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    UN में ट्रंप को खुली चुनौती, ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन बोले- हम घुटने नहीं टेकेंगे, बातचीत के लिए तैयार

    3 hours ago

    Yugcharan News / 24-09-2026

    ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे जवाब दिया। बुधवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए पेजेशकियन ने कहा कि ईरान अमेरिका के दबाव के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा, लेकिन वह कूटनीतिक बातचीत के लिए तैयार है। उनका यह बयान ट्रंप के उस बयान के एक दिन बाद आया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने समझौता नहीं होने की स्थिति में ईरान को “समाप्त” करने की धमकी दी थी।

    पेजेशकियन ने अपने भाषण में अमेरिका और इजरायल पर ईरान पर हमले करने का आरोप लगाया और कहा कि उनका देश केवल अपनी रक्षा कर रहा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मंच से यह भी कहा कि ईरान आतंकवादी नहीं है और उसके आम नागरिकों को हमलों का निशाना बनाया गया है। ईरानी राष्ट्रपति ने अपने भाषण के दौरान दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और युद्ध के शुरुआती दिनों में मारे गए ईरानी स्कूली बच्चों की तस्वीरें भी प्रदर्शित कीं।

    ट्रंप की धमकी के बाद पेजेशकियन का जवाब

    ईरानी राष्ट्रपति का संयुक्त राष्ट्र संबोधन ऐसे समय हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य और राजनयिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। ट्रंप ने 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान ईरान के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा था कि यदि शांति समझौता नहीं होता तो अमेरिका ईरान को “annihilate” कर सकता है। ट्रंप ने साथ ही ईरान पर परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने को अमेरिकी नीति का एक प्रमुख उद्देश्य बताया था।

    इसके अगले दिन पेजेशकियन ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति के रुख का जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान दबाव या बल प्रयोग की भाषा स्वीकार नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने बातचीत के रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं किया। ईरानी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि उनका देश ऐसी कूटनीति के लिए तैयार है जिसमें किसी पक्ष पर बलपूर्वक शर्तें नहीं थोपी जाएं। संयुक्त राष्ट्र ने भी उनके संबोधन को ट्रंप के दबाव के सामने झुकने से इनकार करने और बातचीत के लिए दरवाजा खुला रखने वाले रुख के रूप में रिपोर्ट किया है।

    पेजेशकियन ने अमेरिका और इजरायल पर लगाए हमले के आरोप

    अपने भाषण में पेजेशकियन ने युद्ध की जिम्मेदारी ईरान पर डाले जाने को खारिज किया। उन्होंने कहा कि ईरान ने केवल हमलों का जवाब दिया है। उनके अनुसार, ईरानी नागरिकों को हमलों में निशाना बनाया गया और देश को अपनी रक्षा के लिए जवाब देना पड़ा।

    पेजेशकियन ने अपने भाषण में ईरानी नागरिकों के नुकसान का उल्लेख करते हुए कई तस्वीरें भी दिखाईं। इनमें दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीर और उन ईरानी स्कूली बच्चों की तस्वीरें शामिल थीं, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि वे युद्ध के शुरुआती दिनों में मारे गए।

    ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान उनके देश की उस आधिकारिक स्थिति के अनुरूप था जिसमें तेहरान युद्ध की शुरुआत के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराता है। दूसरी ओर, अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई को ईरान की परमाणु क्षमता और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े अपने दावों के संदर्भ में उचित ठहराता रहा है। इसलिए दोनों देशों के नेताओं के बयानों में संघर्ष की शुरुआत और उसके औचित्य को लेकर स्पष्ट मतभेद दिखाई दे रहे हैं।

    बातचीत का रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं

    सैन्य टकराव के बावजूद ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संपर्क की संभावनाएं बनी हुई हैं। Reuters ने 23 सितंबर को एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया कि दोनों देश युद्ध खत्म करने के तरीके को लेकर अभी भी काफी दूर हैं, लेकिन बातचीत जारी रहनी चाहिए।

    इससे पहले ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने से जुड़ा प्रस्ताव भी सामने आया था। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के अनुसार, यदि अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए नौसैनिक नाकाबंदी जैसे कदमों को हटाता है, तो ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए तैयार हो सकता है। ईरान ने यह भी संकेत दिया था कि संयुक्त राष्ट्र महासभा का मौजूदा सत्र बातचीत के लिए एक अवसर बन सकता है।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ऐसे में इसके आसपास सैन्य तनाव और संभावित अवरोध का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और तेल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

    ट्रंप और पेजेशकियन के बीच सीधे संपर्क पर नजर

    संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 22 सितंबर को कहा था कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के लिए तैयार है, हालांकि उस समय कोई बैठक तय नहीं हुई थी। अमेरिकी पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया था कि बातचीत का एक प्रमुख उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना होगा।

    दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि बातचीत तभी आगे बढ़ सकती है जब अमेरिका सैन्य और आर्थिक दबाव कम करने के लिए ठोस कदम उठाए। दोनों पक्षों की शर्तों में अंतर के कारण किसी तत्काल समझौते की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

    ईरान के लिए होर्मुज और युद्ध समाप्ति अहम मुद्दे

    ईरान की ओर से हाल के दिनों में दिए गए बयानों में युद्ध समाप्त करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे हैं। तेहरान ने संकेत दिया है कि वह संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत कर सकता है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी सैन्य दबाव और आर्थिक प्रतिबंधों में बदलाव की मांग कर रहा है।

    अमेरिका की ओर से दूसरी प्राथमिकता ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। वाशिंगटन लगातार यह कहता रहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यही मुद्दा दोनों देशों के बीच किसी संभावित समझौते की बातचीत में सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक बना हुआ है।

    संयुक्त राष्ट्र महासभा बना अमेरिका-ईरान टकराव का प्रमुख मंच

    संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र 22 सितंबर से शुरू हुआ है और सामान्य बहस 22 से 26 सितंबर तथा 28 सितंबर तक निर्धारित है। न्यूयॉर्क में चल रहे इस उच्चस्तरीय सत्र में दुनिया के विभिन्न देशों के नेता अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, युद्ध, कूटनीति और वैश्विक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रख रहे हैं।

    इसी मंच पर ट्रंप और पेजेशकियन के बयानों ने अमेरिका-ईरान संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में ला दिया है। एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर दबाव बढ़ाने की चेतावनी दी है, वहीं ईरानी राष्ट्रपति ने आत्मसमर्पण से इनकार करते हुए बातचीत की संभावना बनाए रखने की बात कही है।

    फिलहाल दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर मतभेद बने हुए हैं। कूटनीतिक संपर्क की संभावनाएं जरूर बनी हुई हैं, लेकिन बातचीत की शर्तों और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर दोनों पक्षों के रुख में काफी अंतर है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान होने वाली आगे की कूटनीतिक गतिविधियों और दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच संभावित बातचीत पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।

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