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    सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें आज भी सक्रिय, देश को सतर्क और एकजुट रहने की आवश्यकता: प्रधानमंत्री मोदी

    3 months ago

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर परिसर में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान कहा कि आज़ादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली कुछ ताकतें आज भी समाज में मौजूद हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को ऐसी सोच के प्रति सतर्क रहते हुए एकजुट और सशक्त बने रहना होगा, ताकि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा की जा सके।

    प्रधानमंत्री मोदी इस अवसर पर शौर्य यात्रा का नेतृत्व कर रहे थे, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। रोशनी, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आधुनिक तकनीक के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम ने सोमनाथ को भक्ति और गौरव के रंग में रंग दिया। इस आयोजन में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी भी उपस्थित रहे।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास केवल टूटने या हार की कहानी नहीं है, बल्कि यह पुनर्निर्माण, धैर्य और निरंतरता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि समय के साथ कई घटनाएं हुईं, लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी अपनी भव्यता और आस्था के साथ खड़ा है, जो भारत की सांस्कृतिक शक्ति को दर्शाता है।

    यह कार्यक्रम सोमनाथ मंदिर से जुड़ी एक ऐतिहासिक घटना के एक हजार वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते समय में मंदिर को बार-बार नुकसान पहुंचाने के प्रयास किए गए, लेकिन हर बार समाज की सामूहिक इच्छा और संकल्प ने इसे फिर से खड़ा किया। उन्होंने इसे भारत की आत्मा और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था, तब भी कई प्रकार की बाधाएं सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि उस दौर में भी कुछ विचारधाराएं इस प्रयास के पक्ष में नहीं थीं। प्रधानमंत्री के अनुसार, इतिहास के कुछ पहलुओं को लंबे समय तक सही रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे नई पीढ़ी को पूरी सच्चाई से परिचित होने में समय लगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह भारत की सभ्यतागत निरंतरता का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे इस मंदिर ने समय की चुनौतियों का सामना किया, वैसे ही भारत ने भी विभिन्न दौर में कठिन परिस्थितियों को पार करते हुए आगे बढ़ना सीखा है।

    प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में यह संदेश दिया कि देश की सांस्कृतिक विरासत को समझना और उसका सम्मान करना वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इतिहास से सीख लेकर समाज को सकारात्मक दिशा में आगे ले जाना आवश्यक है, न कि विभाजन या भ्रम को बढ़ावा देना।

    कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक मौजूद रहे। स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। आयोजन शांतिपूर्ण और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि सोमनाथ की कहानी भारत की कहानी है—एक ऐसी कहानी जो निरंतर संघर्ष, पुनर्निर्माण और आत्मविश्वास से भरी हुई है। उन्होंने कहा कि देश को अपनी विरासत से प्रेरणा लेकर भविष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ाने चाहिए।

    यह आयोजन न केवल ऐतिहासिक स्मृति का अवसर था, बल्कि समाज को एकजुटता, सांस्कृतिक सम्मान और सकारात्मक सोच का संदेश देने का भी माध्यम बना।

     
     
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