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    डॉलर के मुकाबले रुपया 42 पैसे मजबूत, 91.51 पर बंद; कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिला सहारा

    2 hours ago

    केंद्रीय बजट 2026-27 के एक दिन बाद सोमवार को विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने मजबूती दिखाई। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 42 पैसे की बढ़त के साथ 91.51 पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की सक्रिय मौजूदगी ने रुपये को समर्थन दिया।

    इंटरबैंक फॉरेक्स बाजार में रुपये की शुरुआत 91.95 प्रति डॉलर पर हुई। कारोबार के दौरान यह 91.45 के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि दिन का निचला स्तर 91.95 रहा। सत्र के अंत में रुपया 91.51 (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद स्तर से उल्लेखनीय सुधार दर्शाता है।

    आरबीआई की भूमिका पर बाजार की नजर

    विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि आरबीआई 92 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को लेकर सतर्क नजर आ रहा है और इस स्तर के आसपास मुद्रा की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करता दिखाई दे रहा है। बाजार सहभागियों के मुताबिक, केंद्रीय बैंक का यह रुख रुपये में अत्यधिक कमजोरी को रोकने में अहम भूमिका निभा रहा है।

    पिछले सप्ताह शुक्रवार को रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 92.02 तक फिसल गया था, हालांकि उसी दिन यह 91.93 पर बंद हुआ था। सोमवार की मजबूती को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।

    बजट का असर: भरोसा, राहत नहीं

    विश्लेषकों का मानना है कि बजट ने रुपये को तत्काल राहत तो नहीं दी, लेकिन इससे निवेशकों में भरोसा जरूर बना है। सरकार की उच्च उधारी योजना को लेकर हालांकि कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। अगले वित्त वर्ष में सरकार के ₹17.2 लाख करोड़ उधार लेने का अनुमान है, ताकि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.3% के अनुमानित राजकोषीय घाटे को पूरा किया जा सके।

    एक शोध नोट में कहा गया कि बजट निरंतरता और सतर्कता पर केंद्रित है। मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और आर्थिक चुनौतियों के बीच सरकार ने राजकोषीय समेकन के मोर्चे पर संतुलित रुख अपनाया है।

    डॉलर और कच्चे तेल का रुख

    वैश्विक बाजार में डॉलर सूचकांक, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, 0.09% की बढ़त के साथ 97.07 पर कारोबार करता देखा गया। इसके बावजूद रुपये में मजबूती बनी रही, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट मानी जा रही है।

    ब्रेंट क्रूड, जो वैश्विक तेल बाजार का प्रमुख मानक है, वायदा कारोबार में 4.46% गिरकर 66.23 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और संभावित सैन्य कार्रवाई से बचने पर बातचीत की खबरों से तेल कीमतों पर दबाव पड़ा। इससे पहले सप्ताहांत में संभावित तनाव के चलते तेल 72 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था।

    घरेलू बाजारों से मिला समर्थन

    घरेलू शेयर बाजारों में तेज उछाल ने भी रुपये को सहारा दिया। बीएसई सेंसेक्स 943.52 अंकों की बढ़त के साथ 81,666.46 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 262.95 अंक चढ़कर 25,088.40 पर पहुंच गया। बाजार सहभागियों के अनुसार, बजट के बाद की अस्थिरता के शांत होने से भारतीय इक्विटी और मुद्रा बाजारों ने क्षेत्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया।

    विश्लेषकों का कहना है कि कमोडिटी कीमतों में ठंडक, बेहतर राजकोषीय नियंत्रण, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और कुछ कंपनियों की ओर से डॉलर की बिक्री ने रुपये के लिए सकारात्मक माहौल बनाया है।

    विदेशी निवेश और आगे की राह

    हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियां अभी भी सतर्क रुख दिखा रही हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एफआईआई ने हालिया सत्र में भारतीय शेयर बाजार से ₹588.34 करोड़ की निकासी की। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में डेरिवेटिव्स पर बढ़े लेनदेन कर और बायबैक टैक्स में बदलाव जैसे प्रस्तावों को लेकर निवेशकों में अभी भी कुछ अनिश्चितता है।

    निकट भविष्य को लेकर अनुमान है कि डॉलर-रुपया स्पॉट दर सीमित दायरे में रह सकती है। विश्लेषकों के अनुसार, रुपये को 91.10 के आसपास समर्थन मिल सकता है, जबकि 91.85 के पास इसे प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है।

     

    कुल मिलाकर, सोमवार का सत्र रुपये के लिए राहत भरा रहा। वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और आरबीआई की रणनीति पर आगे भी बाजार की नजर बनी रहेगी, जो आने वाले दिनों में रुपये की दिशा तय करेंगे।

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