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    दिल्ली के प्रदूषण से लड़ाई में सार्वजनिक परिवहन को बनाना होगा प्राथमि

    3 months ago

    हर साल सर्दियों के आते ही दिल्ली की हवा दमघोंटू हो जाती है और सरकारें तात्कालिक उपायों का सहारा लेने लगती हैं। ऑड-ईवन योजना, स्कूलों की छुट्टियाँ और निर्माण कार्य पर रोक जैसे कदम कुछ दिनों के लिए राहत ज़रूर देते हैं, लेकिन ये स्थायी समाधान नहीं हैं। असल समस्या दिल्ली की रोज़मर्रा की परिवहन व्यवस्था में छिपी है।

    दिल्ली में वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण निजी वाहनों की अत्यधिक संख्या है। जब बसें समय पर नहीं चलतीं या मेट्रो से जुड़ी अंतिम मील की सुविधाएँ कमजोर होती हैं, तो लोग मजबूरी में निजी वाहन अपनाते हैं। इससे न केवल सड़कों पर भीड़ बढ़ती है, बल्कि प्रदूषण भी गंभीर होता जाता है।

    मेट्रो ने शहर की आवाजाही को काफी हद तक आसान बनाया है, लेकिन अकेले मेट्रो दिल्ली की जरूरतें पूरी नहीं कर सकती। बसें आज भी लाखों लोगों के लिए सबसे सुलभ परिवहन साधन हैं। इसलिए सार्वजनिक बस सेवा को मजबूत करना समय की मांग है। नियमित समय-सारणी, साफ-सुथरी और पर्याप्त संख्या में चलने वाली बसें लोगों को निजी वाहनों से दूर कर सकती हैं।

    इसके साथ ही मेट्रो, बस, पैदल मार्ग और साइकिल ट्रैक को आपस में जोड़ने की जरूरत है। जब परिवहन व्यवस्था आपस में तालमेल के साथ काम करती है, तभी लोग सार्वजनिक साधनों को अपनाते हैं।

     

    दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए अल्पकालिक प्रतिबंधों से आगे बढ़कर सार्वजनिक परिवहन को शहरी जीवन की रीढ़ बनाना होगा। स्वच्छ हवा तभी संभव है, जब शहर की आवाजाही साझा, सुलभ और भरोसेमंद हो।

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