत होती है।

     

    इससे पूर्व संसद ने विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 पारित किया था, जिसने भारत के ग्रामीण रोजगार और विकास ढांचे में एक निर्णायक सुधार का मार्ग प्रशस्त किया है।

     

    यह अधिनियम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (महात्मा गांधी नरेगा) को प्रतिस्थापित करते हुए आजीविका सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाला एक आधुनिक वैधानिक ढांचा प्रदान करता है।

      

    यह अधिनियम सशक्तिकरण, विकास, कन्वर्जेंस और परिपूर्णता (सेचूरेशन) के सिद्धांतों पर आधारित ग्रामीण रोजगार को केवल एक कल्याणकारी योजना से आगे बढ़ाकर विकास का एक एकीकृत माध्यम बनाता है।

     

    यह ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा को सुदृढ़ करता है, शासन और जवाबदेही को आधुनिक बनाता है तथा मजदूरी रोजगार को टिकाऊ व उत्पादक ग्रामीण परिसंपत्तियों के सृजन से जोड़ता है जिससे समृद्ध एवं सक्षम ग्रामीण भारत की नींव अधिक मजबूत होती है।

     

    अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ—

    रोजगार की वैधानिक गारंटी में वृद्धि—

    यह अधिनियम प्रत्येक वित्तीय वर्ष में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कम-से-कम 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान करता है, यद्यपि परिवार के वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक हों। (धारा 5(1))

     

    पूर्व में उपलब्ध 100 दिनों के रोजगार के अधिकार की तुलना में यह वृद्धि ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सुरक्षा प्रदान करती है, काम को पहले से अनुमानित करती है और उनकी आय को अधिक स्थिर बनाती है।

     

    कृषि एवं ग्रामीण श्रम के बीच संतुलित प्रावधान—

    यह अधिनियम बुवाई और कटाई के सीजन के दौरान कृषि से संबंधित गतिविधियों के लिए कृषि श्रम की उपलब्धता आसान करने के लिए राज्यों को एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिनों की समेकित विराम अवधि अधिसूचित करने का अधिकार प्रदान करता है। (धारा 6)

     

    श्रमिकों को मिलने वाले कुल 125 दिनों के रोजगार के अधिकार यथावत बने रहेंगे जिसे शेष अवधि में प्रदान किया जाएगा, जिससे कृषि उत्पादकता और श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के मध्य संतुलित समायोजन सुनिश्चित होता है।

     

    यह अधिनियम एक केन्द्रीय प्रायोजित योजना के रूप में लागू किया गया है, जिसे राज्यों द्वारा अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार अधिसूचित और क्रियान्वित किया जाएगा।

     

    इस अधिनियम के अंतर्गत व्यय-साझेदारी का पैटर्न—

    केंद्र और राज्यों के बीच 60:40, पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 तथा विधानसभारहित केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषण का है।

     

    निधि राज्यवार मानकीकृत आवंटनों के माध्यम से प्रदान की जाएगी जो नियमों में निर्दिष्ट वस्तुनिष्ठ मानकों पर आधारित होगी (धाराएँ 4(5) एवं 22(4)) जिससे पूर्वानुमेयता, वित्तीय अनुशासन व सुदृढ़ योजना निर्माण सुनिश्चित होगा।

     

    प्रशासनिक क्षमता की सुदृढ़ता—

    इस अधिनियम के अंतर्गत प्रशासनिक व्यय की अधिकतम सीमा को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया है।

    यह योजना विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप है, जिससे बेहतर मानव संसाधन की उपलब्धता, प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता तथा मैदानी स्तर पर सहायता सुदृढ़ करने के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार को राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ती है।

     

    Click here to Read More
    Previous Article
    मिलावट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई— 43 हजार लीटर घी किया सीज
    Next Article
    गेहूँ खरीद हेतु किसान रजिस्ट्रेशन पोर्टल' के माध्यम से किसान गेहूँ विक्रय हेतु 1 फ़रवरी से करवा सकेंगे ऑनलाइन पंजीकरण

    Related राजस्थान Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment