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    RTE को लेकर प्रदेशभर में असमंजस्य, निजी स्कूलों की मनमानी और शिक्षा विभाग की लापरवाही से अभिभावक परेशान — बिना सूचना चयनित विद्यार्थियों के नामांकन किए जा रहे निरस्त

    2 weeks ago

    - संयुक्त अभिभावक संघ के तत्वाधान में शनिवार को दोपहर 1 बजे से अभिभावकों की महत्वपूर्ण बैठक

    जयपुर। प्रदेश में RTE (Right to Education) के तहत प्रवेश प्रक्रिया को लेकर इस वर्ष भी भारी अव्यवस्था और असमंजस्य की स्थिति बनी हुई है। संयुक्त अभिभावक संघ ने आरोप लगाया है कि एक ओर जहां निजी स्कूल मनमानी पर उतारू हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग की लापरवाही से अभिभावकों को लगातार परेशान होना पड़ रहा है। विभाग की निष्क्रियता के चलते निजी स्कूलों को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिल रहा है और अभिभावकों को बार-बार चक्कर काटने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

     

    संघ ने सवाल उठाया है कि जब शिक्षा विभाग को RTE के तहत प्रवेश सुनिश्चित नहीं कराने थे, तो प्रदेशभर के लगभग 6 लाख अभिभावकों से आवेदन क्यों मांगे गए? आवेदन प्रक्रिया में अभिभावकों से दस्तावेज, समय और धन खर्च करवाने के बाद अब उन्हें उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा है। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो अभिभावक सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

     

    *प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू के अनुसार,* सत्र 2026-27 के लिए RTE के तहत हजारों विद्यार्थियों का चयन 12 मार्च 2026 को किया गया था, लेकिन जमीनी स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। 14 दिन बीत जाने के बावजूद अभिभावक स्कूलों और शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा है।

     

    *उन्होंने बताया कि* संघ को प्राप्त शिकायतों के अनुसार लगभग 30% से 40% चयनित विद्यार्थियों के आवेदन बिना स्पष्ट कारण के निरस्त किए जा रहे हैं। कई मामलों में अभिभावकों को बिना किसी पूर्व सूचना के ही पोर्टल पर “Rejected” दिखाया जा रहा है, जो पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

     

    *संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने आरोप लगाया कि* निजी स्कूल RTE के तहत प्रवेश देने से बचने के लिए जानबूझकर दस्तावेजों में त्रुटियां निकालकर आवेदन खारिज कर रहे हैं। कई मामलों में स्कूल अभिभावकों से ऑफलाइन संपर्क कर फीस लेकर प्रवेश देने का प्रस्ताव दे रहे हैं, जो पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि जिस शिक्षा विभाग को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, वह मौन साधे बैठा है और अभिभावकों का शोषण होते हुए देख रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा कोई प्रभावी हेल्पलाइन या समाधान तंत्र उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे अभिभावक लगातार भटक रहे हैं और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।

     

    *शनिवार को बैठक का आयोजन*

     

    प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए संयुक्त अभिभावक संघ ने शनिवार को दोपहर 1 बजे शिक्षा संकुल के मुख्य द्वार पर अभिभावकों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। बैठक में अभिभावकों से चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। संघ ने सभी प्रभावित अभिभावकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर अपनी समस्या दर्ज कराएं, ताकि एकजुट होकर इस मुद्दे का समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

     

     

     

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