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    जीवन में पंच-सूत्रों का पालन करें नागरिक, राष्ट्र निर्माण ही शिक्षा का मुख्य उद्देश्य: विक्रांत खंडेलवाल

    1 hour ago

    -शिक्षण संस्थाओं में व्याख्यानमाला आयोजित करने का आह्वान

    -एस. एस. जी. पारीक पी.जी. कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन, जयपुर में ‘आरोहण’ समारोह, पत्रिका ‘पीयूष’ का विमोचन, पुरस्कार वितरण एवं ‘डांडिया धूम’ का भव्य आयोजन

    -नवागंतुक विद्यार्थियों का हुआ स्वागत

    जयपुर। भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री विक्रांत खंडेलवाल ने समाज, शिक्षा और नागरिक कर्तव्यों को लेकर विचार व्यक्त करते कहा कि चाहे वह सामाजिकता का विषय हो, कुटुंबिता का विषय हो, शिक्षा का विषय हो, पर्यावरण की चुनौतियां हों या फिर नागरिकों के कर्तव्य—इन सभी क्षेत्रों में हर व्यक्ति को अपने जीवन में मुख्य पंच-सूत्रों का ध्यान रखना होगा।

    वे शनिवार एस. एस. जी. पारीक पी.जी. कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन, जयपुर में नवागंतुक विद्यार्थियों के स्वागतार्थ ‘आरोहण ’, पुरस्कार वितरण कार्यक्रम, महाविद्यालय की पत्रिका ‘पीयूष’ का विमोचन तथा डांडिया महोत्सव ‘डांडिया धूम’ को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे.

    समारोह में शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और प्रतिभा का अनूठा संगम देखने को मिला। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक शिक्षण संस्था को अनिवार्य रूप से प्रति माह एक व्याख्यानमाला आयोजित करनी चाहिए। इसमें ऐसे व्यक्तियों को संबोधन के लिए बुलाया जाना चाहिए, जिन्होंने अपने सीमित साधनों के बावजूद समाज सेवा के क्षेत्र में ठोस उदाहरण पेश किए हों। इससे विद्यार्थियों को प्रेरणा मिलेगी और वे राष्ट्रहित में काम करने के लिए उत्साहित होंगे।

     

    शिक्षक का उद्देश्य केवल जीविकोपार्जन नहीं, राष्ट्र निर्माण है

     

    विक्रांत खंडेलवाल ने विद्यार्थियों व शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षण और प्रशिक्षण की उपाधि का उद्देश्य यदि केवल जीविकोपार्जन (आजीविका कमाना) है, तो लक्ष्य अधूरा रह जाता है। शिक्षक का वास्तविक उद्देश्य राष्ट्र निर्माण के लिए सुयोग्य और संस्कारवान पौध (भावी पीढ़ी) तैयार करना होना चाहिए।

    अति विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान सरकार के राज्यपाल के ओएसडी डॉ. कुलदीप मिश्रा ने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन, सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण चरण है। इस दौरान अर्जित ज्ञान, नैतिक मूल्य और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना ही भविष्य में एक योग्य नागरिक एवं संवेदनशील शिक्षक बनने का आधार तैयार करती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने और समाजहित में उसका उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। विशिष्ट अतिथि मुख्यमंत्री राज्य सरकार के ओएसडी गोविंद पारीक ने शिक्षा को व्यक्ति एवं समाज के विकास का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में निरंतर सीखने, सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने तथा अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के भविष्य का निर्माण करते हैं, इसलिए भावी शिक्षकों में ज्ञान के साथ संवेदनशीलता, नैतिकता, कर्तव्यनिष्ठा और नेतृत्व क्षमता का होना अत्यंत आवश्यक है।

    इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं सम्मान के साथ किया गया।

     

    मानवीय मूल्यों को भी जीवन में प्राथमिकता दे

     

    एसएससी पारीक कॉलेज एवं शब्द शिक्षण संस्था के सचिव लक्ष्मीकांत पारीक ने स्वागत उद्बोधन देते हुए सर्वांगीण विकास में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रचनात्मक गतिविधियों एवं सांस्कृतिक आयोजनों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सहयोग, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक समरसता का विकास करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी जीवन में प्राथमिकता देने का संदेश दिया। संस्था अध्यक्ष बजरंग लाल पारीक, उपाध्यक्ष नंदकिशोर पारीक, कोषाध्यक्ष बुद्धि प्रकाश पारीक सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

    महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) प्रमिला दुबे ने नवागंतुक विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि ‘आरोहण’ एक नई शुरुआत, नई संभावनाओं और उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर होने का प्रतीक है। महाविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान प्रदान करना ही नहीं, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन, आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना भी है।

    उन्होंने कहा कि भावी शिक्षक राष्ट्र की भावी पीढ़ी के निर्माता हैं। इसलिए उनमें विषयगत दक्षता के साथ संवेदनशीलता, नवाचार, नेतृत्व क्षमता और मानवीय दृष्टिकोण का होना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे शिक्षा के साथ साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभाएं और अपने व्यक्तित्व को बहुआयामी बनाएं।

    समारोह का एक महत्वपूर्ण आकर्षण महाविद्यालय की पत्रिका ‘पीयूष’ का विमोचन रहा। कार्यक्रम के अंतर्गत पुरस्कार वितरण समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न गतिविधियों एवं उपलब्धियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

     

    ‘डांडिया धूम’ में सांस्कृतिक रंगों की छटा

     

    समारोह का विशेष आकर्षण डांडिया महोत्सव ‘डांडिया धूम’ रहा। पारंपरिक वेशभूषा, आकर्षक सजावट और डांडिया की मधुर धुनों ने महाविद्यालय परिसर को उत्सवमय बना दिया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक डांडिया नृत्य में भाग लेकर भारतीय लोक-संस्कृति की मनमोहक झलक प्रस्तुत की। संगीत, नृत्य और उल्लास से परिपूर्ण वातावरण ने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया।

    इस आयोजन ने नवागंतुक विद्यार्थियों को महाविद्यालय परिवार से जुड़ने, अपने सहपाठियों के साथ आत्मीय संबंध स्थापित करने तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया।

     

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