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    संस्कृत विश्वविद्यालय में कल से शुरू होगा विद्यावारिधि शोध प्रशिक्षण सत्र

    4 days ago

    तुलसी सभागार में आयोजित होगा भव्य उद्घाटन समारोह, राजनीति और अध्यात्म जगत की हस्तियां होंगी शामिल

    जयपुर। जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में सोमवार, 20 अप्रैल को विद्यावारिधि (पीएच.डी.) के छह मासिक शोध प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा। विश्वविद्यालय परिसर स्थित तुलसी सभागार में सुबह 11:15 बजे आयोजित होने वाले इस समारोह में शोध के नए मानकों और भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन पर चर्चा होगी।

    प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति

    समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हवामहल विधायक और कार्यपरिषद सदस्य बालमुकुंदाचार्य महाराज उपस्थित रहेंगे। उनके साथ ही सारस्वत अतिथि के तौर पर प्रसिद्ध कथावाचक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक संतोष सागर महाराज शोधार्थियों का मार्गदर्शन करेंगे।

    विशिष्ट अतिथि के रूप में जमवारामगढ़ विधायक महेंद्र पाल मीणा और सम्मानित अतिथि के रूप में बगरू विधायक कैलाश वर्मा कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर मदन मोहन झाकरेंगे।

    शोध की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान

    यह छह मासिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शोधार्थियों को अनुसंधान की बारीकियों, डेटा विश्लेषण और शास्त्रीय ग्रंथों के वैज्ञानिक विवेचन से परिचित कराना है। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य है कि यहाँ से होने वाले शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।

    प्रशासनिक व्यवस्थाएं पूर्ण

    कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए विश्वविद्यालय ने व्यापक तैयारियां की हैं। आयोजन की कमान इन प्रमुख अधिकारियों के हाथों में है:

     संयोजक:डॉक्टर गुंजन सोनी, RAS (कुलसचिव)

     समन्वयक: डॉक्टर राजधर मिश्र (निदेशक, अनुसंधान केंद्र)

     समन्वयक: डॉक्टर विनोद कुमार शर्मा (निदेशक, शैक्षणिक परिसर)

    कार्यक्रम की रूपरेखा

     दिनांक: 20 अप्रैल 2026 (सोमवार)

     समय:सुबह 11:15 बजे

     स्थान: तुलसी सभागार, विश्वविद्यालय परिसर

    कल होने वाले इस आयोजन में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक और नवनियुक्त शोधार्थी हिस्सा लेंगे। इस प्रशिक्षण सत्र के माध्यम से संस्कृत भाषा और आधुनिक शोध पद्धतियों के बीच एक नया सेतु स्थापित होने की उम्मीद है।

     

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