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    राजस्थान विश्वविद्यालय में नए कुलगुरु का एक्शन मोड: युवा शिक्षक बने विभागाध्यक्ष, 13 साल पुरानी प्रशासनिक व्याख्या पर लगा विराम!

    1 hour ago

    CAS पदोन्नति प्रक्रिया शुरू कराने की पहल से शिक्षकों में उत्साह; पूर्व RUTA अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत की कार्यशैली का किया स्वागत

    राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने अपने शुरुआती कार्यकाल में शिक्षक हितों से जुड़े महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सांख्यिकी विभाग में सहायक आचार्य को विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपना युवा शिक्षकों को प्रशासनिक नेतृत्व का अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। राजस्थान विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (RUTA) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने कहा कि सहायक आचार्य को विभागाध्यक्ष बनाए जाने के लिए दस वर्ष की सेवा अनिवार्य मानने की प्रशासनिक व्याख्या लंबे समय से प्रचलित थी। संबंधित नियमों पर पुनर्विचार के बाद योग्य शिक्षक को जिम्मेदारी दिए जाने से प्रशासनिक व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव का संदेश गया है।

    एक महीने के भीतर पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने से जगी उम्मीद

    डॉ. संजय कुमार ने कहा कि कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने कार्यभार संभालने के शुरुआती दिनों में ही शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया (CAS) प्रारंभ कराने की दिशा में कदम उठाया है। लगभग 13 वर्षों से लंबित पदोन्नति संबंधी मामलों को आगे बढ़ाने की पहल से शिक्षकों में सकारात्मक संदेश गया है और उन्हें अपने करियर एवं सेवा संबंधी प्रकरणों के समाधान की नई उम्मीद मिली है।

    उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान, नियमों की पारदर्शी व्याख्या और प्रशासनिक निर्णयों में सकारात्मक दृष्टिकोण किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की शैक्षणिक प्रगति के लिए आवश्यक हैं।

    शिक्षक संवाद और विद्यार्थी संवाद की पहल का भी प्रस्ताव

    डॉ. संजय कुमार ने बताया कि उन्होंने कुलगुरु के समक्ष विश्वविद्यालय में नियमित कुलगुरु–शिक्षक संवाद तथा कुलगुरु–विद्यार्थी संवाद प्रारंभ करने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की समस्याओं, सुझावों और अपेक्षाओं को सीधे विश्वविद्यालय के सर्वोच्च प्रशासनिक स्तर तक पहुँचाना है।

    उनके अनुसार, कुलगुरु ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक सहमति व्यक्त की है तथा इस संबंध में शीघ्र निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। इन संवादों की शुरुआत होने से विश्वविद्यालय में संवाद, सहभागिता और जवाबदेह प्रशासन को बढ़ावा मिल सकता है।

    शिक्षक हितैषी पहल का स्वागत

    डॉ. संजय कुमार ने कहा कि कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने अपने शुरुआती कार्यकाल में जिस सकारात्मक दृष्टिकोण का परिचय दिया है, उससे विश्वविद्यालय के शिक्षकों में विश्वास और नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

    उन्होंने कहा, “विश्वविद्यालय की प्रगति के लिए आवश्यक है कि नियमों की व्याख्या पारदर्शी हो, योग्य शिक्षकों को जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिले और लंबे समय से लंबित सेवा संबंधी मामलों का समयबद्ध समाधान हो। कुलगुरु महोदय की इन पहलों से शिक्षकों को सकारात्मक संदेश मिला है। हमें उम्मीद है कि यह कार्यशैली आगे भी जारी रहेगी और राजस्थान विश्वविद्यालय शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ेगा।”

    डॉ. संजय कुमार ने शिक्षक हितों से जुड़े इन निर्णयों का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि कुलगुरु के नेतृत्व में विश्वविद्यालय में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान, प्रशासनिक पारदर्शिता और शैक्षणिक विकास को और गति मिलेगी।

     

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