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    साइकोलॉजी एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसः फ्रॉम ऑब्ज़र्वेशन टू रिसर्च विषय पर तीन दिवसीय आर एंड डी अवेयरनेस

    3 months ago

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के मनोविज्ञान विभाग एवं सेंटर फॉर रिसर्च एंड डेवलपमेंट के संयुक्त तत्वावधान में ‘साइकोलॉजी एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसः फ्रॉम ऑब्ज़र्वेशन टू रिसर्च विषय पर तीन दिवसीय आर एंड डी अवेयरनेस एवं कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल के अंतर्गत आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में अनुसंधान अभिरुचि विकसित करना, शोध संस्कृति को प्रोत्साहित करना तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मनोवैज्ञानिक प्रभावों के प्रति जागरूकता बढाऩा था। कार्यक्रम में कुल 62 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें महाविद्यालय की छात्राओं के साथ-साथ सुबोध ऑटोनॉमस कॉलेज के कुछ विद्यार्थी भी सम्मिलित रहे। कार्यक्रम के प्रथम दिवस पर डॉ. शुभम रंजन, सहायक आचार्य, इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, जे.के. लक्ष्मीपत यूनिवर्सिटी, जयपुर द्व्रारा विशेषज्ञ व्याख्यान एवं हैंड्स-ऑन सत्र आयोजित किया गया, जिसमें छात्राओं को ए.आई. एवं मनोविज्ञान के अंतर्संबंध, मानव व्यवहार पर ए.आई. के प्रभाव तथा अनुसंधान को व्यवहार में लागू करने की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। इस दिन छात्राओं ने ए.आई. आधारित गतिविधियों के माध्यम से विभिन्न मनोवैज्ञानिक संरचनाओं को समझा। द्वितीय दिवस पर छात्राओं का यादगार (YADGAR) ट्रैफिक कंट्रोल रूम, जयपुर का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया, जहाँ उन्हें यह समझाया गया कि किस प्रकार तकनीक एवं ए.आई. की सहायता से यातायात का प्रबंधन एवं निगरानी की जाती है तथा मानव व्यवहार को मॉनिटर एवं नियंत्रित किया जाता है। इस अवसर पर सुमित मेहरदा (आईपीएस, 2019 बैच), डीसीपी ट्रैफिक, जयपुर पुलिस कमिश्नरेट ने छात्राओं से संवाद किया तथा ट्रैफिक पुलिस प्रेम सिंह द्वारा समन्वय एवं मार्गदर्शन प्रदान किया गया। तृतीय दिवस पर छात्राओं द्वारा दैनिक जीवन में ए.आई. की उपयोगिता से संबंधित विभिन्न विषयों पर लागु अनुसंधान प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। कुल 11 समुहों के अंतर्गत लगभग 41 छात्राओं ने अपने शोध विचार प्रस्तुत किए। सभी प्रस्तुतियाँ अत्यंत सराहनीय रहीं, जिससे निर्णायक डॉ. शुचि चौधरी, विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग के लिए विजेताओं का चयन करना कठिन हो गया। कार्यक्रम से छात्राओं में अनुसंधान क्षमता, आलोचनात्मक चिंतन एवं व्यवहारिक अनुसंधान दृष्टिकोण का विकास हुआ, जिससे कार्यक्रम अपने उद्देश्य में सफल रहा। प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने कार्यक्रम की सफलता पर मनोविज्ञान विभाग की सराहना करते हुए छात्राओं को अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित किया। कार्यक्रम का समन्वयन एवं संचालन मनोविज्ञान विभाग की प्राध्यापिकाएं आयुषी सोरल एवं जेनिस हाशमी द्वारा किया गया।

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