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    रामानंदाचार्य ने जन्म सत्ता की जगह व्यक्ति सत्ता को दिया महत्त्व

    3 months ago

    जगद्गुरु रामानंदाचार्य जयंती पर संगोष्ठी मध्यकालीन भक्ति आंदोलन में जगद्गुरु रामानंदाचार्य ने भारतीय समाज में धार्मिक आधार पर समरसता, समानता और एकता की नींव रखी। उन्होंने समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव को समाप्त करने के लिए कार्य किया। महात्मा कबीर, रैदास, धन्ना जाट और सैन भगत के माध्यम से उन्होंने उन आध्यात्मिक विभूतियों को प्रकट किया, जो आज भी सनातन धर्म को आलोकित कर रहे हैं। यह बात जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मदन मोहन झा ने शुक्रवार को रामानंदाचार्य जयंती समारोह में कही। उन्होंने कहा कि रामानंदाचार्य ने वेदांत की गूढ़ परम्परा को लोकभाषा के माध्यम से जनसामान्य तक पहुंचाया। संस्कृत की उच्च दार्शनिक परम्परा को सुरक्षित रखते हुए, उन्होंने भक्ति को अवधी और हिन्दी के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक जोड़ा। समारोह संयोजक शास्त्री कोसलेंद्रदास ने बताया कि राजस्थान मंत्र प्रतिष्ठान के निदेशक डॉ. देवेंद्र कुमार शर्मा ने वैदिक मंत्रों से रामानंदाचार्य की प्रतिमा का पूजन करवाया। धन्यवाद ज्ञापन उप कुलसचिव सुभाष शर्मा ने किया। समारोह में अनेक शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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