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    चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी बरकरार, MCX पर स्थिर शुरुआत के बाद आगे क्या रहेगा रुख?

    3 months ago

    नई दिल्ली | युगचरण न्यूज़

    वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत औद्योगिक मांग के बीच चांदी की कीमतें लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। बुधवार, 7 जनवरी को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी ने सपाट शुरुआत की, लेकिन दिन के शुरुआती कारोबार में मामूली तेजी के साथ अपने रिकॉर्ड प्रदर्शन को बनाए रखा। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर मोड़ा है, जिससे चांदी को भी मजबूत समर्थन मिला है।

    MCX पर बुधवार सुबह चांदी की कीमत करीब ₹2,57,599 प्रति किलोग्राम के स्तर पर खुली। शुरुआती उतार-चढ़ाव के दौरान यह ₹2,57,001 प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक भी फिसली, लेकिन जल्द ही इसमें स्थिरता देखने को मिली। इससे एक दिन पहले, यानी मंगलवार को, चांदी ने MCX पर नया रिकॉर्ड बनाया था और इंट्रा-डे कारोबार में ₹2,59,322 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। हालांकि, मुनाफावसूली के चलते यह थोड़ी नीचे आकर ₹2,58,000 प्रति किलोग्राम के आसपास बंद हुई।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिल रहा मजबूत संकेत

    घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चांदी की कीमतों में मजबूती देखने को मिल रही है। COMEX पर बुधवार को चांदी ने गैप-अप ओपनिंग की और कुछ ही मिनटों में $82.54 प्रति औंस का नया सर्वकालिक उच्च स्तर छू लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी केवल सट्टेबाजी का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे मजबूत बुनियादी कारण मौजूद हैं।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार, मौजूदा समय में सोने और चांदी दोनों की कीमतों को संरचनात्मक मांग का सहारा मिल रहा है। केंद्रीय बैंकों की ओर से लगातार सोने की खरीद, वैश्विक अनिश्चितता और भविष्य में मौद्रिक नीति में ढील की उम्मीदों ने कीमती धातुओं को निवेशकों के पोर्टफोलियो में एक सुरक्षित विकल्प बनाए रखा है। चांदी को अतिरिक्त समर्थन इसके औद्योगिक उपयोग से मिल रहा है।

    औद्योगिक मांग बनी चांदी की मजबूती की बड़ी वजह

    चांदी अब केवल एक सुरक्षित निवेश विकल्प नहीं रह गई है, बल्कि यह कई उभरते उद्योगों के लिए एक अहम कच्चा माल बन चुकी है। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापक इलेक्ट्रिफिकेशन जैसे क्षेत्रों में चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है। इन सेक्टरों में बढ़ती जरूरतों के कारण आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की वैश्विक सप्लाई पहले से ही सीमित है और यदि लैटिन अमेरिकी देशों से आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा आती है, तो कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच जारी तनाव के कारण पेरू, मैक्सिको और अन्य देशों से धातुओं के निर्यात पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    आगे क्या रहेगा कीमतों का रुख?

    कमोडिटी बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि, मौजूदा स्तरों पर कीमतों को मजबूत समर्थन मिल रहा है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, यदि MCX पर चांदी ₹2,45,000 प्रति किलोग्राम से ऊपर टिके रहने में सफल रहती है, तो इसमें ₹2,50,000 से ₹2,55,000 प्रति किलोग्राम के स्तर तक और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, गिरावट की स्थिति में ₹2,40,000 से ₹2,42,000 प्रति किलोग्राम का दायरा अहम सपोर्ट जोन माना जा रहा है।

    बीते वर्ष 2025 में चांदी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया और सालभर में लगभग 160 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की। हालांकि, साल के अंत में मुनाफावसूली और मार्जिन नियमों में बदलाव के कारण कीमतों में अस्थायी गिरावट भी देखने को मिली थी।

    निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?

    विशेषज्ञों और म्यूचुअल फंड विश्लेषकों की राय है कि मौजूदा ऊंचे स्तरों पर निवेशकों को सतर्कता बरतनी चाहिए। चांदी की कीमतों में तेजी के बावजूद इसकी प्रकृति बेहद अस्थिर मानी जाती है। ऐसे में एकमुश्त निवेश के बजाय एसआईपी या चरणबद्ध निवेश को अधिक सुरक्षित रणनीति माना जा रहा है।

     

    कुल मिलाकर, भू-राजनीतिक तनाव, औद्योगिक मांग और सीमित आपूर्ति के कारण चांदी की कीमतों में लंबी अवधि में मजबूती बनी रह सकती है। हालांकि, अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता। निवेशकों को बाजार के संकेतों पर नजर रखते हुए सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जा रही है।

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