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    RTE दाखिला विवाद : *कड़ी धूप में शिक्षा संकुल पर जुटे अभिभावक और विद्यार्थी, मांगा शिक्षा का अधिकारी, नहीं तो इस्तीफा दो सरकार

    1 hour ago

     

    -- बच्चों से उनका मौलिक अधिकार छिन्ना कलंक, सरकार, शिक्षा विभाग और निजी स्कूलों की मिलीभगत बर्दाश्त नहीं - संयुक्त अभिभावक संघ

     

    --- 10 दिनों की चेतावनी, दाखिला नहीं मिला तो शिक्षा संकुल पर होगा आमरण अनशन, संयुक्त शिक्षा निदेशक को दिया ज्ञापन

     

    जयपुर। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत सत्र 2026-27 में चयनित लगभग 1.90 लाख बच्चों को 50 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं मिलना राज्य सरकार, शिक्षा विभाग और निजी स्कूल संचालकों की संवेदनहीनता, लापरवाही और मनमानी का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है। संयुक्त अभिभावक संघ ने इस पूरे मामले को गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन बताते हुए गुरुवार को सुबह प्रातः 11 बजे से कड़ी धूप और भीष्म गर्मी के बीच शिक्षा संकुल के मुख्य द्वार पर सरकार और शिक्षा विभाग सहित निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ ना केवल हल्ला बोल प्रदर्शन किया बल्कि राज्य सरकार से आरटीई में चयनित विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का अधिकार दो नहीं तो पद से इस्तीफा दो सहित निजी स्कूलों की मनमानी बंद करने की मांग के नारे लगाकर विरोध प्रकट करते हुए शिक्षा निदेशक सीताराम जाट के नाम ज्ञापन संयुक्त शिक्षा निदेशक मंजू शर्मा को ज्ञापन दिया। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल, प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू, मनोज बडजात्या, इमरान कुरैशी, पंडित लोकेश शर्मा, सत्यनारायण नामा, मोहमद जफर सहित बड़ी संख्या अभिभावकगण अपने चयनित बच्चों के साथ खड़े हुए। 

     

    संघ ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम केवल कागजों तक सीमित होकर रह गया है। एक ओर सरकार “सबको शिक्षा” और “शिक्षा का अधिकार” जैसे बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर चयनित बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। निजी स्कूल खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं, अतिरिक्त दस्तावेज और फीस मांग रहे हैं, लेकिन शिक्षा विभाग तमाशबीन बना बैठा है। 

     

    *संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि* “यदि राज्य सरकार और शिक्षा विभाग अब भी नहीं जागे तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी जनआक्रोश में बदल जाएगा। गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार स्पष्ट करे कि आखिर निजी स्कूलों के सामने उसकी मजबूरी क्या है? जब चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो बच्चों को प्रवेश क्यों नहीं मिल रहा? यह सीधा-सीधा शिक्षा अधिकार कानून की हत्या है।”

     

    *प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि* “राज्य सरकार, शिक्षा विभाग और निजी स्कूलों की त्रिकोणीय मिलीभगत ने गरीब परिवारों के बच्चों का भविष्य बंधक बना दिया है। शिक्षा विभाग की निष्क्रियता और निजी स्कूलों की मनमानी ने साबित कर दिया है कि प्रदेश में कानून नहीं बल्कि स्कूल सिंडिकेट लॉबी का राज चल रहा है। यदि जल्द सभी चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं मिला तो संयुक्त अभिभावक संघ प्रदेशभर में उग्र आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और जवाबदेही अभियान शुरू करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी और जवाबदेही सरकार और शिक्षा विभाग की होगी।”

     

    संघ ने मांग की कि सभी चयनित विद्यार्थियों को तत्काल प्रभाव से प्रवेश दिलाया जाए, नियमों की अवहेलना करने वाले निजी स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई हो, मान्यता निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाए तथा जिला शिक्षा अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

     

    संयुक्त अभिभावक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि बच्चों के शिक्षा अधिकारों के साथ खिलवाड़ बंद नहीं हुआ और अगले 10 दिनों में चयनित विद्यार्थियों को दाखिले नहीं मिले तो इसी शिक्षा संकुल के मुख्य द्वार पर अभिभावकों द्वारा आमरण अनशन किया जाएगा साथ ही प्रदेशभर में अभिभावक सड़कों पर उतरकर बड़ा जनआंदोलन खड़ा करेंगे।

     

     

     

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