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    हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर संपर्क साहित्य संस्थान का भव्य आयोजन-

    40 minutes ago

    हिंदी शब्दों में बसा हिंदुस्तान, डिजिटल युग में नई उड़ान

    हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर संपर्क साहित्यकारों ने हिंदी के भविष्य पर किया सार्थक मंथन

    जयपुर। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर संपर्क साहित्यिक संस्थान एवं फोर्टिज हॉस्पिटल के सहयोग से भव्य साहित्यिक एवं विचारपरक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा, प्रशासन एवं चिकित्सा जगत से जुड़े विशिष्ट अतिथियों और साहित्यकारों ने सहभागिता करते हुए हिंदी की वर्तमान स्थिति, डिजिटल युग की चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर सार्थक विमर्श किया।

    समारोह की मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार आगरा निवासी

    शुभधा पांडे, विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, राज्य महिला आयोग अध्यक्ष सीमा हिंगोनिया, संपर्क अध्यक्ष अनिल लढ़ा, हिन्दी प्रचार प्रसार सचिव अविनाश शर्मा, समन्वयक महासचिव रेनू शब्दमुखर, फोर्टिज हॉस्पिटल के डॉ.मनीष राजपूत ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया।

    कार्यक्रम का केंद्रीय विषय ‘डिजिटल युग में हिंदी : चुनौतियाँ, संभावनाएँ और भविष्य’ रहा। इसके साथ ‘हिंदी : शब्दों में बसा हिंदुस्तान’ विषय पर काव्य-पाठ ने समारोह को भावपूर्ण साहित्यिक रंग प्रदान किया।

    मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार, शिक्षाविद् एवं शोधकर्ता डॉ. शुभदा पांडे ने हिंदी को भारतीय संस्कृति और संवेदना की पहचान बताते हुए कहा कि हिंदी की वास्तविक शक्ति उसके शब्दों के साथ उसकी संवेदनशीलता, सरलता और जनसरोकारों में निहित है। उ

    विशिष्ट अतिथि सीमा हिंगोनिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, राजस्थान राज्य महिला आयोग, जयपुर एवं साहित्यकार, ने साहित्य को समाज का संवेदनशील दर्पण बताते हुए कहा कि साहित्य तभी सार्थक है, जब वह समाज की आवाज बनकर सामने आए।

    समन्वयक महासचिव रेनू शब्दमुखर ने स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा की जानकारी दी।

    संपर्क अध्यक्ष अनिल लढ़ा ने सम्पर्क संस्थान के रजत उत्सव व संस्थान के 25 वर्षों की उपलब्धियो पर प्रकाश डाला।

    वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ आरती भदौरिया ने संपर्क संस्थान के कार्यों का उलेख किया।

    विशिष्ट वक्ता डॉ. मनीष राजपूत, वरिष्ठ सलाहकार, वैस्क्युलर एवं इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी, ने साहित्यिक विमर्श के साथ स्वास्थ्य-जागरूकता को भी कार्यक्रम से जोड़ा। उन्होंने संतुलित जीवनशैली, नियमित स्वास्थ्य-जाँच, पौष्टिक आहार, पर्याप्त शारीरिक सक्रियता तथा तनाव प्रबंधन को स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक बताया।

    रेनू ‘शब्दमुखर’, समन्वयक महासचिव, हिंदी शिक्षिका,

    साहित्यकार ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संस्कार और संवेदनाओं की पहचान है। उन्होंने डिजिटल युग को हिंदी के लिए चुनौती के साथ-साथ नए अवसरों का माध्यम बताया।

    इन्होंने साहित्यिक परिचर्चा और काव्य में भाग लिया

    सरस्वती वंदना डॉ नमिता चौहान के द्वारा प्रस्तुत की गई।

    डॉ. सुषमा शर्मा, रेनू

    शब्दमुखर अर्चना निगम, अल्पना श्रीवास्तव, डॉ. कंचना सक्सेना विमलेश चौधरी, डॉ.नीलम कालरा,सुशीला सैनी,सीमा दीक्षित, लक्ष्मी अशोक,सुनीता त्रिपाठी, डॉ.रमा सिंह ,स्नेहा चौधरी,राशिका शर्मा, आरती भदौरिया ,रेणु श्रीवास्तव, लता भारद्वाज,

    विजया, शिवपाल सिंह ,

    सुशीला शर्मा,मनीषा मीणा,सुमन पहाड़िया,हरि. जे. मंगलानी,इति,

    दीपक कपूर, पवनेश्वरी सहित अनेक रचनाकारों ने हिंदी की सांस्कृतिक चेतना और भारतीयता को अपनी मौलिक रचनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया।

    कार्यक्रम का संचालन विजयलक्ष्मी जांगिड़ ने किया।

    समारोह का समापन रेनू श्रीवास्तव के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। फोर्टिस हॉस्पिटल के व्यवस्थापक संजय अग्रवाल ने स्वास्थ्य परक जानकारी दी।

     

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