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    राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अनुरूप शिक्षा में नवाचार

    3 months ago

    – बच्चों पर किताबों का भार होगा कम: शासन सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग
    जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार “शिक्षित राजस्थान–समर्थ राजस्थान” के संकल्प को साकार करने की दिशा में निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्राथमिक शिक्षा को अधिक बाल–अनुकूल, सरल और सीखने में रुचिकर बनाने के उद्देश्य से पाठ्यपुस्तकों के भार को कम करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। यह पहल न केवल विद्यार्थियों के शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि विद्यार्थियों की  सीखने की क्षमता और रुचि को भी बढ़ाने वाली  साबित होगी।

    स्कूल शिक्षा विभाग के शासन सचिव  कृष्ण कुणाल ने उक्त संबंध में  अधिक जानकारी देते हुए बताया  कि कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों की पुस्तकों को जोड़कर इस शैक्षणिक वर्ष में दो चरणों में, प्रत्येक चरण में दो–दो पुस्तकों के रूप में वितरित किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों के स्कूल बैग का भार लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। यह व्यवस्था बच्चों के लिए पढ़ाई को बोझ नहीं, बल्कि आनंद का माध्यम बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

    उन्होंने बताया कि अगले शैक्षणिक वर्ष से प्रत्येक तिमाही के लिए केवल एक ही समेकित पुस्तक भेजी जाएगी, जिससे बच्चों पर किताबों का भार और घटकर 25 प्रतिशत रह जाएगा। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अनुरूप है, जिसमें विद्यार्थियों पर अनावश्यक शैक्षणिक दबाव कम करने, समग्र विकास तथा अनुभवात्मक शिक्षण पर विशेष बल दिया गया है।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में  शिक्षित राजस्थान अभियान के  तहत राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि बच्चों को हल्का स्कूल बैग, सुरक्षित वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। शिक्षा केवल परीक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व, कौशल और नैतिक मूल्यों के विकास का माध्यम बने। पुस्तक भार कम करने की यह पहल भी  इसी सोच का परिणाम है।

    – गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही उद्देश्य

    गौरतलब है कि राज्य में  शिक्षा की गुणवत्ता में  सुधार के लिए निरंतर बहुआयामी प्रयास किए जा रहे  है। इन्हीं प्रयासों के तहत विद्यालयों में आधारभूत संरचनाओं का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। नए कक्षा-कक्ष, स्मार्ट क्लास, विज्ञान प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय तथा स्वच्छ पेयजल एवं शौचालय सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

    डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देते हुए ई–कंटेंट, स्मार्ट बोर्ड और आईसीटी आधारित शिक्षण को प्राथमिक विद्यालयों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे बच्चे तकनीक के साथ सीख सकें।

    नामांकन वृद्धि और ड्रॉपआउट कम करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

    समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देते हुए दिव्यांग, वंचित एवं ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए विशेष योजनाएं लागू की जा रही हैं।

    –व्यवहारिक, आधुनिक और विद्यार्थी-केंद्रित स्कूल शिक्षा के लिए अभिनव पहल

    शासन सचिव ने बताया कि इन सभी पहलों का उद्देश्य शिक्षा को व्यवहारिक, आधुनिक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है। पुस्तक भार में कमी से बच्चों की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी, सीखने में रुचि विकसित होगी और अभिभावकों की चिंता भी कम होगी।

    राज्य सरकार की यह दूरदर्शी पहल राजस्थान को शिक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। यह कदम आने वाले वर्षों में बच्चों के शैक्षणिक परिणामों, स्वास्थ्य और समग्र विकास पर सकारात्मक परिणाम का एक बड़ा कदम साबित होगा।

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