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    आय से अधिक संपत्ति मामले में अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को सुप्रीम कोर्ट से जमानत

    2 hours ago

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में जमानत दे दी। शीर्ष अदालत ने यह राहत देते हुए इस बात पर जोर दिया कि मजीठिया पिछले सात महीनों से हिरासत में हैं और जांच में अत्यधिक देरी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश मजीठिया की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा जमानत से इनकार किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।

    हिरासत की अवधि पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी की लंबे समय तक हिरासत, जबकि जांच अभी पूरी नहीं हुई है, जमानत पर विचार करने का एक महत्वपूर्ण आधार है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पंजाब विजिलेंस ब्यूरो मामले की जांच में तेजी लाए और निर्धारित समयसीमा के भीतर इसे पूरा करे।

    इससे पहले 4 दिसंबर 2025 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मजीठिया की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट का कहना था कि यदि उन्हें रिहा किया गया तो वह जांच को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने विजिलेंस ब्यूरो को तीन महीने में जांच पूरी करने का निर्देश देते हुए यह भी कहा था कि इसके बाद मजीठिया दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    मामला क्या है

    पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने बिक्रम सिंह मजीठिया को 25 जून 2025 को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उन्होंने अपने ज्ञात आय स्रोतों से कहीं अधिक, लगभग ₹540 करोड़ की संपत्ति अर्जित की। यह प्राथमिकी वर्ष 2021 के एक ड्रग्स मामले की जांच के दौरान गठित विशेष जांच टीम (SIT) की पड़ताल से जुड़ी हुई है।

    सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मजीठिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस. मुरलीधर ने दलील दी कि उन्हें पहले ही एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत दर्ज एक मामले में जमानत मिल चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि उस जमानत को चुनौती देने वाली पंजाब सरकार की याचिका को सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है।

    आगे की प्रक्रिया

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मजीठिया को तय शर्तों के साथ रिहा किया जाएगा। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि जांच में पूरा सहयोग करना होगा और किसी भी तरह से साक्ष्यों या गवाहों को प्रभावित करने की अनुमति नहीं होगी।

    यह फैसला पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मजीठिया लंबे समय से राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा रहे हैं और उनके खिलाफ चल रहे मामलों पर लगातार राजनीतिक बहस होती रही है।

     
     
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