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    उच्च न्यायालय द्वारा राज्यपाल का आदेश पर स्टे ! डॉ देव स्वरूप की बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय पद पर ससम्मान बहाली

    1 hour ago

    महाधिवक्ता की मौजूदगी मैं जस्टिस रेखा बोरना ने स्टे किया 

    उच्च न्यायालय द्वारा राज्यपाल के आदेश जिसमें डॉ देव स्वरूप के राजस्थान विश्वविद्यालय कुलपति कार्यकाल में हुई शिक्षक चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी का हवाला देते हुए उन्हें बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलगुरु पद से बर्खास्त करने का आदेश दिया गया था, को स्टे करते हुए उनकी ससम्मान बहाली की है !

    डॉ देव स्वरूप द्वारा याचिका में कहा गया कि राज्यपाल द्वारा वास्तविकता को जाने बगैर एक तरफ़ा कार्रवाई करते हुए अवैधानिक तरीके

    से उन्हें बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलगुरु पद से हटाया गया है इसलिए राज्यपाल के आदेश को स्टे किया जाए !

    याचिका में यह भी कहा है कि 13 वर्ष पूर्व उनके कार्यकाल में सम्पादित हुई शिक्षक चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष तथा पारदर्शी थी ! शिक्षकों का चयन किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं किया जाता बल्कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत चयन समिति जिसमें केवल कुलपति ही नहीं होता बल्कि विषय विशेषज्ञों के अलावा राज्यपाल का प्रतिनिधि भी होता है जिसमें प्रत्येक अभ्यर्थी की परफॉरमेंस के आधार पर उसका मूल्यांकन कर सामूहिक रूप से निर्णय लिया जाता है इसलिए निहित प्रक्रिया द्वारा लिए गए निर्णय

    ही अंतिम हैं ! इसलिए ऐसा कोई भी आरोप कि किसी अभ्यर्थी को अधिक या कम अंक दिए गए बिल्कुल ही बेबुनियाद तथा यह उनकी छवि को ख़राब करने का प्रयास है !

    याचिका में यह भी कहा गया कि माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय की डिवीज़न बेंच द्वारा भी उक्त चयन प्रक्रिया को सभी पहलुओं से सही पाया गया था !

    याचिका में कहा गया कि ऐसी जाँच समिति की क्या विश्वसनीयता है जिसे गठित करने हेतु न तो निर्धारित प्रक्रिया अपनायी गयी और न ही जाँच समिति द्वारा तत्कालीन कुलसचिव, स्क्रीनिंग समिति के सदस्य,चयन समिति के सदस्य, सिंडिकेट के सदस्य तथा तत्कालीन कुलपति से कोई संपर्क कर तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त की गई और न ही इस बात का उल्लेख किया गया कि शिकायतकर्ता द्वारा इन सभी विषयों पर माननीय उच्च न्यायालय में दायर वाद अभी भी विचाराधीन है अर्थात् यह विषय सब ज्यूडिस है !

     

     

     

     

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