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    राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के अवसर पर सतत पोषण शिक्षा सत्र का आयोजन

    30 minutes ago

     राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के अवसर पर कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के कम्युनिटी एंड एप्लाइड साइंस विभाग द्वारा सतत पोषण शिक्षा सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य छात्राओं में संतुलित आहार, प्रोटीन-ग्रहण तथा बाल्यावस्था पोषण एवं प्रारंभिक उद्दीपन के प्रति जागरूकता विकसित करना था। यह कार्यक्रम निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी एवं प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक आयोजित हुआ। विभागाध्यक्ष डॉ. ऋचा चतुर्वेदी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए विषय-पृष्ठभूमि प्रस्तुत की और छात्राओं को स्वस्थ जीवनशैली एवं पोषण को दैनिक जीवन में अपनाने हेतु प्रेरित किया। प्रथम सत्र में डॉ. स्वाति व्यास, सह-आचार्य, गृह विज्ञान विभाग, आई.आई.एस. (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) ने “प्रोटीन ऑन योर प्लेट क्या यह पर्याप्त है?” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने प्रोटीन के महत्व, स्रोतों एवं प्रचलित भ्रांतियों पर चर्चा करते हुए बताया कि शाकाहारी स्रोतों से भी प्रोटीन की आवश्यकता पूरी की जा सकती है। छात्राओं को कैलोरी के बजाय पोषण संतुलन पर ध्यान देने तथा थाली में छोटे बदलावों से उसे प्रोटीन-समृद्ध बनाने के व्यावहारिक सुझाव दिए गए। सरल, उदाहरण-आधारित प्रस्तुति सत्र को अत्यंत ज्ञानवर्धक बना गई। द्वितीय सत्र में प्रो. निमाली सिंह, पूर्व प्राचार्य, महारानी कॉलेज, जयपुर, ने “न्यूट्रीशन एण्ड अर्ली चाइल्डहुड स्टीम्यूलेशन फॉर डवलपमेंट” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बच्चे के जीवन के प्रथम 1000 दिनों के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि इस अवधि में उचित पोषण के साथ-साथ प्रारंभिक उद्दीपन बच्चे के समग्र विकास की महत्वपूर्ण आधारशिला है। सत्र में प्रारंभिक बाल विकास की अवधारणा, प्रारंभिक वर्षों में पोषण का महत्व, प्रारंभिक उद्दीपन, पोषण एवं उद्दीपन के अंतर्संबंध, माता-पिता एवं केयरगिवर की भूमिका तथा प्रसवोत्तर अवधि में माता एवं शिशु से जुड़े जोखिमों पर विस्तार से चर्चा की गई। विषय को सरल, संवेदनशील एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिससे छात्राओं को समग्र बाल विकास की अवधारणा को गहराई से समझने में सहायता मिली। कार्यक्रम में 100 छात्राओं एवं संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

     

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