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    प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए मजदूरों, किसानों, महिलाओं और युवाओं ने अपने अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए एकजुटता दिखाई

    1 hour ago

     श्रम अधिकारों की रक्षा जरूरी तथा 365 दिन काम की हो गारंटी - प्रशांत भूषण

    भीम ( राजसमंद). अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर राजसमंद जिले के भीम स्थित पाटिया का चौड़ा में मजदूर किसान शक्ति संगठन का स्थापना दिवस एवं अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस बड़े उत्साह और व्यापक जनभागीदारी के साथ मनाया गया। इस मौके पर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए मजदूरों, किसानों, महिलाओं और युवाओं ने अपने अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए एकजुटता दिखाई।

     

     *भीम के बाजारों में निकाली तीन तरफ से रैली*

    भीम नगर में तीन अलग-अलग स्थानों से रैली की शुरुआत हुई, जिनमें भीम बस स्टैंड, बलाइयों का कूड़ा और बदनोर चौराहा शामिल थे। ये सभी रैलियां आगे बढ़ते हुए सूजाजी के चौक पर एकत्रित हुईं। वहां से संयुक्त रैली अस्पताल और डाक बंगला मार्ग से होती हुई पाटिया का चौड़ा पहुंची।

    रैली के दौरान राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन के कार्यकर्ताओं और सदस्यों ने न्यूनतम मजदूरी 800 रुपये किए जाने, मनरेगा को वापस लाने, तथा मजदूरों के अधिकारों की रक्षा जैसे मुद्दों पर जोरदार और जोशीले नारे लगाए।

    सुजाजी के चौक पर सभा हुई जिसे सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने संबोधित करते हुए कहा कि सभा को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने न्यूनतम मजदूरी को 800 रुपये प्रतिदिन करने, मनरेगा कानून को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने और रोजगार के कार्य दिवस बढ़ाने की मांग रखी।

    रैली के पाटिया पहुंचने के बाद मेला शुरू हुआ और सभा शुरू हुई जिसका संचालन महिलाओं के द्वारा किया गया। 

    इस अवसर पर अरुणा रॉय ने कहा कि "मजदूर दिवस संघर्ष की विरासत को आगे बढ़ाने का दिन है और मौजूदा समय में मजदूरों की एकजुटता पहले से कहीं अधिक जरूरी है।" उन्होंने संघर्ष के पूराने दिनों को याद किया और कहा कि संघर्ष को और तेज करने की जरूरत है। हरमाड़ा की पूर्व सरपंच और प्रसिद्ध श्रमिक अधिकार कार्यकर्ता नौरती बाई को उनके जीवन भर के कार्यों के लिए दुपट्टा ओढ़ाकर अरुणा रॉय ने सामनी किया। 

     उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि उन सभी मजदूर साथियों का है जो अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। हमें मिलकर इस लड़ाई को और आगे बढ़ाना है।"

    सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एवं मजदूरों की हमेशा पैरवी करने वाले प्रशांत भूषण ने कहा कि

    "श्रम अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए जनआंदोलनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।" उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को 365 दिन काम को गारंटी होनी चाहिए। 

    राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन के अध्यक्ष शंकर सिंह ने कहा कि "मजदूरों के अधिकारों पर हो रहे लगातार हमलों के खिलाफ अब निर्णायक संघर्ष की जरूरत है।" इसलिए अब हमें संघर्ष में उतरना होगा। 

    प्रसिद्ध मानवाधिका कार्यकर्ता एवं पीयूसीएल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने कहा कि"लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब समाज के सबसे कमजोर तबकों को न्याय और अधिकार मिलेंगे।" उन्होंने दुनिया के हो रहे युद्ध को तुरंत बंद किए जाने का भी आह्वान किया। 

    भारतीय महिला फेडरेशन की महासचिव निशा सिद्धू ने कहा कि "मजदूर महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई को मजबूत करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।" महिलाओं को ना केवल सम्मान की लड़ाई लड़नी है बल्कि अधिकारों को प्राप्त करने के साथ साथ बचाना भी है। 

    राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन के सचिव मुकेश निर्वासित ने कहा कि

    "हमें हर हाल में नरेगा को वापस लाना होगा और VB Gram जैसी केंद्र नियंत्रित योजनाओं को लाने से रोकना होगा। उन्होंने देशव्यापी आन्दोलन छेड़ने का आह्वान किया और ये लड़ाई दिल्ली तक लड़ने की बात कही। 

    मेले में पूर्व विधायक सुदर्शन सिंह रावत भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि "महात्मा गांधी नरेगा को समाप्त करना मगरा इलाके के लिए बहुत बड़ी क्षति है। नरेगा हमारे लिए जीवन-रेखा है और इसे हम वापस लाकर रहेंगे।"

    मजदूर किसान शक्ति संगठन से जुड़े लाल सिंह ने कहा कि आज हमें एकजुट होकर लड़ने की आवश्यकता है और हमें ये भी समझने की आवश्यकता है कि हमारी भलाई कौन चाहते हैं और कौन नहीं, इसीलिए अब मगरा क्षेत्र के लोगों के साथ पूरे देश के लोगों को समझना होगा कि हमें नरेगा बचाना है और संविधान के अनुसार देश के शासन को चलवाना है। 

     

     *महिलाओं की सक्रिय भागीदारी* 

    रैली और मेले में बड़ी संख्या में राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन से जुड़ी महिलाओं ने भाग लिया। विभिन्न ब्लॉकों से आई महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और मांग की कि हर हाल में मनरेगा को प्रभावी रूप से लागू किया जाए तथा VB Gram जैसी केंद्र नियंत्रित योजना को रद्द किया जाए। साथ ही उन्होंने बढ़ती महंगाई को देखते हुए न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि की मांग की।

     *सस्ते भाव की दुकानें लगी और दुकानों पर उम्दा हुजूम* 

    मेले में सस्ते भाव की जलेबी, पकौड़ी, राब, ककड़ी, टमाटर, कपड़े, गैंती, फावड़ा, खिलौने, आदि की सस्ते भाव की दुकानें लगी जिन पर बड़ी संख्या में लोगों ने खरीददारी की। 

     *मंच का संचालन* 

    कार्यक्रम का संचालन सफलतापूर्वक राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन की ओर से कनिका कुमारी, प्रेमलता और वनिता प्रजापत, मजदूर किसान शक्ति संगठन की ओर से लक्ष्मी चौहान, चतर सिंह और वर्षा खांडल, तथा संविधान केंद्र की ओर से निर्मला और कंकू चौहान द्वारा किया गया।

    देश के कई राज्यों और *राजस्थान के कई जिलों के लोगों ने मेले में लिया भाग* 

    देश के विभिन्न राज्यों से लोगों ने भागीदारी की जिनमें केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, गुजरात सहित कई राज्यों के लोगों ने हिस्सेदारी निभाई तथा राजस्थान के कई जिले जिनमें भीलवाड़ा, पाली, अजमेर, ब्यावर, राजसमंद, उदयपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, सिरोही, सीकर, जयपुर, डीग, आदि जिलों से भागीदारी की। 

     *निम्न प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए:* 

    1. न्यूनतम मजदूरी 800 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की जाए।

    2. VB Gram (वीबी ग्राम) व्यवस्था को रद्द किया जाए तथा मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।

    3. सामाजिक सुरक्षा पेंशन को न्यूनतम मजदूरी के आधे के बराबर किया जाए।

    4. सूचना का अधिकार अधिनियम में किए गए संशोधनों को वापस लिया जाए और पारदर्शिता को मजबूत किया जाए।

    5. स्वास्थ्य का अधिकार कानून के नियम राजस्थान में शीघ्र बनाए जाकर प्रभावी रूप से लागू किए जाएं।

    6. न्यूनतम आय गारंटी कानून के नियम राजस्थान में बनाए जाएं और लागू किए जाएं।

    कार्यक्रम में न्यूनतम मजदूरी, मनरेगा, शहरी रोजगार गारंटी, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। अंत में सभी साथियों ने “न्याय, समानता और बंधुता” पर आधारित समाज के निर्माण का संकल्प लिया और संगठित संघर्ष को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

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