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    मेट्टूर बाँध में जलस्तर 92.22 फीट पर, जल प्रबंधन और आगामी सिंचाई सीजन पर बनी नजर

    3 months ago

    तमिलनाडु की जीवनरेखा मानी जाने वाली कावेरी नदी पर स्थित मेट्टूर बाँध (स्टैनली जलाशय) में बुधवार को जलस्तर 92.22 फीट दर्ज किया गया। यह पूर्ण जलस्तर क्षमता 120 फीट की तुलना में अभी भी काफी नीचे है, लेकिन जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान स्थिति को स्थिर माना जा रहा है। बाँध में इस समय 218 क्यूसेक पानी का आवक दर्ज किया गया, जबकि 2,000 क्यूसेक पानी का निकास जारी है।

    मेट्टूर बाँध राज्य के डेल्टा क्षेत्रों के लिए सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और विद्युत उत्पादन के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। हर साल इसका जलस्तर किसानों, नीति-निर्माताओं और आम नागरिकों के लिए चिंता और उम्मीद दोनों का विषय रहता है। मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि जलाशय में पानी की उपलब्धता नियंत्रित ढंग से बनाए रखी जा रही है, ताकि आने वाले महीनों की जरूरतों को संतुलित किया जा सके।

    कावेरी डेल्टा के लिए अहम संकेत

    मेट्टूर बाँध का जलस्तर विशेष रूप से कावेरी डेल्टा के जिलों — जैसे तिरुचिरापल्ली, तंजावुर, तिरुवरूर और नागपट्टिनम — के किसानों के लिए निर्णायक भूमिका निभाता है। इन क्षेत्रों में धान और अन्य फसलों की सिंचाई काफी हद तक इसी बाँध से छोड़े जाने वाले पानी पर निर्भर करती है।

    कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि 92 फीट से अधिक का जलस्तर एक “मध्यम स्थिति” को दर्शाता है। यह न तो अत्यधिक संकट की ओर इशारा करता है और न ही पूरी तरह संतोषजनक स्थिति मानी जा सकती है। आने वाले हफ्तों में कावेरी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से मिलने वाली वर्षा और पड़ोसी राज्यों से जल प्रवाह की स्थिति इस पर बड़ा असर डालेगी।

    जल आवक और निकासी का संतुलन

    जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल बाँध में पानी की आवक अपेक्षाकृत कम है, जबकि निकासी अधिक रखी गई है। इसका उद्देश्य निचले इलाकों में पेयजल आपूर्ति और मौजूदा सिंचाई जरूरतों को पूरा करना है। साथ ही, अचानक अधिक जलस्तर बढ़ने की स्थिति में बाँध की संरचनात्मक सुरक्षा भी ध्यान में रखी जाती है।

    एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जल निकासी का निर्णय दैनिक आधार पर लिया जाता है और इसमें मौसम पूर्वानुमान, नदी के प्रवाह, तथा जलाशय की भंडारण क्षमता जैसे कई कारकों को ध्यान में रखा जाता है। “हमारा प्रयास यह है कि पानी का उपयोग विवेकपूर्ण ढंग से हो, ताकि गर्मी के महीनों में किसी तरह की कमी न आए,” अधिकारी ने कहा।

    किसानों की उम्मीद और चिंता

    डेल्टा क्षेत्र के कई किसानों ने कहा कि वे मेट्टूर बाँध के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। तिरुचिरापल्ली जिले के एक किसान ने बताया, “अगर अगले कुछ हफ्तों में जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ता है, तो आगामी खेती के लिए भरोसा बनेगा। लेकिन अगर आवक इसी तरह कम रही, तो हमें वैकल्पिक योजनाओं पर विचार करना पड़ेगा।”

    किसान संगठनों का मानना है कि सरकार को समय रहते स्पष्ट जल रिलीज़ योजना घोषित करनी चाहिए, ताकि फसल चक्र की योजना बेहतर ढंग से बनाई जा सके। उनका कहना है कि अनिश्चितता के कारण बीजाई और निवेश से जुड़े फैसले प्रभावित होते हैं।

    मौसम और भविष्य की स्थिति

    मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार, कावेरी बेसिन में आने वाले दिनों में हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना जताई गई है। यदि यह अनुमान सटीक साबित होता है, तो मेट्टूर बाँध में जल आवक में धीरे-धीरे सुधार देखा जा सकता है। हालांकि, जल विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अल्पकालिक वर्षा पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।

    जल नीति से जुड़े जानकारों का यह भी कहना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और सिंचाई के आधुनिक तरीकों को बढ़ावा देना जरूरी है। मेट्टूर जैसे बड़े बाँधों पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में चुनौती बन सकती है, खासकर जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में।

    प्रशासन की सतर्कता

    राज्य प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मेट्टूर बाँध की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में त्वरित कदम उठाए जा सकें।

    अधिकारियों का कहना है कि आम जनता को घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन जल उपयोग में सावधानी और संयम बरतना सभी के हित में है। आने वाले दिनों में जलस्तर और प्रवाह से जुड़े अद्यतन आंकड़े नियमित रूप से साझा किए जाते रहेंगे।

    कुल मिलाकर, मेट्टूर बाँध में वर्तमान जलस्तर न तो पूरी तरह राहत देने वाला है और न ही तत्काल संकट का संकेत। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें संतुलित प्रबंधन, मौसम की अनुकूलता और समय पर नीतिगत निर्णय आने वाले महीनों की दिशा तय करेंगे।

     
     
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