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    उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का प्रकोप, घना कोहरा लौटने से जनजीवन प्रभावित होने की आशंका

    3 months ago

    नई दिल्ली 

    उत्तर भारत एक बार फिर भीषण शीत लहर की चपेट में आने जा रहा है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार 7 जनवरी से उत्तर भारत के बड़े हिस्सों में ठंड की तीव्रता अचानक बढ़ने वाली है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में तापमान में तेज गिरावट, दिनभर ठंडे हालात और घने से बेहद घने कोहरे की स्थिति बनने की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ठंड दिसंबर 2019 और जनवरी 2024 की कड़ाके की सर्दी के बराबर या उससे भी अधिक प्रभावी हो सकती है।

    मंगलवार शाम तक ही उत्तर भारत के कई शहरों में तापमान एकल अंक में पहुंच गया था, जो इस बात का संकेत है कि आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। राजस्थान के चूरू में तापमान 8.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि पंजाब के पटियाला में पारा 9 डिग्री पर पहुंच गया। दिल्ली, रोहतक और कोटा में शाम 8:30 बजे ही तापमान 9.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो एक दिन पहले की तुलना में करीब 2.5 डिग्री कम है। चंडीगढ़, अमृतसर, अंबाला और हिसार जैसे शहरों में भी तापमान 10 डिग्री के आसपास रहा।

    8 से 15 जनवरी तक सबसे ज्यादा असर

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 8 जनवरी से 15 जनवरी के बीच ठंड अपने चरम पर हो सकती है। इस दौरान हरियाणा, पंजाब, उत्तर-पश्चिम राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में “कोल्ड डे” और “कोल्ड ब्लास्ट” जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। कोल्ड ब्लास्ट की स्थिति तब मानी जाती है जब दिन का अधिकतम तापमान भी एकल अंक में चला जाए, जिससे दिन में भी ठंड से राहत नहीं मिलती।

    मौसम जानकारों का कहना है कि दिन के तापमान सामान्य से 4 से 8 डिग्री सेल्सियस नीचे रह सकते हैं। इसका सीधा असर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों पर पड़ सकता है। अस्पतालों में सांस और हृदय संबंधी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका भी जताई जा रही है।

    घना कोहरा बनेगा बड़ी चुनौती

    ठंड के साथ-साथ उत्तर भारत में घना से बेहद घना कोहरा भी बड़ी समस्या बन सकता है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में सुबह और रात के समय दृश्यता बेहद कम रहने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में बरेली से लेकर बहराइच तक कोहरे की एक लंबी पट्टी बनने की आशंका है, जिसमें लखनऊ, अयोध्या, कानपुर नगर, कानपुर देहात और प्रयागराज जैसे बड़े शहर शामिल हैं।

    कई इलाकों में कोहरा सिर्फ सुबह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दिन के समय भी बना रह सकता है। इससे सड़क, रेल और हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। पहले ही रेल सेवाओं में देरी और उड़ानों के समय में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

    दिल्ली में सीजन का पहला कोल्ड डे

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ने इस मौसम का पहला “कोल्ड डे” दर्ज कर लिया है। मौसम विभाग के अनुसार पालम और लोधी रोड क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.5 डिग्री नीचे चला गया, जो कोल्ड डे घोषित करने की सीमा में आता है। मंगलवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 15.7 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 7.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पालम क्षेत्र में न्यूनतम तापमान और भी नीचे, 6.5 डिग्री तक पहुंच गया।

    दिल्ली में नमी का स्तर भी बेहद ऊंचा रहा। सुबह के समय आर्द्रता 100 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि शाम को यह 90 प्रतिशत से ऊपर बनी रही। मौसम विभाग ने बुधवार के लिए घने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है और आने वाले दिनों में ठंडे हालात बने रहने की चेतावनी दी है।

    ठंड के साथ बिगड़ती हवा की गुणवत्ता

    कड़ाके की ठंड और कोहरे के साथ दिल्ली की वायु गुणवत्ता भी और खराब हो गई है। 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 310 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। कई इलाकों में AQI 350 के पार चला गया, जिससे सांस संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ गया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार ठंड के मौसम में हवा की गति कम होने और नमी बढ़ने से प्रदूषक कण वातावरण में फंसे रहते हैं। आने वाले कुछ दिनों तक दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता में विशेष सुधार की संभावना कम ही है।

    देश के अन्य हिस्सों में मिला-जुला मौसम

    जहां उत्तर और मध्य भारत में कड़ाके की ठंड का असर देखने को मिलेगा, वहीं दक्षिण भारत और तटीय इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत अलग रहेगा। तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में बादल छाए रहने और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। 9 और 10 जनवरी के आसपास दक्षिणी राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

     

    मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि 7 जनवरी से शुरू हो रही यह ठंड उत्तर भारत के लिए एक लंबा और कठिन शीतकालीन दौर साबित हो सकती है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने, स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने और यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

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