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    आईआरसीटीसी घोटाला मामला: तेजस्वी यादव की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई से मांगा जवाब

    3 months ago

    आईआरसीटीसी होटल घोटाले से जुड़े मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव को मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत तो नहीं मिली, लेकिन उनकी याचिका पर सुनवाई की दिशा जरूर तय हो गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी करते हुए तेजस्वी यादव की याचिका पर जवाब मांगा है। यह याचिका ट्रायल कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ आरोप तय किए जाने के आदेश को चुनौती देती है।

    मामले की सुनवाई कर रहीं न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह इस पर अपना पक्ष रखे। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 14 जनवरी तय की है। खास बात यह है कि उसी दिन इस मामले से जुड़ी पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और तेजस्वी के पिता लालू प्रसाद यादव की याचिका पर भी सुनवाई की जाएगी, जिससे यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से चर्चा में आ गया है।

    क्या है पूरा मामला

    आईआरसीटीसी होटल घोटाला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के दो होटलों के संचालन के ठेके नियमों को दरकिनार कर एक निजी कंपनी को दिए गए। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह सौदा पारदर्शी तरीके से नहीं हुआ और इसमें कथित तौर पर सत्ता के दुरुपयोग के जरिए निजी लाभ पहुंचाया गया।

    13 अक्टूबर 2025 को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और 11 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। इन सभी पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    किन धाराओं में आरोप

    ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(d)(ii) और (iii) के तहत आरोप तय किए हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोष सिद्ध होने पर अधिकतम 10 साल तक की सजा का प्रावधान है, जबकि धोखाधड़ी के मामले में यह सजा सात साल तक हो सकती है।

    इस मामले में जिन अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं, उनमें कई कारोबारी और कंपनियों के नाम भी शामिल हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सभी ने मिलकर एक सुनियोजित साजिश के तहत सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया।

    तेजस्वी और लालू का पक्ष

    तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव दोनों ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और उन्हें बिना ठोस सबूतों के इस मामले में घसीटा गया है। तेजस्वी यादव पहले भी सार्वजनिक मंचों से यह दावा करते रहे हैं कि जिस समय कथित अनियमितताएं हुईं, उस वक्त वे किसी भी तरह से निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल नहीं थे।

    उनके वकीलों का तर्क है कि ट्रायल कोर्ट ने आरोप तय करते समय तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर समुचित विचार नहीं किया, इसलिए इस आदेश को रद्द किया जाना चाहिए।

    राजनीतिक हलकों में हलचल

    दिल्ली हाईकोर्ट की इस कार्रवाई के बाद बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर इस मामले को लेकर हलचल तेज हो गई है। राजद समर्थकों का कहना है कि यह मामला विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का एक और उदाहरण है, जबकि सत्तारूढ़ दल के नेता इसे कानून के दायरे में चल रही सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी अहम है, क्योंकि तेजस्वी यादव बिहार की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा हैं और भविष्य में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    आगे क्या

    अब सभी की निगाहें 14 जनवरी पर टिकी हैं, जब दिल्ली हाईकोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई करेगा। उस दिन सीबीआई अपना जवाब दाखिल करेगी और कोर्ट यह तय करेगा कि आरोप तय करने के आदेश पर आगे क्या रुख अपनाया जाए। यदि हाईकोर्ट ट्रायल कोर्ट के आदेश में कोई खामी पाता है, तो यह मामला नई दिशा ले सकता है, वहीं अगर आदेश बरकरार रहता है तो मुकदमे की सुनवाई निचली अदालत में आगे बढ़ेगी।

     

    फिलहाल, यह कहना जल्दबाजी होगा कि इस कानूनी लड़ाई का अंत किस ओर जाएगा, लेकिन इतना तय है कि आईआरसीटीसी घोटाला मामला आने वाले समय में भी राजनीति और न्यायपालिका—दोनों में चर्चा का बड़ा विषय बना रहेगा।

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