Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की मजबूत रणनीति, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में हुआ इंडस्ट्री-एकेडेमिया मंथन

    1 hour ago

    -वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की मजबूत रणनीति, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में हुआ इंडस्ट्री-एकेडेमिया मंथन

    -एक्सपर्ट बोले- धीरे-धीरे बदलाव से बचेगी डोमेस्टिक इंडस्ट्री, मजबूत होगा एक्सपोर्ट

    -सस्टेनेबिलिटी विदेशी कॉन्सेप्ट नहीं, भारतीय संस्कृति का हिस्सा- डॉ. दिनेश गुप्ता

    -इंडस्ट्री-रेडी युवाओं और एजुकेशन-इंडस्ट्री तालमेल से 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

    जयपुर, दुनिया भर में चल रही जियो-पॉलिटिकल उथल-पुथल के बीच भारत एक मजबूत ग्लोबल पावर बनकर कैसे उभर रहा है? इसी अहम मुद्दे पर जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के जयपुर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (जेएसई) ने एक इंडस्ट्री-एकेडेमिया राउंडटेबल का आयोजन किया। 'विखंडित वैश्विक व्यवस्था में चुनौतियां और अवसर' थीम पर हुए इस मंथन का फोकस सिर्फ समस्याओं पर बात करना नहीं था, बल्कि भारत के भविष्य की रणनीति तैयार करना था।

    इस मौके पर एक्सपर्ट्स ने कई अहम बातें रखीं। उनके अनुसार सरकार की पॉलिसीज़ काफी प्रैक्टिकल रही हैं। क्वॉलिटी सर्कल फ़ोरम ऑफ़ इंडिया (क्यूसीएफ़आई) के वाइस चेयरमैन डॉ. रमेश मित्तल ने क्रूड ऑयल और ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) का उदाहरण देते हुए बताया कि अचानक कोई भी बड़ा बदलाव करने के बजाय धीरे-धीरे नीतियां लागू की जा रही हैं, ताकि हमारी अपनी डोमेस्टिक इंडस्ट्रीज को कोई नुकसान न हो।

    इसी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए फ़ेडरेशन ऑफ़ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री (फ़ोर्टी) की सदस्य अदिति खंडेलवाल ने भारत की युवा आबादी और कॉर्पोरेट से लेकर छोटे बिजनेस में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देश की ग्रोथ का एक बड़ा कारण बताया।

    वहीं, पर्यावरण के मुद्दे पर 'बैगमैन ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर डॉ. दिनेश गुप्ता ने क्लाइमेट चेंज पर चिंता जताते हुए सिंगल-यूज़ प्लास्टिक छोड़ने की अपील की। उन्होंने साफ कहा कि 'सस्टेनेबिलिटी' कोई विदेशी कांसेप्ट नहीं है, बल्कि यह हमेशा से हमारी भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है।

    ग्लोबल ट्रेड के बदलते समीकरणों पर पीएचडीसीसीआई के रेसिडेंट डायरेक्टर आर.के. गुप्ता ने बताया कि अगर हमें एक्सपोर्ट बढ़ाना है, तो अपने लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को तुरंत मजबूत करने के साथ प्रोडक्ट्स की क्वालिटी को भी इंटरनेशनल मानकों के हिसाब से तैयार करना होगा।

    शिक्षा और इंडस्ट्री के बेहतर तालमेल पर बात करते हुए, यूनिवर्सिटी के शिक्षकों व एक्सपर्ट्स ने 'ब्रेन ड्रेन' (प्रतिभा पलायन) रोकने और भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने पर भी जोर दिया, जिसके लिए छात्रों को इंडस्ट्री-रेडी बनाना होगा।

    'जेईसीआरसी इनक्यूबेशन सेंटर' व 'जेयू मेकरस्पेस' जैसे इनोवेटिव सेल को इसी दिशा में उठाए गए कदम मानते हुए, जेएसई डिपार्टमेंट की हेड डॉ. रविंदर कौर और स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के डीन प्रो. सुनील कुमार मिश्रा ने मौजूदा ग्लोबल अनिश्चितता के बीच भारत को लीडरशिप पोजीशन में लाने के लिए कई ठोस एवं प्रैक्टिकल रणनीतियों को विस्तार से बताया।

    चर्चा में यह बात उभर कर आई कि भारत के इस विज़न को साकार करने की असली कमान अब युवाओं के हाथ में है। उन्हें आगे आकर देश की ईको-फ्रेंडली सोच और 'लोकल नॉलेज' को ग्लोबल लेवल पर प्रमोट करना होगा, क्योंकि दुनिया में चाहे जितनी भी उथल-पुथल हो, भारत के पास ग्लोबल लीडर बनने का एक सुनहरा अवसर है।

    2047 तक 'विकसित देश' बनने का सिर्फ एक ही मंत्र है: इनोवेशन, संसाधनों का सही इस्तेमाल और पूरी तरह से आत्मनिर्भर होना।

    Click here to Read More
    Previous Article
    किशनगढ़ रेनवाल मे अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य समाज की श्री कमला शक्ति माता का 82 वा विशाल वार्षिक तीन दिवसीय मेला उत्सव का मन्दिर परिसर मे भव्य आयोजन
    Next Article
    डॉ.भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी सुपरवाइज़र के आवेदन आमंत्रित

    Related शिक्षा Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment