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    विकसित भारत के लिए अनुसंधान’ विषयक ऑनलाइन एनईपी कार्यक्रम का समापन

    1 hour ago

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर एवं महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के सहयोग से आयोजित आठ दिवसीय (22 से 29 अक्टूबर, 2026) ऑनलाइन एनईपी अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का समापन आज दिनांक 29 अक्टूबर, 2026 को हुआ। ‘विकसित भारत के लिए अनुसंधान’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 277 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया। कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षा में अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना तथा ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति में अनुसंधान की महत्त्वपूर्ण भूमिका के प्रति शिक्षकों को जागरूक करना था। कार्यक्रम के दौरान प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं विषय विशेषज्ञों ने अनुसंधान पद्धति, भारतीय ज्ञान परंपरा, अनुसंधान नैतिकता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), नवाचार, सतत विकास और आत्मनिर्भर भारत जैसे समसामयिक विषयों पर व्याख्यान दिए। विभिन्न सत्रों में अनुसंधान-आधारित शिक्षण, आलोचनात्मक चिंतन, अंतःविषयक सहयोग तथा पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर विशेष बल दिया गया। समापन समारोह में महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रंजना अग्रवाल ने आठ दिवसीय कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके पश्चात दो प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए। यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक प्रो. शिव प्रसाद ने समापन टिप्पणियाँ प्रस्तुत कीं। समारोह के मुख्य अतिथि मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़ के कुलपति प्रो. पी.के. डशोरा ने अपने संबोधन में अनुसंधान एवं ज्ञान सृजन के महत्त्व को रेखांकित किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के कुलपति प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने उच्च शिक्षा में अनुसंधान की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। अंत में आयोजन समिति की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को अनुसंधान की नवीन प्रविधियों, अकादमिक नवाचार एवं नैतिक शोध प्रक्रियाओं की उपयोगी जानकारी प्रदान की। साथ ही, शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समाजोपयोगी ज्ञान के सृजन और सतत विकास के लिए अनुसंधान-आधारित दृष्टिकोण अपनाने हेतु प्रेरित किया। यह आयोजन ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प की दिशा में उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान की भूमिका को सशक्त बनाने वाला एक महत्त्वपूर्ण प्रयास हैं 

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