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    राज्य स्तरीय करियर परामर्श कार्यशाला ने विद्यार्थियों के भविष्य को दिखाई दिशा

    1 day ago

    — शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास को लेकर विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव और मार्गदर्शन के नवाचार मॉडल

    जयपुर। 'आज के तेजी से बदलते दौर में करियर का चयन केवल अंक या परंपरा के आधार पर नहीं किया जा सकता। विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की रुचि, योग्यता और बदलते रोजगार परिदृश्य को समझते हुए उन्हें सही दिशा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।' 

     

    इसी सोच को साकार करने के लिए जयपुर के एक निजी होटल में 'व्यापक करियर मार्गदर्शन' विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों के अनुरूप करियर मार्गदर्शन को विद्यालयी शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने की दिशा में ठोस सुझाव साझा किए। इस दौरान माई करियर ऐप की जानकारी भी दी गयी।

     

    कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिक्षा अधिकारी, शिक्षाविद्, करियर काउंसलर, शिक्षकगण और सफल हुए विद्या​र्थी शामिल हुए। पूरे दिन चले सत्रों में इस बात पर गहन चर्चा हुई कि कैसे विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को आत्म-मूल्यांकन, निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास से लैस किया जाए ताकि वे अपने भविष्य एवं रोजगार को लेकर सजग एवं सक्षम बन सकें। कार्यक्रम में विभिन्न प्रतिभागियों ने अपने स्वयं के अनुभव भी साझा किए।

     

    विषय विशेषज्ञों के मुताबिक, अब करियर विकल्प केवल डॉक्टर, इंजीनियर या प्रशासनिक सेवाओं तक सीमित नहीं हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, ग्रीन जॉब्स, स्टार्टअप, स्किल आधारित रोजगार और डिजिटल उद्यमिता जैसे नए क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं। कार्यशाला में इन उभरते क्षेत्रों की जानकारी के साथ-साथ विद्यार्थियों को उनके अनुरूप तैयार करने की रणनीतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि करियर मार्गदर्शन को केवल एक बार की गतिविधि नहीं, बल्कि सतत प्रक्रिया के रूप में विकसित किया जाए। 

     

    अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक अशोक कुमार मीणा ने वर्तमान के बदलते परिदृश्य में विद्यालयों में प्रशिक्षित काउंसलर, शिक्षक मार्गदर्शक एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से करियर मार्गदर्शन की सुविधा हर विद्यार्थी तक पहुंचाने पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने कहा कि करियर गाइडेंस के बिना बच्चों का समग्र विकास असंभव है। उन्होंने करियर बनाने से ज्यादा करियर जीने और नैतिक मूल्यों पर जोर दिया।

     

    इस अवसर पर उपायुक्त संतोष मीना ने कहा कि जब विद्यार्थी अपने भीतर की क्षमताओं को पहचानते हैं, तभी वे आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बन पाते हैं।

     

    समापन सत्र में प्रतिभागियों ने एक स्वर में कहा कि राज्य में एक समन्वित और प्रभावी करियर मार्गदर्शन मॉडल विकसित किया जाना चाहिए, जिससे ग्रामीण और शहरी—दोनों क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सकें। यह कार्यशाला केवल संवाद का मंच नहीं थी, बल्कि प्रदेश के विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा देने की एक मजबूत पहल बनकर उभरी।

     

    इस दौरान राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् (व्यावसायिक शिक्षा) के उप निदेशक डालचंद्र गुप्ता, यूनिसेफ की एजुकेशन एक्सपर्ट श्रीमती अमृता एवं एजुकेशन ऑफिसर जितेंद्र शर्मा, अंतरंग फाउंडेशन की संयुक्त कार्यकारी निदेशक श्रीमती स्वाति मोहन सहित शिक्षा विशेषज्ञ, करियर काउंसलर एवं शिक्षक उपस्थित रहे। मॉडरेटर एक्सपर्ट श्रीमती प्राची वैंकटारमनन रहीं।

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