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    दिल्ली पुलिस ने X से प्रधानमंत्री और संवैधानिक पदाधिकारियों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक पोस्ट हटाने को कहा, यूज़र विवरण भी मांगा

    1 hour ago

    Yugcharan News / 29-07-2026

    नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में हाल के छात्र प्रदर्शनों के बाद सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री को लेकर दिल्ली पुलिस ने अपनी निगरानी और कार्रवाई को और तेज कर दिया है। पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) को एक औपचारिक पत्र भेजकर ऐसे पोस्ट और वीडियो हटाने का अनुरोध किया है, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक, अभद्र या आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है।

    इसके साथ ही पुलिस ने संबंधित अकाउंट धारकों की पहचान से जुड़ी जानकारी भी मांगी है ताकि आवश्यकता पड़ने पर आगे की जांच की जा सके। यह कार्रवाई हाल ही में हुए छात्र आंदोलनों और उनसे जुड़े ऑनलाइन कंटेंट की समीक्षा के बाद सामने आई है।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को भेजा गया आधिकारिक पत्र

    जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने X को भेजे गए पत्र में उन पोस्टों और वीडियो को हटाने का अनुरोध किया है, जिनमें कथित रूप से प्रधानमंत्री तथा अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया है।

    पुलिस ने सोशल मीडिया कंपनी से अनुरोध किया है कि ऐसे कंटेंट को प्लेटफॉर्म से हटाने के साथ-साथ संबंधित अकाउंट संचालकों की आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए ताकि जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

    अधिकारियों का कहना है कि यह कदम कानून के दायरे में रहकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित सामग्री की समीक्षा के तहत उठाया गया है।

    किन जानकारियों की मांग की गई?

    दिल्ली पुलिस ने X से संबंधित खातों के बारे में विस्तृत तकनीकी जानकारी मांगी है। इसमें उपयोगकर्ता का नाम, पता, ईमेल आईडी, संपर्क विवरण, लॉग-इन और लॉग-आउट रिकॉर्ड, पोस्ट प्रकाशित होने की तारीख और समय जैसी जानकारी शामिल बताई गई है।

    इसके अलावा पुलिस ने प्लेटफॉर्म से अनुरोध किया है कि संबंधित पोस्टों और वीडियो से जुड़े सभी डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर उन्हें जांच में उपयोग किया जा सके।

    पुलिस ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Bharatiya Sakshya Adhiniyam) की धारा 63(4) के तहत आवश्यक प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है।

    छात्र आंदोलन के बाद बढ़ी निगरानी

    दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शनों और उसके बाद सामने आए ऑनलाइन कंटेंट की समीक्षा के बाद की गई है।

    पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद सोशल मीडिया पर बड़ी मात्रा में पोस्ट, वीडियो और टिप्पणियां साझा की गईं, जिनमें से कुछ की शिकायतें प्राप्त हुई थीं।

    इन्हीं शिकायतों के आधार पर सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम ने विभिन्न प्लेटफॉर्म पर सामग्री की जांच शुरू की और जिन पोस्टों को प्रथम दृष्टया आपत्तिजनक माना गया, उनके संबंध में संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस भेजे गए।

    लगातार सक्रिय है सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम

    दिल्ली Police ने कहा है कि उसकी साइबर और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग इकाइयां चौबीसों घंटे ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रख रही हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी पोस्ट में कानून का उल्लंघन, घृणा फैलाने, सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने या आपत्तिजनक सामग्री साझा करने के संकेत मिलते हैं, तो संबंधित प्लेटफॉर्म को आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचित किया जाता है।

    पुलिस का कहना है कि यह प्रक्रिया केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी महत्वपूर्ण सार्वजनिक घटनाओं के दौरान नियमित रूप से अपनाई जाती है।

    हालिया विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा मामला

    बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई उन शिकायतों के बाद की गई, जिनमें आरोप लगाया गया था कि हाल के छात्र प्रदर्शनों और 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा वाले पोस्ट साझा किए गए थे।

    पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित सामग्री की जांच शुरू की गई और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई।

    हालांकि यह जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

    डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने पर जोर

    साइबर अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी ऑनलाइन जांच में डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है।

    लॉग-इन विवरण, समय-सीमा, आईपी रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी जानकारी भविष्य में किसी भी जांच या न्यायिक प्रक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य का काम कर सकती है।

    इसी कारण जांच एजेंसियां अक्सर सोशल मीडिया कंपनियों से संबंधित डेटा सुरक्षित रखने का अनुरोध करती हैं ताकि किसी भी डिजिटल साक्ष्य में बदलाव या नुकसान न हो।

    Meta से जुड़े विवाद के बाद बढ़ी चर्चा

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में Meta के प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित एक वीडियो हटाए जाने को लेकर भी विवाद हुआ था।

    केंद्रीय सरकार ने इस मामले में Meta के वरिष्ठ अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा था। बाद में कंपनी ने कहा कि तकनीकी त्रुटि (ग्लिच) के कारण संबंधित सामग्री गलती से हट गई थी और यह जानबूझकर नहीं किया गया।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन और आईटी नियमों के पालन को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।

    अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी जिम्मेदारी

    विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया आज लोकतांत्रिक संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है, लेकिन इसके साथ कानूनी जिम्मेदारियां भी जुड़ी हुई हैं।

    भारतीय संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार पूर्णतः असीमित नहीं है। यदि किसी पोस्ट से हिंसा भड़कने, सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने, घृणा फैलाने या कानून का उल्लंघन होने की आशंका हो, तो संबंधित एजेंसियां कानूनी कार्रवाई कर सकती हैं।

    इसी प्रकार सोशल मीडिया कंपनियों की भी जिम्मेदारी है कि वे लागू कानूनों और न्यायिक निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक सहयोग प्रदान करें।

    आगे क्या?

    फिलहाल दिल्ली पुलिस द्वारा X को भेजे गए पत्र के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस अनुरोध पर क्या कदम उठाता है।

    यदि प्लेटफॉर्म आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराता है, तो पुलिस संबंधित खातों और पोस्टों की जांच आगे बढ़ा सकती है। दूसरी ओर, डिजिटल अधिकारों से जुड़े विशेषज्ञ इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा ऑनलाइन जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।

     

    आने वाले दिनों में जांच की प्रगति, सोशल मीडिया कंपनियों की प्रतिक्रिया और संभावित कानूनी कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी। यह घटनाक्रम एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि डिजिटल युग में ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी, कानूनी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।

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