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    17 दिन में ही क्षतिग्रस्त हुआ ₹16 करोड़ का पुल, भारी बारिश के बाद संपर्क मार्ग धंसा, जांच के आदेश

    1 hour ago

    Yugcharan News / 29-07-2026

    उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हाल ही में निर्मित एक पुल के संपर्क मार्ग (एप्रोच रोड) के धंस जाने की घटना ने राज्य में सार्वजनिक अवसंरचना की गुणवत्ता और निर्माण कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगभग ₹16 करोड़ की लागत से तैयार किया गया यह पुल उद्घाटन के महज 17 दिन बाद ही भारी बारिश के कारण प्रभावित हो गया। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि पुल की मुख्य संरचना सुरक्षित है, लेकिन एप्रोच रोड का बड़ा हिस्सा धंसने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

    घटना के बाद राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। यदि जांच में निर्माण कार्य या निगरानी में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है।

    भारी बारिश के बाद धंसा संपर्क मार्ग

    जानकारी के अनुसार, देहरादून के नंदा की चौकी क्षेत्र में स्थित पुल का उद्घाटन 12 जुलाई 2026 को किया गया था। मंगलवार सुबह हुई लगातार बारिश के बाद पुल से जुड़ा एप्रोच रोड अचानक धंस गया, जिससे सड़क का एक बड़ा हिस्सा गहरे गड्ढे में तब्दील हो गया और पुल का संपर्क देहरादून–पांवटा साहिब राष्ट्रीय मार्ग से टूट गया।

    स्थानीय प्रशासन के अनुसार, रातभर हुई तेज बारिश के कारण सड़क के नीचे की मिट्टी बह गई, जिससे संपर्क मार्ग कमजोर होकर धंस गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक निरीक्षण में पुल की मुख्य संरचना सुरक्षित दिखाई दे रही है और नुकसान केवल संपर्क मार्ग तक सीमित है।

    पिछले वर्ष बह गया था पुराना पुल

    यह पुल उस पुराने पुल के स्थान पर बनाया गया था, जो पिछले वर्ष सितंबर में आई भीषण बारिश और बाढ़ के दौरान बह गया था। उस हादसे में 14 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद क्षेत्र के लिए एक नए और मजबूत पुल के निर्माण का निर्णय लिया गया।

    नया पुल मूल रूप से अप्रैल 2026 तक तैयार होना था, लेकिन निर्माण कार्य में देरी के बाद इसका उद्घाटन जुलाई में किया गया। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सामने आई यह घटना स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है।

    सरकार ने दिए जांच के निर्देश

    घटना के बाद जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) ने तत्काल स्थिति का जायजा लिया। जिला मजिस्ट्रेट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि यदि निर्माण कार्य, डिजाइन या निगरानी में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

    लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी क्षेत्रीय मुख्य अभियंता को तीन दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में घटना के कारणों, तकनीकी पहलुओं और संभावित जिम्मेदारियों का उल्लेख करने को कहा गया है।

    सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यदि प्रारंभिक जांच में किसी अधिकारी या निर्माण एजेंसी की लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    यातायात पर पड़ा व्यापक असर

    संपर्क मार्ग धंसने के कारण देहरादून, विकासनगर और हिमाचल प्रदेश के बीच आवागमन प्रभावित हुआ। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित मार्ग को अस्थायी रूप से बंद कर दिया और वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाने लगा।

    जिला आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नदी का जलस्तर कम होने के बाद ही मिट्टी भराई और स्थायी मरम्मत का कार्य सुरक्षित रूप से शुरू किया जा सकेगा। सिंचाई विभाग की टीम भी मौके पर तैनात की गई है ताकि नदी के बहाव को नियंत्रित कर आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सके।

    इस बीच प्रशासन ने कुछ स्थानों पर अस्थायी मरम्मत कर सीमित यातायात बहाल करने की कोशिश भी की है, जबकि स्थायी समाधान के लिए तकनीकी टीम लगातार काम कर रही है।

    निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

    घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पुल निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने पुल का संपर्क मार्ग इतने कम समय में क्षतिग्रस्त होना चिंता का विषय है।

    स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और वैज्ञानिक मानकों के अनुसार किया गया होता, तो इतनी जल्दी इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। कई लोगों ने इस मामले में पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कहा कि सार्वजनिक धन से बनने वाली परियोजनाओं में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए और निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए।

    विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

    सिविल इंजीनियरिंग और आपदा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में पुल निर्माण के दौरान केवल पुल की संरचना ही नहीं, बल्कि एप्रोच रोड, मिट्टी की मजबूती, जल निकासी व्यवस्था और नदी के बहाव का भी वैज्ञानिक अध्ययन अत्यंत आवश्यक होता है।

    यदि जल निकासी प्रणाली प्रभावी नहीं हो या मिट्टी का पर्याप्त संरक्षण न किया जाए, तो लगातार बारिश के दौरान एप्रोच रोड कमजोर पड़ सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि घटना के वास्तविक कारणों का पता तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।

    सरकार की प्राथमिकता सड़क बहाली

    राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित मार्ग को जल्द से जल्द सुरक्षित रूप से बहाल करना प्राथमिकता है। संबंधित विभागों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने और मरम्मत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

    अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक तकनीकी सुधार भी किए जाएंगे।

    आगे क्या?

    देहरादून में नए पुल के संपर्क मार्ग के धंसने की घटना ने सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि पुल की मुख्य संरचना सुरक्षित है, लेकिन अंतिम स्थिति तकनीकी जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।

     

    अब सभी की नजर जांच के निष्कर्षों पर टिकी है। यदि लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई संभव है। वहीं स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सड़क को जल्द सुरक्षित रूप से बहाल किया जाएगा और भविष्य की परियोजनाओं में गुणवत्ता तथा सुरक्षा मानकों का और अधिक सख्ती से पालन किया जाएगा।

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