Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पर जागरूकता कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में विविध गतिविधियों का आयोजन

    1 day ago

     जयपुर।

    केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023” विषय पर ऑनलाइन ऑफलाइन बेबीनार और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन हुया । कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ तथा मुख्य अतिथि के रूप में हिमाचल नेशनल विधि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह अधिनियम केवल एक विधिक प्रावधान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय एवं समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को नीति-निर्धारण संस्थाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना आवश्यक है, जिससे लोकतंत्र और अधिक सशक्त बन सके। विशिष्ट अतिथि प्रो. लीना सक्करवाल छात्र कल्याण अधिष्ठात्री केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली ने महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि समावेशी एवं एकीकृत शिक्षा के माध्यम से ही महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रभारी निदेशक प्रो. श्रीधर मिश्र ने विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की निरंतर प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के समग्र विकास के लिए पुरुष और महिला दोनों का समान योगदान आवश्यक है। कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न शैक्षणिक एवं रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनमें ऑनलाइन पत्र वाचन, पोस्टर प्रतियोगिता तथा ऑफलाइन छात्र परिचर्चा प्रमुख रहे। ऑनलाइन पत्र वाचन में 70 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लेकर नारी सशक्तिकरण, राजनीतिक सहभागिता तथा समान अधिकारों जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। पोस्टर प्रतियोगिता में 16 विद्यार्थियों ने भाग लेकर “नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023” के उद्देश्यों को रचनात्मक एवं प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया। वहीं छात्र परिचर्चा कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने नारी प्रतिनिधित्व, राजनीतिक आरक्षण, सामाजिक बाधाओं एवं भविष्य की संभावनाओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा की, जिससे उनके संवाद कौशल एवं विश्लेषणात्मक सोच का विकास हुआ। समापन सत्र में समन्वयक डॉ. अमृता कौर द्वारा स्वागत भाषण प्रस्तुत किया गया तथा मुख्य वक्ता प्रो. सीमा सिंह ने अधिनियम की विस्तृत रूपरेखा एवं उसके कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डाला। सरस्वत अतिथि प्रो. रेखा कुमारी ने महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया।

    कार्यक्रम के अंत में संयोजिका प्रो. कृष्णा शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर सह-निदेशक प्रो. शीशराम ने अधिनियम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं वर्तमान स्वरूप पर अपने विचार साझा किए। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023” के प्रति व्यापक जागरूकता उत्पन्न हुई। साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि महिला सशक्तिकरण केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए सामाजिक सोच में सकारात्मक परिवर्तन भी आवश्यक है।

    Click here to Read More
    Previous Article
    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर को ‘राजस्थान में सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने वाला विश्वविद्यालय’ सम्मान
    Next Article
    12000 से अधिक की डीपीसी करने पर राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (प्रधानाचार्य) ने किया शिक्षा मंत्री का अभिनंदन

    Related राजस्थान Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment