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    अमेरिका–वेनेजुएला तेल समझौता: ट्रंप के दावे, सैन्य कार्रवाई और वैश्विक राजनीति का नया अध्याय

    3 months ago

    अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि वेनेजुएला की “अंतरिम सरकार” अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल “उच्च गुणवत्ता वाला” कच्चा तेल बाज़ार मूल्य पर उपलब्ध कराएगी। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब कुछ ही दिन पहले अमेरिका ने एक सैन्य अभियान के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेने का दावा किया है। इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति, ऊर्जा बाज़ार और लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में स्थिरता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच पर लिखे अपने संदेश में कहा कि यह तेल विशेष स्टोरेज जहाज़ों के ज़रिये सीधे अमेरिका के बंदरगाहों तक पहुँचाया जाएगा। ट्रंप के अनुसार, इस सौदे से मिलने वाली राशि पर अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में उनका नियंत्रण रहेगा और इसका उपयोग अमेरिका के साथ-साथ वेनेजुएला की जनता के हित में किया जाएगा। हालांकि, इस दावे को लेकर न तो वेनेजुएला की मौजूदा सत्ता संरचना की ओर से कोई औपचारिक पुष्टि हुई है और न ही इस “अंतरिम सरकार” की वैधता पर स्थिति स्पष्ट है।

    यह घोषणा उस सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद आई है, जिसमें अमेरिका ने दावा किया है कि उसने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर अमेरिका लाया है, जहां उन पर मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े आरोपों में मुकदमा चलाया जाएगा। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे देश की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है। वेनेजुएला के अधिकारियों के अनुसार, इस सैन्य अभियान में कम से कम 24 वेनेजुएलाई सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई है, जबकि दर्जनों अन्य नागरिक और जवान घायल हुए हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने वेनेजुएला के भीतर गुस्से और असंतोष को जन्म दिया है। राजधानी काराकास में कुछ दिनों तक सन्नाटा पसरा रहा, हालांकि बाद में सरकार समर्थक रैलियों और कार्यक्रमों के ज़रिये सत्ता प्रतिष्ठान ने अपनी ताक़त दिखाने की कोशिश की। वेनेजुएला के अटॉर्नी जनरल ने इस सैन्य कार्रवाई को “युद्ध अपराध” बताते हुए अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है।

    तेल सौदे के आर्थिक पहलू पर नज़र डालें तो मौजूदा वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 56 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रही है। इस हिसाब से 3 से 5 करोड़ बैरल तेल का यह सौदा करीब 2 से 3 अरब डॉलर तक का हो सकता है। हालांकि, अमेरिका की दैनिक तेल खपत लगभग 2 करोड़ बैरल है, ऐसे में यह आपूर्ति महज़ कुछ दिनों की ज़रूरत ही पूरी कर पाएगी। इसके बावजूद, यह सौदा प्रतीकात्मक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर अमेरिका के प्रभाव को दर्शाता है।

    दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को भी इस घटनाक्रम की पूरी जानकारी पहले से नहीं थी। खबरों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने अब शुक्रवार को व्हाइट हाउस में प्रमुख तेल कंपनियों—एक्सॉन, शेवरॉन और कोनोकोफिलिप्स—के अधिकारियों के साथ बैठक बुलाने का फैसला किया है। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका वेनेजुएला की तेल नीति को नए सिरे से गढ़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    राजनीतिक मोर्चे पर भी यह मुद्दा अमेरिका के भीतर विवाद का कारण बन गया है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस सैन्य कार्रवाई और तेल सौदे की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। वहीं ट्रंप ने विपक्ष पर आरोप लगाया है कि वे एक “सफल सैन्य अभियान” का श्रेय देने से इनकार कर रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि वेनेजुएला के मामले में दोनों दलों की सोच अलग हो सकती है, लेकिन मादुरो को सत्ता से हटाना लंबे समय से अमेरिकी नीति का हिस्सा रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटनाक्रम के प्रभाव दूरगामी हो सकते हैं। लैटिन अमेरिका के कई देशों ने अमेरिका की कार्रवाई को खतरनाक मिसाल बताया है। वहीं रूस, चीन और ईरान जैसे देशों की प्रतिक्रिया पर भी दुनिया की नज़र बनी हुई है, क्योंकि ये देश वेनेजुएला के पारंपरिक सहयोगी रहे हैं।

     

    कुल मिलाकर, अमेरिका–वेनेजुएला तेल सौदे और सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक राजनीति में एक नया अध्याय खोल दिया है। यह देखना अहम होगा कि क्या यह कदम वास्तव में वेनेजुएला की जनता के हित में साबित होता है या फिर यह संसाधनों पर नियंत्रण और भू-राजनीतिक वर्चस्व की एक और कोशिश बनकर रह जाता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और ज़मीनी हालात तय करेंगे कि यह घटनाक्रम इतिहास में किस रूप में दर्ज होता है।

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