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    जेईसीआरसी में वार्षिक मीडिया फेस्ट 'मंथन 2026' का आयोजन: मीडिया और सिनेमा जगत की नामी हस्तियों ने की शिरकत

    4 days ago

    -“दुनिया को देके रोशनी बेनूर हो गए, हम नाम नहीं काम से मशहूर हो गए” -समीर अनजान; जेईसीआरसी मंथन 2026

    जयपुर,

    आधुनिक पत्रकारिता और तकनीक के बीच बढ़ते संवाद को एक मंच प्रदान करते हुए, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के जयपुर स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन द्वारा वार्षिक मीडिया फेस्ट 'मंथन 2026' का आयोजन किया गया। "एआई एंड द न्यू एज मीडिया: ट्रांसफॉर्मिंग स्टोरीज़, शेपिंग रियलिटी" की थीम पर आधारित इस दो दिवसीय आयोजन ने विशेषज्ञों और युवाओं के बीच भविष्य की मीडिया रूपरेखा पर सार्थक परिचर्चा का मार्ग प्रशस्त किया।

     

    एक गीतकार हमेशा कहानी और धुन के लिए लिखता है, न कि केवल अपने लिए- इसी विचार के साथ, नब्बे के दशक से लेकर आज तक अपनी कलम से पीढ़ियों को जोड़ने वाले 'गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड' विजेता और मशहूर बॉलीवुड गीतकार समीर अनजान ने बताया कि बेहतरीन कला तभी जन्म लेती है जब वे मानवीय संवेदनाओं से गहराई से जुड़ी हो। अपनी सफलता का श्रेय 'कर्म और समर्पण' को देते हुए उन्होंने युवाओं को 'नाम के बजाय अपने काम से मशहूर होने' का संदेश दिया। और जीवन में शब्दों की ताकत और उनकी अहमियत्ता बताई।

     

    'रातों-रात सफलता' को महज़ एक भ्रम बताते हुए वरिष्ठ पत्रकार व टीवी एंकर मनीष अवस्थी ने स्पष्ट किया कि ज्ञान सबसे स्थायी निवेश है। भाषाई दक्षता, क्लियर उद्देश्य और ज़मीनी संवेदनाओं को पत्रकारिता की असली ताकत बताई और एआई को महज़ एक सहायक टूल बताया।

     

    इसी विचार को व्यावहारिक रूप देते हुए, वरिष्ठ पत्रकार सौम्या वाजपेयी ने रिसर्च और फील्ड नेटवर्किंग के साथ युवाओं को 'प्रिंट मीडिया' से शुरुआत करने और एआई व सोशल मीडिया पर निर्भरता से बचते हुए 'प्रोफेशनल अप्रोच' अपनाने की सलाह दी।

     

    पुरुषोत्तम दिवाकर (सीनियर फ़ोटोजर्नलिस्ट, इंडिया टुडे) ने स्टूडेंट्स को विज़ुअल स्टोरीटेलिंग की ताकत समझाते हुए कहा कि एक सच्ची तस्वीर हज़ारों शब्दों से ज़्यादा असरदार होती है।

     

    वहीं, पूर्व यूनिसेफ़ विशेषज्ञ अनुपम श्रीवास्तव ने 'पब्लिक एडवोकेसी', सटीक विज़न और 'टारगेट ऑडियंस' को सफल रणनीतिक संचार का आधार बताते हुए, 'क्राइसिस मैनेजमेंट' व 'ह्यूमन इंटरेस्ट स्टोरीज़' के ज़रिए सकारात्मक सामाजिक प्रभाव छोड़ने पर बल दिया।

     

    एनडीटीवी के स्पोर्ट्स एडिटर विमल मोहन ने स्टूडेंट्स को खेल पत्रकारिता के रोमांच से रूबरू कराया तथा मैदान की कवरेज में 'जुनून' और 'सटीकता' को सबसे अहम बताया। अपनी पसंद और असली हुनर को पहचानने की सलाह देते हुए राजस्थान पत्रिका (जोधपुर) के संपादक संदीप पुरोहित ने 'कड़ी मेहनत' को मंज़िल तक पहुँचने का एकमात्र साधन बताया। साथ ही केवल तकनीक के भरोसे रहने के बजाय अपनी रचनात्मकता और सोच बढ़ाने को कहा। उनके अनुसार भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करना और अपने काम में गहराई लाना ही कामयाबी का सही रास्ता है।

    राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता- राम कमल मुखर्जी (फ़िल्म मेकर व जर्नलिस्ट) ने कम्फर्ट ज़ोन छोड़कर जोखिम उठाने, मानवीय नज़रिए और 'न्यू मीडिया' की ताकत पहचानने की सीख दी। व युवाओं को अपने कर्मों से 'खुद अपना हीरो' बनने के लिए प्रेरित किया।

    बेहतरीन कम्युनिकेशन में 'जवाबदेही' को सर्वोपरि बताते हुए, वरिष्ठ टीवी एंकर मेघा कौशिक ने 'तथ्यों' पर आधारित निष्पक्ष पत्रकारिता पर ज़ोर दिया और अच्छी प्रज़ेंटेशन हेतु 'वॉयस मॉड्यूलेशन' और सफल करियर के लिए 'पर्सनल ब्रांडिंग' को डिजिटल युग का अहम निवेश बताया।

    इसी कड़ी में, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट प्रो. विक्टर गंभीर ने एआई और 'मशीन लर्निंग' के तालमेल से 'कंटेंट क्रिएशन' सहित लगभग हर क्षेत्र में बड़े बदलावों के बारे में जानकारी दी।

    जेएमसी के डीन नरेंद्र कौशिक ने एआई को आज के दौर की सबसे बड़ी सच्चाई बताई जिसका प्रभाव अब शहरों से निकलकर ग्रामीण क्षेत्रों तक गहराई से पहुँच चुका है। कार्यक्रम में जेएमसी के डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह भाटी (हैड ऑफ़ डिपार्टमेंट) और सभी फ़ैकल्टी मेंबर्स मौजूद रहें।

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