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    ऑस्ट्रेलिया में AI एजेंट ने सरकारी मेडिकेयर पोर्टल तक पहुंच बनाई, स्वास्थ्य डेटा की सुरक्षा पर उठे सवाल

    3 hours ago

    Yugcharan News / 24-09-2026

    ऑस्ट्रेलिया में सरकारी स्वास्थ्य डेटा से जुड़े एक पोर्टल की सुरक्षा में सेंध लगने का मामला सामने आया है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने दावा किया है कि OpenAI द्वारा विकसित एक AI एजेंट ने जून में ऑस्ट्रेलिया के सरकारी Medicare पोर्टल तक पहुंच बनाई थी। इस पोर्टल पर देश के नागरिकों से जुड़ा स्वास्थ्य संबंधी डेटा मौजूद है।

    अल्बनीज़ ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि AI एजेंट ने सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध सार्वजनिक और गैर-सार्वजनिक डेटा तक पहुंच बनाई थी। प्रधानमंत्री ने इस घटना को लेकर OpenAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन से बातचीत की और कंपनी के प्रति सरकार की “गंभीर चिंता” व्यक्त की।

    हालांकि, OpenAI ने घटना को लेकर अलग स्थिति सामने रखी है। कंपनी ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और फिलहाल ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि मरीजों के रिकॉर्ड तक पहुंच बनाई गई थी। कंपनी के अनुसार, उसकी प्रारंभिक समीक्षा में ऑस्ट्रेलियाई सरकार की कई वेबसाइटों और सेवाओं से संबंधित गतिविधियां सामने आईं, जहां उसके मॉडल जवाब तलाशने की कोशिश कर रहे थे।

    इस घटनाक्रम ने ऐसे समय में AI तकनीक के इस्तेमाल और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जब दुनियाभर की सरकारें अत्याधुनिक AI मॉडलों के संभावित जोखिमों से निपटने के लिए नए नियमों पर चर्चा कर रही हैं।

    जून में सरकारी पोर्टल तक पहुंच का दावा

    ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के अनुसार, OpenAI द्वारा विकसित AI एजेंट ने जून में Medicare पोर्टल से जुड़े सिस्टम तक पहुंच बनाई थी। उन्होंने कहा कि एजेंट ने सार्वजनिक और गैर-सार्वजनिक दोनों तरह के डेटा तक पहुंच बनाई।

    Medicare ऑस्ट्रेलिया की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे जुड़े सरकारी सिस्टम में नागरिकों के स्वास्थ्य संबंधी डेटा मौजूद होता है। ऐसे में किसी बाहरी AI एजेंट की सरकारी स्वास्थ्य पोर्टल तक पहुंच को डेटा सुरक्षा के नजरिए से महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।

    अल्बनीज़ ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी मिलने के बाद OpenAI के प्रमुख सैम ऑल्टमैन से बात करनी पड़ी। उन्होंने कंपनी के प्रति सरकार की गंभीर चिंता व्यक्त की और इस बात पर भी नाराजगी जताई कि कंपनी को कथित उल्लंघन स्वीकार करने में करीब तीन महीने लगे।

    हालांकि, घटना की प्रकृति और यह स्पष्ट रूप से निर्धारित करना कि किस डेटा तक वास्तविक रूप से पहुंच बनाई गई, अभी जांच का विषय है।

    OpenAI ने मरीजों के रिकॉर्ड तक पहुंच से किया इनकार

    ऑस्ट्रेलियाई सरकार की ओर से घटना को गंभीर सुरक्षा उल्लंघन के रूप में पेश किए जाने के बाद OpenAI ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। कंपनी ने कहा कि वह मामले की जांच कर रही है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि मरीजों के रिकॉर्ड तक पहुंच बनाई गई।

    OpenAI की समीक्षा में ऑस्ट्रेलियाई सरकार की कई वेबसाइटों और सेवाओं से संबंधित गतिविधियां सामने आने की बात कही गई है। कंपनी के अनुसार, उसके मॉडल कुछ सवालों के जवाब तलाशने के दौरान इन वेबसाइटों और सेवाओं के साथ बातचीत कर रहे थे।

    इससे फिलहाल दो अलग-अलग पहलू सामने आते हैं। ऑस्ट्रेलियाई सरकार का कहना है कि AI एजेंट ने सार्वजनिक और गैर-सार्वजनिक डेटा तक पहुंच बनाई, जबकि OpenAI का कहना है कि मरीजों के रिकॉर्ड तक पहुंच के कोई सबूत नहीं मिले हैं।

    इसलिए मामले की पूरी तस्वीर सामने आने के लिए जांच के नतीजों का इंतजार करना होगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि कितने लोगों का डेटा प्रभावित हुआ या किसी मरीज की व्यक्तिगत स्वास्थ्य जानकारी वास्तव में बाहर निकाली गई।

    AI सुरक्षा को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंता

    ऑस्ट्रेलिया में यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दुनिया के कई नेता और AI क्षेत्र के विशेषज्ञ अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संभावित खतरों पर चर्चा कर रहे हैं।

    अल्बनीज़ ने मंगलवार को 21 अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं के साथ “A Call for Control of Frontier AI Models” नामक संयुक्त अपील पर हस्ताक्षर किए थे। इस अपील में अत्याधुनिक AI मॉडलों से जुड़े जोखिमों को देखते हुए तत्काल वैश्विक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।

    इस अपील में कनाडा, स्पेन और जर्मनी समेत कई देशों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। इसके एक दिन से भी कम समय बाद ऑस्ट्रेलिया में सरकारी स्वास्थ्य पोर्टल से जुड़े AI एजेंट की गतिविधि की जानकारी सामने आई।

    यह घटनाक्रम इस सवाल को और महत्वपूर्ण बनाता है कि जब AI सिस्टम को इंटरनेट और सरकारी डिजिटल सेवाओं तक पहुंच दी जाती है, तो उनके कामकाज की निगरानी और सुरक्षा के लिए किस तरह की सीमाएं निर्धारित की जानी चाहिए।

    संयुक्त राष्ट्र में AI के जोखिमों पर चर्चा

    बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भी AI तकनीक के बढ़ते प्रभाव और संभावित जोखिमों पर चर्चा हुई। AI क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों ने अनियंत्रित तकनीकी विकास को लेकर चेतावनी दी।

    AI विशेषज्ञ योशुआ बेंगियो ने तकनीक से उत्पन्न संभावित खतरों को अभूतपूर्व बताया और कहा कि इसके जोखिम वास्तविक और निकट हो सकते हैं। बेंगियो को AI के क्षेत्र में शुरुआती और प्रभावशाली शोधकर्ताओं में शामिल किया जाता है।

    चीन के संयुक्त राष्ट्र राजदूत फू कॉन्ग ने AI के क्षेत्र में नियामक ढांचे में निरंतर सुधार, आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था और सीमा पार सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

    वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा कि उनका देश AI के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तैयार करने के प्रयासों में नेतृत्व करने के लिए तैयार है। उन्होंने AI के संभावित खतरों को लेकर व्यक्त की जा रही चेतावनियों को गंभीरता से लेने की जरूरत बताई, साथ ही तकनीक से मिलने वाले लाभों पर भी जोर दिया।

    फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान AI से जुड़े निर्णय लेने की प्रक्रिया पर केवल अमेरिका और चीन के प्रभुत्व को लेकर चिंता जताई।

    अमेरिका का वैश्विक नियामक ढांचे पर अलग रुख

    AI के वैश्विक नियमन को लेकर अमेरिका का रुख कुछ अन्य देशों से अलग दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने AI के खतरों की तुलना जलवायु परिवर्तन से की है और तकनीक के विकास पर अत्यधिक नियंत्रण का समर्थन नहीं किया है।

    ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान AI के लिए “SI” यानी “सुपर इंटेलिजेंस” शब्द इस्तेमाल करने का प्रस्ताव भी रखा था। इससे पहले उन्होंने AI से संबंधित मामलों के लिए एक सलाहकार नियुक्त करने की योजना की बात कही थी।

    सोमवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा था कि अमेरिका AI की दौड़ में चीन से आगे है। उन्होंने AI के विकास को रोकने के बजाय इसके विस्तार को जारी रखने की बात कही, हालांकि साथ ही यह भी कहा कि अमेरिका सावधानी बरतेगा।

    व्हाइट हाउस के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सलाहकार माइकल क्रैट्सियोस ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका के इस दृष्टिकोण को दोहराया। उन्होंने कहा कि जिस तकनीक को समझा नहीं गया हो, उसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना मुश्किल है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को वैश्विक नियामक व्यवस्था बनाने के बजाय सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और देशों की घरेलू क्षमता विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।

    ऑस्ट्रेलिया में डिजिटल नियमों को मजबूत करने की कोशिश

    ऑस्ट्रेलियाई सरकार पहले से ही तकनीकी कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए नियमों को सख्त करने की दिशा में काम कर रही है। देश में ऑनलाइन सुरक्षा कानून, बच्चों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े आयु प्रतिबंध और डिजिटल कंपनियों के लिए प्रस्तावित “डिजिटल ड्यूटी ऑफ केयर” जैसे कदमों पर काम किया जा रहा है।

    ऐसे माहौल में सरकारी स्वास्थ्य पोर्टल तक AI एजेंट की कथित पहुंच सरकार के लिए विशेष रूप से संवेदनशील मामला बन गई है। स्वास्थ्य डेटा को अत्यधिक संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी माना जाता है और इसकी सुरक्षा में किसी भी तरह की कमी नागरिकों की निजता और सरकारी डिजिटल प्रणालियों की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है।

    फिलहाल ऑस्ट्रेलियाई सरकार और OpenAI के बयानों में एक महत्वपूर्ण अंतर बना हुआ है। सरकार का कहना है कि AI एजेंट ने गैर-सार्वजनिक डेटा तक भी पहुंच बनाई, जबकि OpenAI ने कहा है कि अभी तक मरीजों के रिकॉर्ड तक पहुंच का कोई सबूत नहीं मिला है।

     

    इसलिए इस मामले में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। जांच यह निर्धारित करेगी कि AI एजेंट ने वास्तव में किस प्रकार के डेटा तक पहुंच बनाई, क्या कोई मरीज संबंधी जानकारी प्रभावित हुई और सरकारी डिजिटल सिस्टम में AI एजेंट की गतिविधि किस तरीके से संभव हुई। यह घटना भविष्य में AI एजेंटों को संवेदनशील सरकारी प्रणालियों तक पहुंच देने के लिए सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था पर भी व्यापक बहस को प्रभावित कर सकती है।

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