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    शुरुआती बढ़त के बाद शेयर बाजार में गिरावट, प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव

    3 months ago

    मंगलवार को घरेलू शेयर बाजारों में शुरुआती तेजी के बाद दबाव देखने को मिला और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। सुबह के सत्र में सकारात्मक शुरुआत के बावजूद, बाद में बड़े और स्थापित शेयरों में बिकवाली बढ़ने से बाजार की दिशा बदल गई। निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना रहा, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया।

    कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में मजबूती दर्ज की गई। शुरुआती सत्र में निवेशकों की खरीदारी के चलते बाजार ने ऊपर की ओर रुख किया, लेकिन यह तेजी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी। कुछ ही समय बाद मुनाफावसूली और चुनिंदा बड़े शेयरों में कमजोरी के कारण सूचकांक अपनी शुरुआती बढ़त गंवाकर नीचे आ गए।

    बीएसई सेंसेक्स, जो शुरुआती कारोबार में मजबूत स्तर पर पहुंचा था, बाद में गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। इसी तरह एनएसई निफ्टी भी शुरुआती बढ़त के बाद दबाव में आ गया। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, हाल के दिनों में लगातार बनी अनिश्चितता और वैश्विक संकेतों के कारण निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते दिख रहे हैं।

    बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण बड़े और भरोसेमंद शेयरों में बिकवाली मानी जा रही है। इंजीनियरिंग, आईटी, ऊर्जा, दूरसंचार और धातु क्षेत्रों से जुड़े कई प्रमुख शेयरों में दबाव देखा गया। इन कंपनियों के शेयरों में कमजोरी ने बाजार की समग्र धारणा को प्रभावित किया और सूचकांकों पर नकारात्मक असर डाला।

    विशेष रूप से आईटी क्षेत्र के कुछ दिग्गज शेयरों में गिरावट देखी गई। हाल ही में आए तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे इस सेक्टर में दबाव बढ़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर बाजार फिलहाल सतर्क है और निवेशक आगे की स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं।

    वहीं दूसरी ओर, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के कुछ शेयरों में सीमित मजबूती देखने को मिली, जिससे बाजार को आंशिक सहारा मिला। चुनिंदा सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में खरीदारी दर्ज की गई, लेकिन यह तेजी बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही।

    आर्थिक मोर्चे पर हालिया आंकड़ों ने भी निवेशकों की सोच को प्रभावित किया है। खुदरा महंगाई से जुड़े ताजा संकेतों पर बाजार की नजर बनी हुई है। हालांकि महंगाई का स्तर अब भी एक सीमित दायरे में है, लेकिन खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर निवेशक सतर्क बने हुए हैं।

    संस्थागत गतिविधियों की बात करें तो हाल के सत्रों में विदेशी निवेशकों की ओर से सतर्क रुख देखने को मिला है, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक बाजार में सक्रिय बने हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की भागीदारी से बाजार को कुछ हद तक सहारा मिल रहा है, लेकिन वैश्विक संकेतों और अन्य कारकों के चलते उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

    एशियाई बाजारों से मिले-जुले संकेत मिले। कुछ प्रमुख एशियाई सूचकांकों में मजबूती देखने को मिली, जबकि कुछ बाजारों में सीमित दबाव रहा। वैश्विक बाजारों की चाल का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला, जिससे निवेशकों ने सतर्क रणनीति अपनाई।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निकट भविष्य में शेयर बाजार की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी, जिनमें वैश्विक आर्थिक संकेत, कंपनियों के तिमाही नतीजे और संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां शामिल हैं। फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी जा रही है।

    दीर्घकालिक निवेशकों के लिए विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव को अवसर के रूप में देखा जा सकता है, बशर्ते निवेश सोच-समझकर और मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों में किया जाए। वहीं अल्पकालिक निवेशकों के लिए सतर्कता बरतना जरूरी माना जा रहा है।

     

    कुल मिलाकर, मंगलवार का कारोबार यह संकेत देता है कि बाजार फिलहाल स्थिर दिशा की तलाश में है। शुरुआती तेजी के बावजूद बिकवाली का दबाव यह दर्शाता है कि निवेशक अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। आने वाले दिनों में आर्थिक आंकड़े और वैश्विक घटनाक्रम बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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