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    देशभक्ति और सेवा का संगम: स्वतंत्रता दिवस पर बेगस के युवाओं ने बच्चों को कराया भोजन, पुरखों की परंपरा को रखा जीवित

    48 minutes ago

    बेगस/ जयपुर। स्वतंत्रता दिवस केवल ध्वजारोहण और भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने और आपस में प्रेम व सौहार्द बांटने का भी अवसर है। इसी भावना को चरितार्थ करते हुए बेगस गांव के युवाओं ने अपने पुरखों की सदियों पुरानी सामाजिक एकता और सेवा की परंपरा को जीवंत बनाए रखा। 15 अगस्त के पावन अवसर पर गांव के ज्ञान दास बाबा की बगीची में स्कूली बच्चों के लिए विशाल भोजन प्रसादी (भंडारे) का आयोजन किया गया।

    ​इस आयोजन के जरिए स्थानीय युवाओं ने न केवल अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत किया, बल्कि समाज के सामने निस्वार्थ सेवा और एकजुटता का एक बेमिसाल अनूठा उदाहरण भी पेश किया।

    ​दिन-रात की मेहनत से मिली आयोजन को सफलता

    ​कार्यक्रम को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए स्थानीय युवाओं की टोली पिछले कई दिनों से तैयारियों में जुटी हुई थी। युवाओं ने भोजन की व्यवस्था, प्रांगण की साफ-सफाई और बच्चों के बैठने के प्रबंध को लेकर दिन-रात एक कर मेहनत की। सुबह से ही ज्ञान दास बाबा की बगीची में चहल-पहल शुरू हो गई थी। अनुशासन और प्रेम के साथ युवाओं ने अपनी ज़िम्मेदारी संभाली और यह सुनिश्चित किया कि हर बच्चे तक भोजन प्रसादी सहजता से पहुँचे।

    ​सैंकड़ों बच्चों ने ग्रहण किया स्वादिष्ट भोजन

    ​इस आयोजन में बेगस एवं आसपास के क्षेत्रों के विभिन्न स्कूलों से आए सैकड़ों बच्चों ने भाग लिया। बगीची के प्रांगण में एक साथ पंक्ति में बैठकर बच्चों ने स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन प्रसादी ग्रहण की। बच्चों के चेहरों पर झलकी मुस्कान और उत्साह ने युवाओं की इस मेहनत को सार्थक बना दिया। आयोजकों ने बच्चों को भोजन कराने के साथ-साथ उनके साथ समय बिताया और उनसे विभिन्न विषयों पर संवाद भी किया।

    ​सामाजिक मूल्यों व देशभक्ति की भावना से जोड़ने का अनूठा प्रयास

    ​यह आयोजन महज एक भोजन कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से नई पीढ़ी में अच्छे संस्कारों और सामाजिक मूल्यों का बीजारोपण करने की कोशिश की गई। युवाओं ने बच्चों को देश के स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका और आपस में भाईचारे के साथ रहने का महत्व समझाया। बच्चों को बताया गया कि कैसे छोटी-छोटी सेवा भावनाएं देश को एक मजबूत सूत्र में पिरोने का काम करती हैं।

    ​सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती परंपरा

    ​गांव के बुजुर्गों का कहना है कि ज्ञान दास बाबा की बगीची में हर साल होने वाला यह आयोजन केवल एक सामाजिक उत्सव नहीं, बल्कि गांव की धरोहर है। यह परंपरा न केवल बच्चों में सामाजिक समरसता, एकता और भाईचारे को बढ़ावा देती है, बल्कि आज के युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने का भी एक सशक्त माध्यम बनी हुई है। आधुनिकता के इस दौर में जहां लोग अपनी परंपराओं से दूर हो रहे हैं, बेगस के युवाओं की यह पहल पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक बनी हुई है।

    ​आयोजन के अंत में युवाओं ने संकल्प लिया कि वे अपने बुजुर्गों द्वारा शुरू की गई इस पावन परंपरा को भविष्य में भी इसी तरह पूरे उत्साह और निष्ठा के साथ आगे बढ़ाते रहेंगे।

     

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